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15,000 Indians Face Job: अमेरिका में 15 हजार भारतीयों की नौकरी पर संकट

अमेरिका में 15 हजार से ज्यादा भारतीय टेक कर्मचारियों पर नौकरी और वीजा का संकट गहरा गया है। H-1B नियमों और नई नीतियों से बढ़ी चिंता। 15,000 Indians Face Job Crisis in US अमेरिका में भारतीय टेक कर्मचारियों के सामने बड़ा संकट अमेरिका लंबे समय से भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए सबसे पसंदीदा देशों में रहा … Read more

15,000 Indians Face Job Crisis in US

अमेरिका में 15 हजार से ज्यादा भारतीय टेक कर्मचारियों पर नौकरी और वीजा का संकट गहरा गया है। H-1B नियमों और नई नीतियों से बढ़ी चिंता।

15,000 Indians Face Job Crisis in US



अमेरिका में भारतीय टेक कर्मचारियों के सामने बड़ा संकट

अमेरिका लंबे समय से भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए सबसे पसंदीदा देशों में रहा है। खासकर आईटी और टेक सेक्टर में हजारों भारतीय हर साल बेहतर नौकरी, ज्यादा वेतन और करियर ग्रोथ की उम्मीद लेकर वहां जाते हैं। लेकिन इस समय अमेरिका में काम कर रहे बड़ी संख्या में भारतीयों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

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हालिया छंटनी के बाद करीब 15 हजार भारतीय टेक कर्मचारियों पर नौकरी जाने का असर सीधे उनके वीजा स्टेटस पर पड़ रहा है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जो H-1B visa पर अमेरिका पहुंचे थे। नौकरी छूटने के बाद अब उनके पास सीमित समय है। अगर तय अवधि के भीतर नई नौकरी नहीं मिली, तो अमेरिका छोड़ने की नौबत आ सकती है।

यह सिर्फ रोजगार का मामला नहीं है। इसके साथ परिवार, बच्चों की पढ़ाई, घर की ईएमआई, भविष्य की योजनाएं और वर्षों की मेहनत भी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि अमेरिका में भारतीय समुदाय के भीतर चिंता तेजी से बढ़ रही है।


H-1B वीजा पर क्यों बढ़ा दबाव?

नौकरी गई तो सिर्फ 60 दिन का समय

H-1B वीजा अमेरिका में विदेशी विशेषज्ञों को काम करने की अनुमति देता है। भारत से सबसे ज्यादा प्रोफेशनल इसी वीजा पर अमेरिका जाते हैं।

लेकिन इसके साथ एक बड़ी शर्त जुड़ी होती है। अगर नौकरी चली जाती है, तो कर्मचारी के पास नई नौकरी ढूंढने के लिए सिर्फ 60 दिन का समय होता है। इसी अवधि में नया नियोक्ता मिलना जरूरी है, जो वीजा स्पॉन्सर करने को तैयार हो।

अगर ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।

पहले टेक सेक्टर में भर्ती तेज होती थी। नौकरी बदलना आसान माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। कंपनियां भर्ती करने में ज्यादा समय ले रही हैं और कई जगह वीजा स्पॉन्सरशिप से बच रही हैं।

यही वजह है कि Indian tech layoffs US अब सिर्फ कॉर्पोरेट खबर नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की वास्तविक चिंता बन चुकी है।


बड़ी कंपनियों की छंटनी का भारतीयों पर सीधा असर

पिछले कुछ समय में अमेरिका की कई बड़ी टेक कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या घटाई है।

इनमें प्रमुख नाम हैं—

रिस्ट्रक्चरिंग, खर्च नियंत्रण और बदलती टेक रणनीतियों के चलते हजारों नौकरियां प्रभावित हुईं। कुल मिलाकर करीब 50 हजार कर्मचारियों पर असर पड़ा और उनमें बड़ी संख्या भारतीयों की बताई जा रही है।

