सिक्किम के रिम्बी गांव में भारी बारिश के बाद भूस्खलन से 30 से ज्यादा घर प्रभावित हुए। सड़कें बंद हैं और प्रशासन राहत कार्य में जुटा है।
Sikkim Landslide: 30 Homes Hit

नई दिल्ली: पहाड़ों में लगातार बारिश हो तो खूबसूरत नजारे कुछ ही घंटों में खतरे में बदल सकते हैं। सिक्किम में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। पश्चिम सिक्किम के रिम्बी गांव में भारी बारिश के बीच हुए भूस्खलन ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ी से मिट्टी और पत्थरों का बड़ा हिस्सा नीचे की ओर आया और इसकी चपेट में रिहायशी इलाकों के साथ कुछ सरकारी इमारतें भी आ गईं।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस घटना से 30 से ज्यादा मकान प्रभावित हुए हैं। बिजली विभाग के सरकारी क्वार्टरों को भी नुकसान पहुंचा है। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि इस घटना में किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की खबर सामने नहीं आई है। लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि इलाके में बारिश जारी है और कमजोर पहाड़ी ढलानों पर दोबारा मलबा गिरने की आशंका बनी हुई है।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में टीमों को भेजकर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। वहीं, कई सड़कों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासन के सामने सड़क संपर्क और जरूरी सेवाओं को सामान्य करने की चुनौती भी है।

रिम्बी में अचानक बिगड़े हालात
पश्चिम सिक्किम का रिम्बी इलाका पहाड़ी ढलानों और घने हरियाली वाले क्षेत्र में आता है। लगातार बारिश के कारण यहां जमीन में नमी बढ़ गई है। इसी दौरान गुरुवार रात अचानक भूस्खलन हुआ।
लैंडस्लाइड के दौरान पहाड़ी से मिट्टी, छोटे-बड़े पत्थर और पानी तेजी से नीचे की ओर आए। रिहायशी इलाकों के करीब मलबा पहुंचने से स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन ने प्रभावित जगहों की निगरानी बढ़ा दी।
लैंडस्लाइड का वीडियो भी सामने आया है। इसमें पहाड़ी ढलान से मलबे का तेज बहाव दिखाई देता है। वीडियो ने यह भी दिखाया कि पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान हालात कितनी तेजी से बदल सकते हैं।
30 से ज्यादा घरों पर असर
प्रशासन की शुरुआती जानकारी में 30 से अधिक घरों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। हालांकि, नुकसान का वास्तविक आंकड़ा विस्तृत सर्वे के बाद ही सामने आएगा।
किसी घर को मामूली नुकसान हुआ है या वह रहने के लायक नहीं रहा, इसका आकलन अलग-अलग तरीके से किया जाता है। इसलिए फिलहाल सामने आया आंकड़ा प्रारंभिक माना जा रहा है।
बिजली विभाग के कुछ सरकारी क्वार्टरों को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। प्रशासन यह देख रहा है कि किन परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाने की जरूरत है।
#WATCH | Sikkim | A major landslide in the Rimbi area has left more than 30 houses affected. The incident was triggered by heavy mudslides and debris coming down from the upper slopes, sending large quantities of mud, rocks and other debris towards the lower areas
— ANI (@ANI) September 25, 2026
(Video source:… pic.twitter.com/5rhBlSoiTB
रिम्बी में पहले भी बढ़ी थी चिंता
मौजूदा Sikkim Landslide घटना को केवल एक दिन की बारिश से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। रिम्बी और आसपास के इलाकों में सितंबर के दौरान भी जमीन खिसकने और सड़कें बाधित होने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
इससे स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ गई है। अगर किसी पहाड़ी क्षेत्र में पहले से जमीन कमजोर हो और उसके बाद लगातार बारिश होती रहे तो वहां दोबारा भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
