
बिहार और गुजरात एक ऐसे प्रदेश हैं जहां पर शराबबंदी कानून लागू है। अब मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने भी शराबबंदी पर बड़ा फैसला किया है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में देवी अहिल्याबाई की 320 जयंती के उपलक्ष में आयोजित कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने 17 धार्मिक शहरों-नगर पंचायतों-ग्राम पंचायतों में शराब बंदी कर दी है।
यहां न केवल शराब की दुकानें बंद की जाएंगीं, बल्कि उन्हें शिफ्ट भी नहीं किया जाएगा। इन जगहों में मंडला- नगर पालिका, मुलताई नगर पालिका, मंदसौर नगर पालिका, अमरकंटक नगर पालिका, सलकनपुर ग्राम पंचायत, बरमानकलां, लिंगा, बरमानखुर्द ग्राम पंचायत, कुंडलपुर ग्राम पंचायत, बांदकपुर ग्राम पंचायत, उज्जैन नगर निगम, ओंकारेश्वर नगर पंचायत, महेश्वर नगर पंचायत, मण्डलेश्वर नगर पंचायत, ओरछा नगर पंचायत, मैहर नगर पालिका, चित्रकूट नगर पंचायत, दतिया नगर पालिका और पन्ना नगर पालिका शामिल हैं। सत्तापक्ष समेत विपक्षी दल लगातार इसकी मांग करते रहे हैं।
राज्य में 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भी शराबबंदी का मुद्दा गरमाया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को नरसिंहपुर जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेश के 17 धार्मिक नगरों में शराबबंदी का एलान किया था। इस घोषणा के बाद यह पूरी संभावना है कि कैबिनेट बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। शराबबंदी के फैसले से न केवल धार्मिक नगरी क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद की जा रही है, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी यह एक सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है।
लगभग एक दशक पहले बिहार में राज्य सरकार ने शराबबंदी करने का फैसला किया था। हालांकि, अभी भी बिहार शराब मुक्त राज्य नहीं बना है। यहां अवैध शराब की बिक्री के कई मामले सामने आते रहते हैं। कई मौकों पर जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत भी हुई है। बिहार की तुलना में गुजरात में बेहतर तरीके से शराबबंदी लागू की गई। यह राज्य देश के अग्रिणी राज्यों में से एक है।
यह भी पढ़े: TRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !



