भारतीय इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट, क्लाउड विशेषज्ञ और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स सबसे ज्यादा प्रभावित वर्गों में हैं।

कई लोगों के लिए मुश्किल यह भी है कि वे पहले से अमेरिका में बस चुके हैं। बच्चों का स्कूल वहीं है, घर किराए या लोन पर है और पूरा परिवार उसी आय पर निर्भर है।


नई नौकरी मिलना अब पहले जितना आसान नहीं

लंबी भर्ती प्रक्रिया बढ़ा रही परेशानी

छंटनी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—अब आगे क्या?

कई भारतीय प्रोफेशनल्स का कहना है कि आवेदन भेजने के बाद जवाब आने में ही कई हफ्ते लग जाते हैं। इंटरव्यू के कई चरण होते हैं। ऑफर आने में महीनों निकल जाते हैं।

जबकि H-1B नियम में सिर्फ 60 दिन मिलते हैं।

कई कंपनियां अब यह भी देख रही हैं—

  • क्या उम्मीदवार उसी टेक सेक्टर में है?
  • क्या नौकरी का स्तर पहले जैसा है?
  • क्या सैलरी रेंज मेल कर रही है?
  • क्या कंपनी वीजा स्पॉन्सर करेगी?

यानी नौकरी सिर्फ मिलना काफी नहीं है, सही प्रोफाइल और सही स्पॉन्सर भी जरूरी है।


ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन नीति से चिंता क्यों बढ़ी?

दस्तावेजों की जांच ज्यादा सख्त

भारतीय समुदाय के बीच सबसे ज्यादा चर्चा Trump immigration policy को लेकर है।

नई सख्ती के कारण कंपनियों को ज्यादा कागजी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है।

कई मामलों में नियोक्ता को यह भी साबित करना पड़ता है कि उसी पद के लिए अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं था।

छोटी गलती भी परेशानी बन सकती है—

  • दस्तावेज अधूरे होना
  • पुराने रिकॉर्ड में गलती
  • वीजा स्टेटस अपडेट में देरी
  • स्पॉन्सर कंपनी की प्रक्रिया लंबी होना

ऐसी स्थिति में कर्मचारियों की घबराहट बढ़ना स्वाभाविक है।


ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में भी नई चुनौती

देश लौटकर आवेदन की चिंता

अमेरिका में लंबे समय से काम कर रहे भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड सबसे बड़ी उम्मीद होती है।

लेकिन अगर प्रक्रिया और सख्त होती है और आवेदन के लिए भारत लौटकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, तो मुश्किल और बढ़ सकती है।

इसका असर कई स्तर पर होगा—

  • इंटरव्यू के लिए इंतजार
  • दस्तावेज जांच
  • काउंसलेट अपॉइंटमेंट
  • प्रोसेसिंग में देरी
  • नौकरी पर वापस लौटने में अनिश्चितता

जो लोग पहले से वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यह चिंता और बढ़ा सकती है।


भारतीयों का सबसे बड़ा बैकलॉग

ग्रीन कार्ड बैकलॉग में भारतीय सबसे आगे बताए जाते हैं।

क्यों बढ़ रही वेटिंग?

मुख्य वजहें—

  • नौकरी आधारित आवेदन की संख्या ज्यादा
  • हर साल सीमित कोटा
  • लंबी सरकारी प्रक्रिया
  • देशवार सीमा
  • दस्तावेज जांच में देरी

कई भारतीय परिवार पहले से 10 से 15 साल तक इंतजार कर रहे हैं।

इस दौरान नौकरी बदलना, प्रमोशन लेना और परिवार की योजना बनाना भी मुश्किल हो जाता है।

यानी Green Card backlog Indians अब सिर्फ इमिग्रेशन प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन की लंबी योजना का हिस्सा बन चुका है।