इसी वजह से प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई है। जहां जरूरत पड़ रही है, वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।
कई इलाकों में सड़कें बनीं मुश्किल
लैंडस्लाइड का सबसे तत्काल असर सड़क संपर्क पर पड़ता है। पहाड़ी इलाकों में सड़क के ऊपर मलबा आने के बाद कुछ ही मिनटों में रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है।
सिक्किम में भी कई स्थानों पर यही स्थिति बनी है। बोजोगहारी, लुइंग-रंका मार्ग, लिंगडिंग, हाई कोर्ट रोड, TNA गेट, VIP कॉलोनी और आसपास के कई इलाकों में बारिश और मलबे से यातायात प्रभावित हुआ है।
पांगथांग-लिंगडोक रोड और रंका क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें सड़कों से मलबा हटाने में जुटी हैं।
सड़क खुलने के बाद भी खतरा खत्म नहीं
भूस्खलन के बाद सड़क से मलबा हटाना पहला कदम होता है। लेकिन पहाड़ी ढलान की स्थिरता सुनिश्चित करना उससे भी जरूरी है।
अगर सड़क साफ करने के कुछ घंटे बाद फिर से मिट्टी या पत्थर गिरने लगें तो यातायात दोबारा रोकना पड़ सकता है। इसलिए लगातार बारिश के दौरान सड़क बहाली का काम चुनौतीपूर्ण रहता है।
प्रशासन को एक साथ दो चीजों पर नजर रखनी पड़ती है—सड़क को जल्द खोलना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
गंगटोक में भी नुकसान का सर्वे
बारिश से जुड़ी घटनाओं के बाद जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने व्यापक नुकसान का आकलन शुरू किया है। इसके लिए अलग-अलग विभागों के अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को प्रभावित इलाकों में भेजा गया है।
निरीक्षण टीम में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा सड़क और पुल विभाग के इंजीनियर, ब्लॉक विकास अधिकारी, राजस्व विभाग के कर्मचारी और स्थानीय प्रतिनिधि शामिल हैं।
इस तरह की संयुक्त टीम का उद्देश्य सिर्फ मकानों का नुकसान देखना नहीं होता। सड़क, नाली, सीवेज सिस्टम, बिजली व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक ढांचे की स्थिति भी जांची जाती है।
किन इलाकों में पहुंची टीम?
अधिकारियों ने कई संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण किया है। इनमें बोजोगहारी, लोअर बोजोगहारी, लिंगडिंग, लुइंग, रंका, फेनजोंग, सिचे, पामरो और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा अपर बुर्तुक, दरागांव, रकडोंग टिंटेक, अरिथांग और पांगथांग-लिंगडोक रोड जैसे इलाकों की स्थिति भी देखी गई।
इन जगहों पर अधिकारियों ने सड़क पर जमा मलबे, कीचड़ के बहाव, पानी की निकासी और मकानों की स्थिति का जायजा लिया।
सिचे में सार्वजनिक ढांचे को नुकसान
बारिश और भूस्खलन का असर केवल निजी मकानों तक सीमित नहीं है। सिचे इलाके में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी है।
किसी सीवेज या जल निकासी व्यवस्था के प्रभावित होने से स्थानीय लोगों के लिए अलग तरह की परेशानी पैदा हो सकती है। इसलिए आपदा प्रबंधन में ऐसी सुविधाओं की बहाली भी प्राथमिकता में रहती है।
बारिश के दौरान पानी की निकासी ठीक नहीं होने पर सड़क और रिहायशी इलाकों में जलभराव और मिट्टी के बहाव का खतरा और बढ़ सकता है।
संवेदनशील ढलानों पर तिरपाल का इस्तेमाल
जहां जमीन के खिसकने का खतरा ज्यादा है, वहां बारिश का पानी सीधे मिट्टी में जाने से रोकने के लिए तिरपाल जैसे अस्थायी उपाय किए जा रहे हैं।
यह स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन तेज बारिश के दौरान ऐसे कदम जमीन में अतिरिक्त पानी के प्रवेश को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं।
इसके साथ ही प्रशासन प्रभावित ढलानों पर लगातार नजर रख रहा है। अगर किसी जगह नई दरार दिखाई देती है या जमीन में हलचल बढ़ती है तो वहां रहने वाले लोगों को हटाने का फैसला लिया जा सकता है।
प्रशासन ने लोगों को क्या सलाह दी?
