उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता को लेकर आज धामी सरकार अंतिम पड़ाव में आ पहुंची है । अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो चंद दिनों में ही राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून के रूप में लागू हो जाएगा। प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए करीब दो साल से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तैयारी कर रहे हैं। एक दिन पहले शुक्रवार को समान नागरिक संहिता कानून के लिए बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार को सौंपी है। यह रिपोर्ट मंजूरी के लिए आज कैबिनेट मीटिंग में पेश की जाएगी। धामी कैबिनेट यूसीसी ड्राफ्ट पर मुहर लगाएगी। कैबिनेट की मुहर लगने के बाद यूसीसी का ड्राफ्ट विधानसभा में पेश होगा। दो दिन बाद 5 फरवरी को उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। जिसके अगले दिन 6 फरवरी को विधानसभा सत्र के दौरान इस विधेयक को सदन के पटल पर भी रखा जाएगा। इसके पारित होने के बाद यूसीसी कानूनी रूप ले लेगा। इस प्रकार उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पूरे देश में पहला राज्य बन जाएगा।

वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता के समक्ष रखे गए संकल्प के अनुरूप समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए देहरादून में यूसीसी ड्राफ्ट तैयार करने के उद्देश्य से गठित कमेटी से मसौदा प्राप्त हुआ। आगामी विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता का विधेयक पेश किया जाएगा और अतिशीघ्र कानून के रूप में लागू किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक यूसीसी कार्यालय में समिति के सदस्य तीन दिनों से लगातार 15 घंटे काम कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यूसीसी में 400 से अधिक धाराएं शामिल होंगी। इसका लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से उत्पन्न होने वाली विसंगतियों को समाप्त करना है. ये कुछ प्रावधान हैं जो यूसीसी में दिख सकते हैं। यूसीसी में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समेत किसी भी धर्म में ताल्लुक रखने वाली महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार दिए जाने का फैसला हो सकता है। लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने का फैसला भी यूसीसी के ड्राफ्ट में आ सकता है। पुरुष या महिला को बहु विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। राज्य में किसी भी जनजाति पर यूसीसी लागू नहीं होगा, यह प्रावधान हो सकता है। मुस्लिम समाज में हलाला और इद्दत की रस्म को खत्म करने का प्रावधान किया जा सकता है। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों का पुलिस में रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा साथ ही अपने माता-पिता की जानकारी देनी होगी। विवाह के बाद पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण के विवाह को अमान्य माना जाएगा। यदि विवाह का पंजीकरण नहीं करवाया गया तो सरकारी सुविधा से वंचित रहना पड़ेगा। मुस्लिम धर्म की महिलाओं को बच्चा गोद लेने का अधिकार होगा और गोद लेने की प्रक्रिया सरल होगी। राज्य की सभी लड़कियों का माता-पिता की विरासत पर लड़कों के बराबर अधिकार दिया जाएगा।
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Author: AK
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