दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया। रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD मैदान नए विकल्प बने। CJP ने फैसले पर सवाल उठाए।
Jantar Mantar Protest Ban: CJP Slams Delhi Police
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया, CJP ने क्या कहा?

दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों, धरनों और जन आंदोलनों की प्रमुख जगह रहा है। यहां अलग-अलग मुद्दों पर नागरिक, सामाजिक संगठन, छात्र समूह और राजनीतिक दल अपनी मांगें उठाते रहे हैं। लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। इस फैसले के बाद यह सवाल उठने लगा है कि राजधानी में लोग अपनी मांगों और असहमति को सार्वजनिक रूप से किस तरह सामने रख पाएंगे।
दिल्ली पुलिस के आदेश के मुताबिक, अब प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं—रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD मैदान। पुलिस का कहना है कि यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया है। नए स्थलों पर प्रदर्शन के लिए अलग मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP जारी की जाएगी।
इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके और सौरव दास ने सवाल उठाए हैं। दीपके ने सोशल मीडिया मंच X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। उन्होंने इस फैसले को विरोध करने के अधिकार और लोकतांत्रिक आजादी से जोड़कर देखा। वहीं, सौरव दास ने पूछा कि क्या फैसला लेने से पहले नागरिकों और संबंधित संगठनों से सलाह ली गई थी।
दिल्ली पुलिस ने क्या फैसला लिया?
दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के जरिए जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया। इस बदलाव के साथ तीन दूसरे स्थानों को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय किया गया है। यह आदेश पहले से लागू व्यवस्था में संशोधन करता है।
पुलिस के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों की जांच करने के उद्देश्य से एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को निर्धारित स्थल की सूची से हटाने और नए स्थानों को शामिल करने का फैसला लिया गया।
अब कहां हो सकेंगे प्रदर्शन?
दिल्ली पुलिस ने जिन तीन स्थानों को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में नामित किया है, वे हैं:
- रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली में स्थित यह मैदान पहले भी बड़े सार्वजनिक और राजनीतिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल होता रहा है।
- बुराड़ी मैदान: उत्तर दिल्ली में स्थित यह मैदान नए निर्धारित स्थलों में शामिल है।
- CBD मैदान: पूर्वी दिल्ली में स्थित इस मैदान को भी प्रदर्शन के लिए चुना गया है।
पुलिस ने कहा है कि इन स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के नियमों और प्रक्रिया को लेकर विस्तृत SOP अलग से जारी की जाएगी। इसलिए आयोजकों को नए निर्देशों और अनुमति संबंधी शर्तों का ध्यान रखना होगा।
जंतर-मंतर को सूची से हटाने का अर्थ यह है कि वह अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल का दर्जा नहीं रखता। हालांकि, प्रदर्शन की अनुमति, लागू नियमों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी पूरी स्थिति को समझने के लिए पुलिस के आदेश और आगे जारी होने वाले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।
‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’, अभिजीत दीपके का बयान
दिल्ली पुलिस के फैसले पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन की तय जगह से हटा दिया गया है और अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।
दीपके ने अपने बयान में सरकार पर असहमति की आवाजों को सीमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या केवल प्रदर्शन के लिए किसी खास स्थान की नहीं, बल्कि लोगों के विरोध करने के विचार से है।
एक अन्य पोस्ट में दीपके ने इस फैसले को लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया। उनके अनुसार, विरोध-प्रदर्शन के लिए लंबे समय से इस्तेमाल की जा रही जगह को सूची से हटाना नागरिकों की आवाज उठाने की क्षमता पर असर डाल सकता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि दीपके की टिप्पणियां राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। दिल्ली पुलिस ने अपने आदेश में फैसले को गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों से जोड़ा है। दोनों पक्षों के तर्क इस मुद्दे पर चल रही बहस को सामने लाते हैं—एक तरफ प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा की जरूरतें हैं, तो दूसरी तरफ नागरिकों के लिए विरोध दर्ज कराने की सुलभ जगह का सवाल है।
सौरव दास ने सरकार और पुलिस से पूछे सवाल
CJP नेता सौरव दास ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पूछा कि नरेंद्र मोदी सरकार को जंतर-मंतर से क्यों डर लगता है और क्या गृह मंत्रालय ने यह निर्णय लेने से पहले नागरिकों, संगठनों या दूसरे संबंधित पक्षों से परामर्श किया था।
दास ने फैसले को मनमाना बताते हुए कहा कि इससे विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर चिंता पैदा होती है। उन्होंने भी जंतर-मंतर को सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के व्यापक सवाल से जोड़ा।
हालांकि, उपलब्ध आदेश के अनुसार, पुलिस ने अपने निर्णय का आधार समिति की सिफारिशों को बताया है। यह स्पष्ट करने के लिए कि परामर्श की प्रक्रिया में किन पक्षों को शामिल किया गया था और समिति ने किन आधारों पर स्थानों का चयन किया, संबंधित अधिकारियों की विस्तृत जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
आशुतोष रांका ने भी कसा तंज
CJP से जुड़े आशुतोष रांका ने नई व्यवस्था पर तंज करते हुए सवाल किया कि विरोध-प्रदर्शन के लिए माउंट एवरेस्ट को ही निर्धारित स्थल क्यों नहीं घोषित कर दिया जाता।
