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पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए आज 697 बूथों पर फिर हो रही वोटिंग, इन जिलों में हो रहा मतदान

Bengal Panchayat elections: Re-polling underway in 697 booths amid high security
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पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए आज एक बार फिर वोटिंग शुरू हो गई है। ‌बंगाल पंचायत चुनाव में हुई हिंसा के बाद रविवार को चुनाव आयोग ने दोबारा चुनाव कराने का फैसला किया । इसके मुताबिक बंगाल की 697 बूथों पर फिर से मतदान होगा। इसके लिए आज सोमवार को वोट डाले जाएंगे। पश्चिम बंगाल के जिन जिलों में पुनर्मतदान की घोषणा की गई, उनमें सबसे ज्यादा मुर्शिदाबाद में 175 बूथ हैं, इसके बाद मालदा में 112 बूथ हैं। हिंसा प्रभावित नादिया में 89 बूथों पर पुनर्मतदान होगा, जबकि उत्तर में और दक्षिण 24 परगना जिलों में 46 और 36 बूथों और अन्य जगह पर पुनर्मतदान होगा। कुल 697 बूथों पर मतदान होना है। आज पंचायत चुनाव को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि शनिवार 8 जुलाई को पंचायत चुनाव के 73,887 ग्राम पंचायत सीटों में से 64,874 पर मतदान हुआ था। कई इलाकों से बूथ लूटने, बैलेट पेपर फाड़ने, बैलेट पेपर में आग लगाने और बम फेंकने की घटनाएं हुईं। जिन बूथों पर बैलेट बॉक्स से छेड़छाड़ और हिंसा की घटनाएं देखी गई थीं, उन्हीं पर दोबारा मतदान हो रहे हैं। चुनाव के दिन छह जिलों में 16 लोगों की हत्या की गई। इसके साथ ही एक महीने में जान गंवाने वालों की संख्या 35 हो गई। 8 जून को चुनावों का एलान होने के बाद से 7 जुलाई तक 19 लोगों की जान गई थी। विपक्ष के नेता और नंदीग्राम से भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी ने पंचायत चुनाव में हुई हत्याओं के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, टीएमसी के गुंडों और पुलिस की मिलीभगत से इतनी हत्याएं हुईं। इस मामले की सीबीआई को जांच करनी चाहिए। इस बीच पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस दिल्ली पहुंचे हैं जो गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि राज्यपाल हिंसा की रिपोर्ट अमित शाह को सौंप सकते हैं। वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में जो हो रहा है वह भयावह है। मैं ममता के धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रशंसक रहा हूं लेकिन जो हो रहा है वह ठीक नहीं है। हम जानते हैं कि आपने सीपीएम के शासन के दौरान भी इसी तरह की स्थिति का बहादुरी से सामना किया था लेकिन अब जो हो रहा है वह हमारे लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।

AK
Author: AK

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