2013 में शुरू हुए ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे के बीच 2024 और उसके बाद के चुनावों में कांग्रेस ने जोरदार वापसी की है। जानिए कैसे बदला देश का राजनीतिक समीकरण।
Congress Revival: BJP Misses Majority Mark

साल 2013 में जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा दिया गया था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दशक बाद भारतीय राजनीति की तस्वीर इतनी बदल जाएगी। उस समय कांग्रेस लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों, नेतृत्व संकट और जनसमर्थन में गिरावट से जूझ रही थी। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी तेजी से उभर रही थी और देश में बदलाव की राजनीति का माहौल बन चुका था।
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों ने इस धारणा को और मजबूत किया कि कांग्रेस धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति से खत्म होती जा रही है। लेकिन राजनीति में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद कई राज्यों के विधानसभा चुनावों ने यह संकेत दे दिया कि कांग्रेस अब खत्म होने वाली पार्टी नहीं है। बल्कि उसने अपने संगठन, रणनीति और गठबंधन राजनीति के जरिए दोबारा जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का सपना अधूरा रह गया? क्या बीजेपी के सामने अब कांग्रेस फिर से सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो रही है? आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर पिछले 13 सालों में भारतीय राजनीति का गणित कैसे बदल गया।
कैसे शुरू हुआ था ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा?
साल 2013 भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जाता है। गोवा में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान नरेंद्र मोदी को पार्टी के चुनाव अभियान की कमान सौंपी गई। इसी दौर में ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा सामने आया।
उस समय कांग्रेस केंद्र की सत्ता में थी और कई राज्यों में उसकी सरकारें थीं। लेकिन यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार, महंगाई और नीति पक्षाघात जैसे आरोप लग रहे थे। 2G स्पेक्ट्रम, कोयला आवंटन और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे मुद्दों ने कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाया।
बीजेपी ने इसे जनता के सामने एक बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में पेश किया। पार्टी का दावा था कि कांग्रेस की राजनीति देश को पीछे ले जा रही है और अब देश को एक नए नेतृत्व की जरूरत है।
2014 में कांग्रेस की सबसे बड़ी हार
लोकसभा चुनाव 2014 कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक रूप से सबसे खराब चुनाव साबित हुआ। पार्टी केवल 44 सीटों पर सिमट गई। यह पहली बार था जब कांग्रेस विपक्ष के नेता का पद पाने लायक सीटें भी नहीं जीत सकी।
दूसरी तरफ बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। पूरे देश में ‘मोदी लहर’ देखने को मिली। कांग्रेस के कई दिग्गज नेता चुनाव हार गए।
उस समय राजनीतिक विश्लेषकों को लगा कि कांग्रेस अब राष्ट्रीय राजनीति में कमजोर होती जाएगी। कई राज्यों में भी पार्टी की सरकारें गिरने लगीं। कुछ ही वर्षों में कांग्रेस केवल गिने-चुने राज्यों तक सीमित हो गई।
2019 में बीजेपी और मजबूत हुई
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। पार्टी ने 303 सीटें जीत लीं जबकि कांग्रेस केवल 52 सीटों तक पहुंच सकी।
बालाकोट एयरस्ट्राइक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत नेतृत्व जैसे मुद्दों पर बीजेपी को बड़ा फायदा मिला। राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस बीजेपी को बड़ी चुनौती नहीं दे सकी।
इसी दौर में ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा और अधिक मजबूत दिखाई देने लगा। बीजेपी कई राज्यों में लगातार चुनाव जीत रही थी। कांग्रेस संगठनात्मक संकट और गुटबाजी से जूझ रही थी।
लेकिन इसी दौरान कांग्रेस ने धीरे-धीरे अपनी रणनीति बदलनी शुरू कर दी।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने बदला माहौल

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा मोड़ ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को माना जा रहा है। राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक हजारों किलोमीटर की पदयात्रा की।
जनता से सीधा संवाद
इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक तनाव और संविधान जैसे मुद्दों को लगातार उठाया। यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का काम किया।
राहुल गांधी की छवि में बदलाव
बीजेपी लंबे समय तक राहुल गांधी को गंभीर नेता नहीं मानने का नैरेटिव बनाती रही। लेकिन यात्रा के बाद उनकी छवि में बदलाव देखने को मिला। कई लोगों ने उन्हें जमीन से जुड़े नेता के रूप में देखना शुरू किया।

