बिहार के गया जिले में कमर्शियल एलपीजी गैस की किल्लत अब स्थानीय व्यापार और प्रसिद्ध मिठाइयों पर भारी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि गया के मशहूर रसगुल्लों का उत्पादन प्रभावित हो गया है, जिससे दुकानदारों और कर्मचारियों दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
Gaya जिले में कमर्शियल एलपीजी गैस की कमी का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है। पंचानपुर इलाके में स्थित मशहूर “पंडित जी” मिठाई दुकान, जो अपने बड़े आकार के रसगुल्लों के लिए जानी जाती है, इन दिनों उत्पादन संकट से जूझ रही है।
दुकान संचालक ओम प्रकाश के अनुसार, पहले कमर्शियल गैस के जरिए बड़ी मात्रा में रसगुल्ले तैयार किए जाते थे, लेकिन अब सिलेंडर की कमी के कारण उन्हें पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई है और ग्राहकों को पर्याप्त मिठाई नहीं मिल पा रही है।
गया के ये खास रसगुल्ले, जिनका वजन 50 ग्राम से लेकर 1 किलो तक होता है, दूर-दूर तक मशहूर हैं। लेकिन गैस संकट के चलते अब इनके स्वाद और गुणवत्ता पर भी असर पड़ने लगा है, जिससे ग्राहकों में निराशा देखी जा रही है।
वहीं, कर्मचारियों की परेशानी भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि मिट्टी के चूल्हे पर काम करना बेहद कठिन है, जिसमें अधिक मेहनत और गर्मी सहनी पड़ती है। इसी कारण कई कर्मचारी काम छोड़ चुके हैं, जबकि कुछ को काम कम होने के बावजूद वेतन देना पड़ रहा है, जिससे दुकानदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
गैस की किल्लत का असर सिर्फ मिठाई दुकानों तक सीमित नहीं है। आसपास के छोटे कारोबार, जैसे चाट-पकौड़ी की दुकानें भी प्रभावित हो रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि रोजाना गैस की खपत के बावजूद अब सिलेंडर नहीं मिल रहा, जिससे उनका काम ठप हो गया है।
कुल मिलाकर, कमर्शियल एलपीजी गैस की कमी और बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंच चुका है। स्थानीय खाद्य पदार्थों की उपलब्धता घट रही है और छोटे व्यवसायों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
Gayaji News: Commercial gas crisis in Gaya, affecting the taste of famous Rasgullas
Author: AK
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