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Dhanteras 2026: पूजा मुहूर्त, विधि और शहरों की टाइमिंग

धनतेरस 2026 कब है? जानें 6 नवंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त, दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों की टाइमिंग, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और खरीदारी का शुभ समय। Dhanteras 2026: Puja Time & City-Wise Muhurat Dhanteras 2026 Puja Time: दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। हिंदू धर्म में इस पर्व का … Read more

Dhanteras 2026: Puja Time & City-Wise Muhurat

धनतेरस 2026 कब है? जानें 6 नवंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त, दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों की टाइमिंग, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और खरीदारी का शुभ समय।

Dhanteras 2026: Puja Time & City-Wise Muhurat

Dhanteras 2026 Puja Time: दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। इसे धन त्रयोदशी या धन्वंतरि त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, दीप जलाते हैं और भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा कुबेर देवता की पूजा-अर्चना करते हैं। धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना भी बेहद मंगलकारी माना जाता है।

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साल 2026 में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस बार पूजा के लिए शाम का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अगर आप भी धनतेरस पर पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो जान लीजिए कि दिल्ली, मुंबई, नोएडा, चेन्नई, कोलकाता और अन्य प्रमुख शहरों में पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। साथ ही जानिए धनतेरस का धार्मिक महत्व, पूजा की पूरी विधि और इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

धनतेरस 2026 कब है? जानिए तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है।

धनतेरस को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल पूजा के शुभ समय को लेकर रहता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा करना शुभ होता है।

धनतेरस 2026 की प्रमुख तिथियां और समय इस प्रकार हैं:

विवरणतारीख और समय
धनतेरस का पर्व6 नवंबर 2026, शुक्रवार
धनतेरस पूजा मुहूर्तशाम 6:02 से 7:57 बजे तक
प्रदोष कालशाम 5:33 से 8:09 बजे तक
वृषभ कालशाम 6:02 से 7:57 बजे तक
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे

इस वर्ष धनतेरस की पूजा के लिए शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। श्रद्धालु इस अवधि में परिवार के साथ पूजा-अर्चना कर सकते हैं। पूजा से पहले घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए।

धनतेरस 2026: दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में पूजा का मुहूर्त

भारत के अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण पूजा के शुभ मुहूर्त में भी बदलाव होता है। इसलिए अपने शहर के अनुसार पूजा का समय जानना जरूरी है।

धनतेरस 2026 के लिए प्रमुख शहरों में पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

शहरपूजा का शुभ मुहूर्त
नई दिल्लीशाम 6:02 से 7:57 बजे
नोएडाशाम 6:01 से 7:57 बजे
गुरुग्रामशाम 6:03 से 7:59 बजे
चंडीगढ़शाम 6:00 से 7:54 बजे
मुंबईशाम 6:35 से 8:35 बजे
पुणेशाम 6:32 से 8:31 बजे
चेन्नईशाम 6:14 से 8:10 बजे
बेंगलुरुशाम 6:25 से 8:20 बजे
अहमदाबादशाम 6:30 से 8:28 बजे
जयपुरशाम 6:11 से 8:07 बजे
हैदराबादशाम 6:15 से 8:13 बजे
कोलकाताशाम 5:28 से 7:26 बजे

ध्यान रखें कि ये समय शहर के अनुसार दिए गए पूजा मुहूर्त हैं। पूजा करते समय स्थानीय पंचांग और धार्मिक परंपराओं को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

धनतेरस पर किसकी पूजा की जाती है?

धनतेरस केवल धन और खरीदारी का त्योहार नहीं है। इस पर्व का संबंध स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख और परिवार की खुशहाली से भी जुड़ा है। इसलिए इस दिन चार प्रमुख देवी-देवताओं की पूजा का विधान बताया गया है।

1. भगवान धन्वंतरि की पूजा

भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान वे हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस के दिन उनकी पूजा करके लोग अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं।

इस दिन भगवान धन्वंतरि को पुष्प, फल और भोग अर्पित किए जाते हैं। कई श्रद्धालु धन्वंतरि मंत्र और स्तोत्र का पाठ भी करते हैं।

2. माता लक्ष्मी की पूजा

माता लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। धनतेरस के दिन उनकी पूजा करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

इस दिन घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। माता लक्ष्मी को कमल का फूल, मिठाई और फल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

3. भगवान कुबेर की पूजा

भगवान कुबेर को धन का देवता और देवताओं का कोषाध्यक्ष माना जाता है। धनतेरस पर उनकी पूजा करने से आर्थिक स्थिरता और धन-धान्य की प्राप्ति की कामना की जाती है।

व्यापारी और कारोबारी वर्ग के लोग इस दिन अपनी तिजोरी, बहीखातों और धन रखने के स्थान की भी पूजा करते हैं। उनका विश्वास है कि इससे कारोबार में उन्नति और आर्थिक खुशहाली आती है।

4. भगवान गणेश की पूजा

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है। उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है।

मान्यता है कि गणेश जी की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

धनतेरस 2026 पूजा विधि: घर पर कैसे करें पूजा?

