
अब भारत में 18 साल से कम आयु के बच्चे सोशल मीडिया पर अपने माता-पिता (पेरेंट्स) की अनुमति के बिना अकाउंट नहीं खोल सकेंगे। केंद्र सरकार का लिया गया यह फैसला सराहनीय कहा जा सकता है। आज के दौर में सोशल मीडिया हर उम्र के लोगों का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई सोशल मीडिया पर एक्टिव है। हालांकि, सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान दोनों ही हैं। करीब एक महीने पहले ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भी 16 साल से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर दिया था।
यह ऐतिहासिक फैसला लेने वाला ऑस्ट्रेलिया पूरी दुनिया में पहला देश बन गया । ऑस्ट्रेलियाई संसद में इससे संबंधित कानून पारित किया। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह फैसला सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल की वजह से युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को देखते हुए लिया । अब भारत सरकार ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर एक अहम कदम उठाया है। संसद ने लगभग 14 महीने पहले डिजिटल डाटा सुरक्षा विधेयक 2023 को मंजूरी दी थी। जिसके बाद मसौदा नियम जारी किए गए हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के तहत नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें यह भी कहा गया है कि डेटा कलेक्शन एंटिटी को भी ध्यान रखना होगा कि जो भी व्यक्ति खुद को बच्चे का मां या बाप बता रहा है, उसके पास कोई कानूनी आधार है या नहीं। सरकार ने लोगों के डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए नए नियमों का एक शुरुआती मसौदा जारी कर दिया है। डिजिटल व्यक्तिगत डाटा सुरक्षा नियमों के मसौदा के मुताबिक यह कानून सभी पर लागू होगा,चाहे वह सरकारी संस्था हो या प्राइवेट कंपनी। इसके अलावा, कुछ खास कंपनियों को और भी नियमों का पालन करना होगा, जैसे हर साल अपनी डेटा सुरक्षा प्रणाली की जांच करना। अगर कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। कंपनियों को आपको यह बताना होगा कि वे आपकी कौन सी जानकारी क्यों और कैसे इकट्ठा कर रहे हैं। ड्राफ्ट के मुताबिक बच्चों की उम्र की जानकारी और सत्यापन के लिए जरूरी तकनीकी अपग्रेड करना होगा ताकि बच्चों के डाटा का गलत इस्तेमाल नहीं हो। बच्चों के अकाउंट गलत जानकारी के साथ न बनें ये कंपनी को सुनिश्चित करना होगा। बच्चे के मामले में, डेटा संभालने वाली संस्था को भरोसेमंद पहचान के दस्तावेज या ऐसे दस्तावेज से जुड़े डिजिटल टोकन का इस्तेमाल करके यह पक्का करना होगा कि सहमति देने वाला व्यक्ति एडल्ट है और बच्चे का माता-पिता है। नए नियम बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सुरक्षित और नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी और सुरक्षा के साथ करें। माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा में सुधार होगा और यह उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने में मददगार साबित होगा। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने नोटिफिकेशन में कहा कि लोग इस ड्राफ्ट को लेकर आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं और सुझाव भी दे सकते हैं। लोगों की आपत्तियों और सुझावों पर 18 फरवरी से विचार किया जाएगा। बता दें कि रिसर्च फर्म ‘रेडसियर’ के मुताबिक, इंडियन यूजर्स हर दिन औसतन 7.3 घंटे अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। इसमें से ज्यादातर समय वे सोशल मीडिया पर बिताते हैं। अमेरिकी यूजर्स का औसतन स्क्रीन टाइम 7.1 घंटे और चीनी यूजर्स का 5.3 घंटे है। सितंबर 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, शहरों में रहने वाले 46% बच्चे सोशल मीडिया, ओटीटी और ऑनलाइन गेम्स का भी इस्तेमाल करते है। साथ ही इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, डिस्कॉर्ड, स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल भी दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है
यह भी पढ़े: अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर का निधन, शांति और लोकतंत्र के लिए मिला था नोबेल शांति पुरस्कार…
यह भी पढ़े: कल से बिहार में कई ट्रेनों का समय बदल जाएगा, देखिए कौन-कौन रेलगाड़ियों के टाइम में किया गया बदलाव
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !



