Sikkim Weather को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। खासकर भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में गैर-जरूरी यात्रा से बचने को कहा गया है।
रात में पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करना ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। अंधेरे में सड़क पर पड़े पत्थर, कीचड़ या अचानक टूटे हिस्से दिखाई देना मुश्किल होता है।
लोगों को सलाह दी गई है कि वे प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज न करें। अगर किसी इलाके को असुरक्षित घोषित किया जाता है तो वहां से सुरक्षित स्थान पर जाना जरूरी है।
भारी बारिश और लैंडस्लाइड का संबंध
लैंडस्लाइड अचानक दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे कई प्राकृतिक और स्थानीय कारण हो सकते हैं। लगातार बारिश उनमें से एक महत्वपूर्ण कारण है।
जब लंबे समय तक बारिश होती है तो मिट्टी में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। पहाड़ी ढलान पर मौजूद मिट्टी और चट्टानों के बीच पकड़ कमजोर हो सकती है। ऐसे में ढलान का कोई हिस्सा अचानक नीचे खिसक सकता है।
अगर किसी इलाके में पहले से सड़क निर्माण, कटाव या प्राकृतिक रूप से कमजोर भूभाग मौजूद हो तो बारिश के दौरान जोखिम और बढ़ सकता है।
सिक्किम जैसे पहाड़ी राज्य में इसलिए बारिश के साथ Landslide Risk पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या?
रिम्बी और आसपास रहने वाले लोगों के सामने इस समय सबसे बड़ी चिंता घरों की सुरक्षा है। जिन मकानों के पास मलबा पहुंचा है, वहां परिवारों को यह डर रहता है कि अगली बारिश में स्थिति और खराब हो सकती है।
दूसरी चिंता सड़क संपर्क की है। सड़क बंद होने से बाजार, अस्पताल, स्कूल और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
तीसरी चुनौती बिजली, पानी और सीवेज जैसी बुनियादी सेवाओं को सामान्य बनाए रखना है। किसी प्राकृतिक आपदा में इन सेवाओं में थोड़ी देर की बाधा भी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
राहत और बचाव के लिए क्या हो रहा है?
प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही हैं। सड़क एवं पुल विभाग को मलबा हटाने और कनेक्टिविटी बहाल करने का काम करना है, जबकि राजस्व और आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रभावित परिवारों और संपत्तियों का सर्वे कर रहे हैं।
जरूरत पड़ने पर लोगों को अस्थायी राहत केंद्रों में स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे उन परिवारों को सुरक्षित जगह मिलती है जिनके घर भूस्खलन की चपेट में आने के खतरे में हैं।
फिलहाल प्राथमिकता यह है कि लोगों को सुरक्षित रखा जाए और जरूरी रास्तों को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
क्या सिक्किम में खतरा अभी टला है?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। जिस इलाके में एक बार भूस्खलन हो चुका है, वहां लगातार बारिश के दौरान दोबारा मलबा गिरने की संभावना बनी रह सकती है।
इसलिए प्रशासन की निगरानी अगले कुछ घंटों और दिनों में भी महत्वपूर्ण रहेगी। खासकर पहाड़ी ढलानों, सड़क किनारे के कटाव वाले हिस्सों और उन जगहों पर ज्यादा सतर्कता जरूरी है जहां पहले से दरार या मिट्टी खिसकने के संकेत मिल चुके हैं।
फिलहाल राहत की सबसे बड़ी बात यही है कि रिम्बी की ताजा घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है। लेकिन 30 से ज्यादा घरों के प्रभावित होने और कई सड़कों पर यातायात बाधित होने से नुकसान की गंभीरता साफ नजर आती है।
सिक्किम में बारिश का दौर जारी रहने के बीच प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—लोगों को सुरक्षित रखना और प्रभावित इलाकों में सामान्य जनजीवन जल्द बहाल करना। स्थानीय लोगों के लिए भी जरूरी है कि वे मौसम की स्थिति पर नजर रखें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !


















