बिहार में उमस भरी गर्मी से जल्द मिलेगी राहत। 28 अगस्त से झमाझम बारिश शुरू होगी। 10 जिलों में बाढ़ से 17 लाख लोग प्रभावित।
Bihar Weather Today: Relief from humidity, heavy rain from August 28
बिहार में मौसम का बदलता मिजाज
पिछले कुछ दिनों से बिहार में मानसून की गतिविधियाँ कमजोर पड़ गई थीं। बारिश रुकने से उमस और गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। खेतों से लेकर गलियों तक हर जगह लोग राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 28 अगस्त से बिहार में झमाझम बारिश का नया दौर शुरू होने वाला है। इससे न केवल उमस भरी गर्मी से छुटकारा मिलेगा बल्कि सूखे जैसी स्थिति से भी राहत मिलेगी।
आज का मौसम: 13 जिलों में यलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार को बिहार के 13 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इनमें सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका, जमुई और उत्तर बिहार के कुछ हिस्से शामिल हैं।
इन इलाकों में अगले 24 घंटे तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर पटना, गया और बक्सर जैसे जिलों में मौसम शुष्क रहेगा। यहां दिन का तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 26-27 डिग्री तक पहुंच सकता है।
कब और कहाँ मिलेगी राहत?
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, 27 अगस्त तक राज्य में भारी बारिश की संभावना नहीं है। लेकिन 28 अगस्त से बंगाल की खाड़ी में बनने वाला लो-प्रेशर एरिया बिहार के मौसम का रुख पूरी तरह बदल देगा।
इस सिस्टम के सक्रिय होने पर 28 और 29 अगस्त को पूरे राज्य में झमाझम बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह बारिश सितंबर के पहले हफ्ते तक जारी रह सकती है।
राजधानी पटना का हाल
राजधानी पटना में इन दिनों गर्मी और उमस ने लोगों को बेहाल कर रखा है। दिन का तापमान 35 डिग्री तक और रात का 26–27 डिग्री तक दर्ज किया जा रहा है। हालांकि मौसम विभाग ने 28 अगस्त से पटना और उसके आसपास के जिलों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है। इससे उमस से बड़ी राहत मिलेगी और मौसम सुहावना हो जाएगा।
बाढ़ का कहर: 17 लाख लोग प्रभावित
बारिश से राहत की खबर के बीच बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अब तक 10 जिलों में करीब 17 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं।
- सबसे ज्यादा प्रभावित भागलपुर जिला रहा है, जहाँ लाखों लोग अपने गाँव छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
- बेगूसराय, भोजपुर, मुंगेर और वैशाली जैसे जिलों के निचले इलाकों में पानी भर गया है।
- गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। नावों के सहारे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है। लेकिन जलभराव और कटाव की वजह से चुनौतियाँ और भी गंभीर हो गई हैं।
बाढ़ से जूझते लोग: जनजीवन अस्त-व्यस्त
बाढ़ से प्रभावित जिलों में जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। कई गाँव टापू में तब्दील हो गए हैं।
- स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं।
- किसानों की खड़ी फसलें पानी में डूब चुकी हैं।
- बिजली और इंटरनेट सेवाएँ कई जगह ठप हो गई हैं।
- पीने के पानी और दवाइयों की भारी किल्लत है।
प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें राहत सामग्री जैसे चावल, दाल, नमक और दवाइयाँ बाँट रही हैं, लेकिन प्रभावितों की संख्या इतनी अधिक है कि हर किसी तक मदद पहुँचना चुनौती बना हुआ है।
मानसून का अब तक का हाल
इस बार मानसून का रुख बिहार में असमान रहा। उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार में ज्यादा बारिश हुई।
- गया में सामान्य से 25% अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।
- पटना में लगभग 9% अधिक बारिश दर्ज हुई।
- लेकिन पूरे राज्य का औसत देखें तो अब तक 27% कम बारिश हुई है।
जहाँ अगस्त के अंत तक सामान्य तौर पर 741 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, वहीं अब तक केवल 544 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यानी इस बार बारिश न केवल असमान रही बल्कि कुल मात्रा भी कम रही है।
किसानों की चिंता
बारिश के असमान वितरण ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर बिहार में धान और मक्का की फसल पानी की कमी से प्रभावित हुई है, जबकि दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ से खेत जलमग्न हो गए हैं।
मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक 28 अगस्त से होने वाली बारिश किसानों के लिए उम्मीद की किरण है। इससे धान की रोपाई वाले इलाकों में नमी बढ़ेगी और मक्का व सब्जी की फसलों को भी सहारा मिलेगा।
प्रशासन की तैयारी
मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है।
- राहत शिविरों में साफ पानी, भोजन और दवाइयों की व्यवस्था की जा रही है।
- बाढ़ से कटे गाँवों तक नावों और मोटरबोट के जरिए पहुँचने की कोशिश हो रही है।
- स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में मेडिकल टीमें भेज दी हैं ताकि जलजनित बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
निष्कर्ष
बिहार में इस समय दोहरी चुनौती है—एक ओर उमस भरी गर्मी और बारिश की कमी, तो दूसरी ओर बाढ़ से प्रभावित लाखों लोग। 28 अगस्त से शुरू होने वाली झमाझम बारिश से उमस से राहत तो जरूर मिलेगी, लेकिन बाढ़ की स्थिति और बिगड़ने का खतरा भी रहेगा।
आने वाले हफ्ते बिहार के लोगों के लिए बेहद अहम हैं। मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासन की अपील को ध्यान में रखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
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Author: AK
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