उत्तराखंड में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक बन रही 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन से 11 शहरों को सबसे अधिक लाभ होगा। यह लाइन पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन, पर्यटन और आर्थिक विकास को नई गति देगी।
Rishikesh-Karnaprayag Rail Line to Transform Connectivity in Uttarakhand: These 11 Cities to Benefit Most
उत्तराखंड को मिलने जा रहा है नया रेल कॉरिडोर
उत्तराखंड में यातायात की चुनौतियों को देखते हुए भारतीय रेलवे एक ऐतिहासिक रेल परियोजना पर काम कर रही है। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक 125 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन का निर्माण तेजी से हो रहा है, जिससे राज्य के दूरदराज़ पहाड़ी क्षेत्रों में संपर्क सुविधा मजबूत होगी। यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड की कनेक्टिविटी और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
80 फीसदी सफर टनल के भीतर, तकनीक का अद्भुत प्रयोग
इस रेल लाइन की सबसे खास बात यह है कि इसका 80 प्रतिशत हिस्सा, यानी करीब 104 किलोमीटर हिस्सा, सुरंगों (टनल्स) से होकर गुजरेगा। रेलवे ने इस तकनीकी चमत्कार को 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों के संचालन के लिए डिजाइन किया है, जिससे समय की बचत के साथ यात्रा भी अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगी।
इन 11 शहरों को मिलेगा सीधा लाभ
इस रेल परियोजना से उत्तराखंड के 11 प्रमुख शहरों को सीधा लाभ मिलेगा। इन शहरों में रेलवे स्टेशन बनेंगे या रेल लाइन इनके निकट से गुजरेगी। लाभान्वित शहर इस प्रकार हैं:
- ऋषिकेश
- शिवपुरी
- बाईसल
- देवप्रयाग
- जनासू
- मलेथा
- श्रीनगर
- धारीदेवी
- तिलनी
- घोलतिर
- गोचर
- कर्णप्रयाग
इन शहरों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पांच जिले होंगे रेल कनेक्टिविटी से लाभान्वित
यह रेल लाइन उत्तराखंड के पांच प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी:
- देहरादून
- टिहरी गढ़वाल
- पौड़ी गढ़वाल
- रुद्रप्रयाग
- चमोली
इन जिलों में अब सड़क यात्रा की तुलना में अधिक तेज और सुरक्षित आवागमन संभव होगा, जिससे विशेष रूप से छात्रों, यात्रियों और व्यापारियों को राहत मिलेगी।
12 नए रेलवे स्टेशन और 38 ब्रिज होंगे तैयार
इस परियोजना में 12 नए रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं और कुल 38 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें से 19 मेजर ब्रिज हैं। पहाड़ों में पुल और टनल बनाना एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है, लेकिन रेलवे इसे कुशलतापूर्वक अंजाम दे रहा है।
इस साल पूरी होगी टनल निर्माण की प्रक्रिया
भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में शामिल 104 किलोमीटर लंबी सुरंगों (टनल) के निर्माण को वर्ष 2024 के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक इस कार्य का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। उल्लेखनीय है कि इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना की शुरुआत 20 मार्च 2020 को की गई थी, और अब यह अपने अंतिम चरण में है। जैसे ही सुरंगों का निर्माण कार्य पूरा होगा, इस लाइन पर ट्रेनों का परीक्षण और संचालन शुरू करने की दिशा में तेज़ी से कदम उठाए जाएंगे।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया आयाम
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन न केवल यात्रियों की सुविधा को बढ़ाएगी, बल्कि उत्तराखंड में पर्यटन को भी नई दिशा देगी। खासतौर पर चारधाम यात्रा, ट्रैकिंग और अन्य पर्वतीय पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से कहीं आसान हो जाएगी। इसके अलावा, रेलवे स्टेशन के इर्द-गिर्द क्षेत्रों में व्यापार, होटलिंग और अन्य सेवाओं के लिए भी अवसर बढ़ेंगे।
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Author: AK
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