150 आवेदन भेजने के बाद भी जवाब का इंतजार

अमेरिका में रहने वाले कई भारतीय इंजीनियर लगातार आवेदन कर रहे हैं।

एक इंजीनियर ने 150 से ज्यादा जगह आवेदन करने की बात कही, लेकिन चुनौती रिजेक्शन नहीं बल्कि धीमी प्रक्रिया है।

आज टेक कंपनियों में भर्ती पहले जैसी तेज नहीं रही।

एक सामान्य प्रक्रिया में शामिल हो सकता है—

  • रिज्यूमे स्क्रीनिंग
  • तकनीकी इंटरव्यू
  • टीम इंटरव्यू
  • मैनेजर राउंड
  • एचआर प्रक्रिया
  • वीजा समीक्षा

यह सब मिलाकर कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं।

और यही समय H-1B पर काम कर रहे लोगों के लिए सबसे बड़ा दबाव बन जाता है।


परिवारों पर मानसिक और आर्थिक असर

सिर्फ नौकरी नहीं, पूरा जीवन प्रभावित

अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवारों की चिंता कई स्तर पर है।

सबसे बड़ी परेशानियां—

  • बच्चों की पढ़ाई रुकने का डर
  • घर का किराया या मॉर्गेज
  • जीवनसाथी का वीजा
  • हेल्थ इंश्योरेंस
  • बचत पर दबाव
  • अचानक भारत लौटने की तैयारी

कई परिवार बैकअप प्लान बना रहे हैं।

कुछ लोग भारत लौटने की संभावना पर सोच रहे हैं।

कुछ दूसरे देशों के विकल्प देख रहे हैं।

और कई लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द नई नौकरी मिल जाएगी।

बाहर से सब सामान्य दिख सकता है, लेकिन अंदर दबाव काफी ज्यादा है।


भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल वापस लौटते हैं, तो भारत के टेक सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है।

संभावित असर—

  • अनुभवी प्रतिभा की वापसी
  • भारतीय स्टार्टअप्स को फायदा
  • टेक भर्ती में प्रतिस्पर्धा बढ़ना
  • बड़े शहरों में रोजगार विकल्प बढ़ना
  • वेतन संरचना पर असर

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की टेक इंडस्ट्री इस प्रतिभा का फायदा उठा सकती है।

हालांकि अमेरिका में नौकरी और वीजा को लेकर अनिश्चितता बनी रही तो परिवारों के लिए फैसले आसान नहीं होंगे।


आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले महीनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी।

यह कई बातों पर निर्भर करेगा—

  • अमेरिकी टेक सेक्टर की भर्ती
  • H-1B visa news में बदलाव
  • इमिग्रेशन नियम
  • ग्रीन कार्ड प्रोसेस
  • वैश्विक आर्थिक माहौल
  • कंपनियों की नई हायरिंग रणनीति

अगर भर्ती दोबारा तेज होती है तो राहत मिल सकती है।

लेकिन अगर छंटनी जारी रही और नियम और कड़े हुए, तो हजारों भारतीयों के लिए चुनौती बनी रह सकती है।


निष्कर्ष

अमेरिका में करीब 15 हजार भारतीय टेक कर्मचारियों के सामने इस समय नौकरी और वीजा दोनों का दबाव है। नौकरी जाने के बाद सीमित समय में नया अवसर ढूंढना आसान नहीं है। ऊपर से वीजा नियम, लंबी भर्ती प्रक्रिया और ग्रीन कार्ड बैकलॉग ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है।

यह सिर्फ करियर की खबर नहीं है। इसके पीछे हजारों परिवारों की चिंता, बच्चों का भविष्य और कई सालों की मेहनत जुड़ी है।

अभी सबसे ज्यादा जरूरत स्पष्ट नियम, तेज प्रक्रिया और भरोसे की है, ताकि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल अपने भविष्य को लेकर बेहतर फैसला ले सकें।

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AK
Author: AK

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