धनतेरस की पूजा घर पर सरल तरीके से की जा सकती है। इसके लिए विशेष तैयारी और पूजा सामग्री की व्यवस्था पहले से कर लेना अच्छा रहता है।

धनतेरस पूजा की आसान विधि इस प्रकार है:

  1. सबसे पहले सुबह घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। पूजा स्थल और मुख्य द्वार को सजाएं।
  2. शाम को स्नान करके साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें।
  3. पूजा के लिए एक चौकी तैयार करें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
  4. चौकी पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की प्रतिमाएं या तस्वीरें स्थापित करें।
  5. पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं और भगवान के सामने धूप-अगरबत्ती लगाएं।
  6. सभी देवी-देवताओं को रोली या चंदन का तिलक लगाएं।
  7. उन्हें पुष्प, अक्षत, फल, मिठाई और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
  8. माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर के मंत्रों का जाप करें।
  9. भगवान धन्वंतरि की आराधना करें और उनके स्तोत्र का पाठ करें।
  10. अंत में सभी देवी-देवताओं की आरती करें और परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण करें।

पूजा समाप्त होने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। कई परिवार इस दिन घर के अलग-अलग हिस्सों में भी दीपक रखते हैं। इससे पूरे घर में उत्सव और सकारात्मकता का वातावरण बनता है।

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?

धनतेरस के दिन खरीदारी करना इस त्योहार की सबसे लोकप्रिय परंपराओं में से एक है। बाजारों में इस दिन विशेष रौनक देखने को मिलती है। लोग अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के अनुसार अलग-अलग चीजें खरीदते हैं।

सोना और चांदी खरीदने की परंपरा

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। बहुत से लोग इस दिन सोने के सिक्के, चांदी के सिक्के, आभूषण या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदते हैं। माता लक्ष्मी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण भी सोने और चांदी की खरीदारी को विशेष महत्व दिया जाता है।

नए बर्तन खरीदना

इस दिन पीतल, तांबे, स्टील और अन्य धातुओं के बर्तन खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि नए बर्तन घर में समृद्धि का प्रतीक होते हैं। कई लोग पूजा के लिए विशेष बर्तन भी खरीदते हैं।

झाड़ू खरीदने का महत्व

धनतेरस पर झाड़ू खरीदना भी एक पुरानी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को माता लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। इसे घर की गंदगी और नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक माना जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक सामान और वाहन

बदलते समय के साथ धनतेरस पर खरीदारी का स्वरूप भी बदला है। अब लोग इस दिन टीवी, फ्रिज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना पसंद करते हैं। कुछ परिवार इस अवसर पर दोपहिया या चारपहिया वाहन भी खरीदते हैं।

हालांकि, खरीदारी को लेकर किसी तरह का आर्थिक दबाव नहीं लेना चाहिए। त्योहार का वास्तविक महत्व परिवार की खुशियों, स्वास्थ्य और आपसी प्रेम में है।

धनतेरस पर दीपदान का क्या है महत्व?

धनतेरस की शाम दीप जलाने की परंपरा बेहद खास है। कई घरों में मुख्य द्वार पर दीपक जलाया जाता है। इसे यम दीपदान भी कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपदान करने से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होती है। इस परंपरा के तहत घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखने का विधान बताया जाता है।

कुछ परिवारों में इस दिन आटे या मिट्टी का दीपक जलाया जाता है। दीपदान करते समय परिवार की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और मंगल की कामना की जाती है।

धनतेरस 2026 पर किन बातों का रखें ध्यान?

धनतेरस के दिन पूजा और खरीदारी के साथ कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

  • पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें।
  • पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें, ताकि शुभ मुहूर्त में पूजा की जा सके।
  • अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही खरीदारी करें।
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और दान करना भी शुभ माना जाता है।
  • घर में साफ-सफाई और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
  • दीपक जलाते समय आग से संबंधित सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा और भक्ति को महत्व दें।

धनतेरस से शुरू होता है पांच दिवसीय दीपावली उत्सव

धनतेरस के साथ ही पांच दिनों तक चलने वाले दीपावली उत्सव की शुरुआत होती है। इसके बाद छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है।

इन पांच दिनों का अपना अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। धनतेरस स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश देता है, छोटी दिवाली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और दीपावली माता लक्ष्मी के स्वागत तथा प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है।

गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है, जबकि भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और रिश्ते को समर्पित होता है।

धनतेरस 2026: खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य का पर्व

धनतेरस का त्योहार हमें केवल धन कमाने और नई वस्तुएं खरीदने का संदेश नहीं देता, बल्कि जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन और खुशहाली के महत्व को भी समझाता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा जहां अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी है, वहीं माता लक्ष्मी और कुबेर की आराधना आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है।

इस वर्ष 6 नवंबर 2026 को धनतेरस मनाया जाएगा। दिल्ली में पूजा का शुभ समय शाम 6:02 से 7:57 बजे तक रहेगा, जबकि मुंबई में यह समय शाम 6:35 से 8:35 बजे तक है। अन्य शहरों के श्रद्धालु ऊपर दी गई शहरवार टाइमिंग के अनुसार अपनी पूजा की तैयारी कर सकते हैं।

धनतेरस के इस पावन अवसर पर परिवार के साथ पूजा करें, जरूरतमंद लोगों की मदद करें और घर में सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करें। यही इस त्योहार का सबसे सुंदर संदेश है।

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AK
Author: AK

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