उनकी टिप्पणी का आशय इस बात पर सवाल उठाना था कि प्रदर्शन स्थलों का चयन किस आधार पर किया जा रहा है और क्या चुने गए स्थान आम लोगों के लिए पर्याप्त रूप से सुलभ होंगे।
जंतर-मंतर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
जंतर-मंतर दिल्ली के उन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों में शामिल रहा है, जहां नागरिक और संगठन अपनी मांगों को सामने रखने के लिए जुटते रहे हैं। यहां सामाजिक, राजनीतिक, श्रमिक और नागरिक मुद्दों से जुड़े प्रदर्शन हुए हैं। राजधानी में स्थित होने के कारण यह जगह मीडिया और राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में भी पहचानी जाती रही है।
किसी प्रदर्शन स्थल का महत्व केवल वहां उपलब्ध जगह से तय नहीं होता। उसकी पहुंच, सार्वजनिक परिवहन से जुड़ाव, संबंधित संस्थानों से दूरी, सुरक्षा व्यवस्था और मीडिया तक संदेश पहुंचाने की सुविधा भी मायने रखती है।
जंतर-मंतर को सूची से हटाने के बाद यह बहस इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है कि नए स्थान प्रदर्शनकारियों के लिए कितने सुविधाजनक होंगे। यदि किसी संगठन को प्रदर्शन करने के लिए दूर जाना पड़े, तो इससे उसके यात्रा खर्च, प्रतिभागियों की भागीदारी और आयोजन की व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन, यातायात, सुरक्षा और आसपास की गतिविधियों को व्यवस्थित करना जरूरी होता है।
इन दोनों जरूरतों के बीच संतुलन बनाना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
क्या विरोध-प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है?
भारत में नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) में शांतिपूर्वक तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार दिया गया है।
हालांकि, ये अधिकार पूर्णतः असीमित नहीं हैं। संविधान के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य वैध आधारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसी कारण प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अनुमति, स्थान, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियम लागू हो सकते हैं।
लेकिन किसी स्थान को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला व्यापक सवाल भी उठाता है। क्या वैकल्पिक जगहों तक पहुंच आसान है? क्या अनुमति की प्रक्रिया स्पष्ट होगी? क्या अलग-अलग संगठनों को समान नियमों के तहत प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा? इन सवालों के जवाब नए आदेश और उसकी व्यावहारिक प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी के आधार पर सामने आएंगे।
इस मामले में केवल राजनीतिक बयान के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि फैसला अपने आप में संवैधानिक है या असंवैधानिक। इसके लिए आदेश की शर्तों, लागू कानूनों और जरूरत पड़ने पर न्यायिक समीक्षा को देखना होगा।
नए प्रदर्शन स्थलों को लेकर क्या सवाल हैं?
जंतर-मंतर की जगह तीन वैकल्पिक स्थलों को तय करने के बाद प्रशासन और प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों के सामने कई व्यावहारिक प्रश्न हैं।
अनुमति की प्रक्रिया कैसी होगी?
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि नए स्थलों के लिए अलग SOP जारी की जाएगी। इसमें आवेदन की प्रक्रिया, सुरक्षा संबंधी शर्तें, आयोजन की समय-सीमा और अन्य नियम स्पष्ट किए जा सकते हैं। आयोजकों के लिए यह जरूरी होगा कि वे नई प्रक्रिया को समझें और समय पर अनुमति के लिए आवेदन करें।
क्या नए स्थान लोगों के लिए सुलभ होंगे?
रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं। इन स्थानों तक पहुंचने में लगने वाला समय और खर्च अलग-अलग हो सकता है। किसी भी प्रदर्शन स्थल की उपयोगिता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वहां सार्वजनिक परिवहन, बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था कैसी है।
क्या यातायात और स्थानीय कारोबार पर असर पड़ेगा?
प्रदर्शन के दौरान यातायात, आसपास के बाजारों और सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ सकता है। इस कारण प्रशासन को स्थानीय निवासियों, कारोबारियों और प्रदर्शनकारियों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा। नए स्थलों के चयन और उपयोग के नियमों में इन पहलुओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से जारी होने वाली विस्तृत SOP पर नजर रहेगी। इससे पता चलेगा कि नए निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति कैसे मिलेगी और आयोजकों को किन नियमों का पालन करना होगा।
CJP नेताओं की आलोचना से साफ है कि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और नागरिक अधिकारों से जुड़ी बहस शुरू हो गई है। वहीं पुलिस ने अपने आदेश में प्रशासनिक समिति की सिफारिशों को आधार बताया है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए स्थानों पर प्रदर्शन की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट, पारदर्शी और व्यावहारिक रहती है।
निष्कर्ष
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का दिल्ली पुलिस का फैसला राजधानी में विरोध-प्रदर्शन की व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान को नए स्थानों के रूप में चुना गया है, जबकि CJP नेता अभिजीत दीपके और सौरव दास ने इस कदम की आलोचना की है।
इस पूरे मामले का केंद्रीय सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अवसर देने के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाएगा। नए नियमों की स्पष्टता, वैकल्पिक स्थलों तक पहुंच और अनुमति की निष्पक्ष प्रक्रिया यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि यह बदलाव व्यवहार में किस तरह काम करता है।
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Author: AK
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