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Kedarnath By-Election 2024: कपाट बंद होने के बाद भी केदारनगरी में छाई सियासी रौनक, उपचुनाव जीतने के लिए भाजपा-कांग्रेस में जोरआजमाइश

Political Hustle Continues in Kedarnath Despite Temple Closure, Intense BJP-Congress Competition to Win By-Election

उत्तराखंड में स्थित विश्व प्रसिद्ध धर्मिक तीर्थ स्थल केदारनाथ धाम के कपाट 3 नवंबर को बंद हो चुके हैं। आमतौर पर जब केदारनाथ धाम के कपाट बंद होते हैं उस दौरान केदार नगरी में वीरानी छाई रहती है। लेकिन इस बार धाम के कपाट बंद होने के बावजूद सियासी हलचल और चुनाव प्रचार का शोर सुनाई दे रहा है। इसी महीने 20 नवंबर को होने वाले केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव पर वोट डाले जाएंगे। इस सीट को जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। उपचुनाव होने की वजह से कई दुकानदार अभी भी केदारनाथ घाटी के आसपास डटे हुए हैं। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं चुनाव प्रचार करने की वजह से छोटे बड़े होटलों और दुकानदारों के चेहरे खिले हुए हैं। गुप्तकाशी में इन दिनों वीआईपी गाड़ियों की आवाज आई लगी हुई है। इसके साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया है। यहां पर 18 नवंबर को चुनाव प्रचार खत्म हो जाएगा। अब इस सप्ताह भाजपा और कांग्रेस के नेता अपने-अपने उम्मीदवारों को जीतने के लिए मैदान में उतरने जा रहे हैं। केदारनाथ उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस का स्टार वार शुरू होने जा रहा है। इसके तहत दोनों दलों की ओर से बनाए गए सभी स्टार प्रचारक अगले एक सप्ताह में ताबड़तोड़ जनसभाएं करने जा रहे हैं। रविवार को कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी केदारघाटी के कई क्षेत्रों में प्रचार के लिए पहुंचे। जबकि मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की क्षेत्र में कई रैलियां होनी हैं। इसके अलावा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी इसी दिन से केदारघाटी में रैलियां करेंगे। पार्टी ने केदारनाथ उपचुनाव के लिए करीब एक दर्जन स्टार प्रचारक बनाए हैं। वहीं पौड़ी गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत, सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री और सांसद प्रचार में जुटने जा रहे हैं। दूसरी ओर केदारनाथ उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने प्रचार तेज कर दिया है। पार्टी के कई दिग्गज नेता केदारनाथ विधानसभा में डटे हुए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा,पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह केदारनाथ उपचुनाव में प्रचार प्रसार कर रहे हैं। बता दें कि 2013 में आई बड़ी आपदा के बाद केदारनाथ धाम और केदारनाथ वैली में दोबारा से इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के काम शुरू हुए। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की कमान संभाली तो केदारनाथ में पुनर्निर्माण के कामों ने रफ्तार पकड़ी। पीएम मोदी समय-समय पर केदारनाथ आते रहे हैं। केदारनाथ आस्था का भी बड़ा केंद्र बन गया है। इस साल चार धाम यात्रा में सबसे ज्यादा तीर्थ यात्री केदारनाथ पहुंचे हैं। केदारनाथ के साथ हिंदू धर्मावलंबियों की आस्था और पीएम का कनेक्ट उप चुनाव को खास बनाता है। बीजेपी के राजनीतिक केंद्र में हिंदू तीर्थस्थलों का बड़ा रोल है और केदारनाथ उसी प्राथमिकता की एक कड़ी है। साल 2002 से अस्तित्व में आई केदारनाथ विधानसभा में तीन बार बीजेपी और दो बार कांग्रेस जीत चुकी है। केदारनाथ से बीजेपी की विधायक शैला रानी रावत के निधन के बाद यहां उप चुनाव हो रहा है और बीजेपी किसी भी हाल में अपने पास सीट बनाए रखना चाहती है। दरअसल, इसी साल बीजेपी अयोध्या लोकसभा सीट हार गई थी । इसके बाद हुए उत्तराखंड के बद्रीनाथ विधानसभा सीट के उपचुनाव में भी बीजेपी के हाथ हार लगी। पार्टी ने परंपरा से हटते हुए दिवंगत विधायक शैला रानी रावत के परिवार से किसी को टिकट न देकर, दो बार की पूर्व विधायक आशा नौटियाल को चुनाव में उतार दिया। वहीं कांग्रेस ने पूर्व विधायक मनोज रावत पर दांव खेला है जो पिछले विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर थे। सीट पर करीब 90,000 वोटर हैं। जाति समीकरण की बात करें तो सीट पर ठाकुर वोटर्स की संख्या ज्यादा है। गौरतलब है कि भाजपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा है, जबकि कांग्रेस में ठाकुर कैंडिडेट को प्राथमिकता दी है।

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Author: AK

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