विपक्षी दलों को मिला नया मंच
भारत जोड़ो यात्रा ने विपक्षी दलों को भी एक साझा मंच देने का काम किया। कई क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस के साथ संवाद बढ़ाया।
2024 चुनाव में कैसे बदला राजनीतिक समीकरण?
2024 के लोकसभा चुनावों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव किया। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी, लेकिन अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकी।
बीजेपी पहली बार बहुमत से दूर
2014 और 2019 के बाद पहली बार बीजेपी 272 के आंकड़े से नीचे रह गई। पार्टी को सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों पर निर्भर होना पड़ा।
कांग्रेस की सीटों में बड़ा इजाफा
कांग्रेस ने अपनी सीटें लगभग दोगुनी करते हुए 99 तक पहुंचा दीं। कई राज्यों में पार्टी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया।
गठबंधन राजनीति की वापसी
2024 के चुनावों ने यह भी दिखाया कि भारतीय राजनीति में गठबंधन अब भी महत्वपूर्ण हैं। अकेले चुनाव जीतना अब पहले जितना आसान नहीं रहा।
केरल में कांग्रेस की ऐतिहासिक वापसी
हाल के केरल विधानसभा चुनावों ने कांग्रेस को और मजबूत किया है।
UDF की शानदार जीत
केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF ने 140 में से 102 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह कई दशकों में कांग्रेस की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जा रही है।
वामपंथी किले ढहे
केरल लंबे समय तक वामपंथ का मजबूत गढ़ माना जाता रहा। लेकिन इस चुनाव में वामपंथी गठबंधन केवल 35 सीटों तक सिमट गया।
वीडी सतीशन का उभार
वीडी सतीशन को इस जीत का मुख्य चेहरा माना जा रहा है। उन्होंने विपक्ष के नेता के रूप में मजबूत भूमिका निभाई और कांग्रेस को संगठित किया।
दक्षिण भारत में कांग्रेस क्यों मजबूत हो रही है?
कांग्रेस की वापसी का सबसे बड़ा आधार दक्षिण भारत बनता दिखाई दे रहा है।
कर्नाटक मॉडल
कर्नाटक में कांग्रेस ने सामाजिक योजनाओं और महंगाई जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा। इसका फायदा पार्टी को मिला।
तेलंगाना में जीत
तेलंगाना में भी कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए सत्ता हासिल की। इससे पार्टी का मनोबल बढ़ा।
तमिलनाडु में नई रणनीति
तमिलनाडु में कांग्रेस ने नई राजनीतिक साझेदारियों पर जोर देना शुरू किया। इससे पार्टी को क्षेत्रीय राजनीति में नई जगह मिली।
क्या बीजेपी के सामने नई चुनौती खड़ी हो रही है?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस अब पहले जैसी कमजोर स्थिति में नहीं है।
विपक्ष का केंद्र बन रही कांग्रेस
देश के कई विपक्षी दल अब कांग्रेस को बीजेपी के खिलाफ सबसे बड़े राष्ट्रीय विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
सामाजिक मुद्दों पर फोकस
कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को लगातार उठा रही है।
गठबंधन बनाने की क्षमता
कांग्रेस अब क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?
हालांकि कांग्रेस की वापसी हुई है, लेकिन उसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।
संगठनात्मक कमजोरी
कई राज्यों में पार्टी का संगठन अभी भी कमजोर है।
नेतृत्व का सवाल
हालांकि राहुल गांधी की सक्रियता बढ़ी है, लेकिन पार्टी को राज्यों में मजबूत स्थानीय नेतृत्व की जरूरत है।
बीजेपी की मजबूत मशीनरी
बीजेपी अभी भी देश की सबसे मजबूत चुनावी मशीनरी वाली पार्टी मानी जाती है। उसके पास मजबूत संगठन और संसाधन हैं।
क्या ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ अब असंभव है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और विविधतापूर्ण देश में किसी एक राष्ट्रीय पार्टी का पूरी तरह खत्म हो जाना आसान नहीं है।
कांग्रेस भले ही कई चुनाव हारी हो, लेकिन उसका ऐतिहासिक आधार, देशव्यापी उपस्थिति और संगठनात्मक ढांचा अब भी मजबूत है। यही कारण है कि कठिन दौर के बावजूद पार्टी दोबारा खड़ी होती दिखाई दे रही है।
जनता का मूड कैसे बदल रहा है?
देश में अब केवल एक मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़े जा रहे। मतदाता रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय मुद्दों पर भी वोट कर रहे हैं।
यही वजह है कि कई राज्यों में क्षेत्रीय और विपक्षी दलों को दोबारा मौका मिल रहा है।
निष्कर्ष
‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा भारतीय राजनीति का एक बड़ा राजनीतिक अभियान जरूर था, लेकिन 13 साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने कठिन दौर के बाद खुद को दोबारा खड़ा करना शुरू कर दिया है।
2024 के लोकसभा चुनाव, केरल जैसे राज्यों में बड़ी जीत और राहुल गांधी की सक्रिय राजनीति ने यह संकेत दिया है कि कांग्रेस अभी भारतीय राजनीति से बाहर नहीं हुई है। दूसरी तरफ बीजेपी अब पहले की तरह अकेले बहुमत की स्थिति में नहीं दिख रही।
आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति और अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती है। कांग्रेस की वापसी कितनी मजबूत होगी, यह आने वाले विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव तय करेंगे। लेकिन इतना जरूर साफ हो गया है कि भारतीय राजनीति में कांग्रेस अब भी एक बड़ी ताकत बनी हुई है।
Author: AK
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