यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की जल्द भारत आ सकते हैं। यह दौरा रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति की राह खोल सकता है। पुतिन भी 2025 में भारत आएंगे।
Trump Disappointed Zelensky, Will Ukraine President Visit India Soon?
प्रस्तावना: नई कूटनीति का केंद्र बनता भारत
रूस-यूक्रेन युद्ध को साढ़े तीन साल हो चुके हैं। शांति के लिए कई मंच बने, लेकिन अब तक कोई ठोस हल सामने नहीं आया। अमेरिका और यूरोप लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं, मगर परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं मिले। इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के भारत आने की खबरें सुर्खियों में हैं। भारत, जो रूस का पारंपरिक साझेदार रहा है, अब यूक्रेन के साथ भी रिश्ते मजबूत कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है—क्या दिल्ली से निकलेगा शांति का रास्ता?

जेलेंस्की की भारत यात्रा: तारीख तय होने की कोशिश
यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने हाल ही में बताया कि राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत यात्रा की तैयारी चल रही है। अभी सटीक तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच सक्रिय बातचीत जारी है। यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूक्रेन गए थे और वहां जेलेंस्की को भारत आने का न्योता दिया था।
भारत और यूक्रेन अब इस दौरे को लेकर गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं। राजदूत ने कहा कि यह मुलाकात दोनों देशों के लिए नई रणनीतिक साझेदारी का आधार बन सकती है।
मोदी और जेलेंस्की की मुलाकातें: शांति का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की पिछले दो वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके हैं।
मई 2023 – जापान में जी-7 शिखर सम्मेलन
मोदी ने स्पष्ट कहा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध केवल दो देशों का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरी मानवता से जुड़ा सवाल है। उन्होंने शांति और मानवीय मदद के लिए भारत की भूमिका पर जोर दिया।
जून 2024 – इटली में जी-7 बैठक
यहां भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। मोदी ने कहा कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।
सितंबर 2024 – न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र समिट
संयुक्त राष्ट्र के समिट ऑफ द फ्यूचर में मोदी और जेलेंस्की की तीसरी मुलाकात हुई। यहां भारत ने फिर से शांति वार्ता का समर्थन किया।
इन बैठकों से साफ है कि भारत लगातार तटस्थ लेकिन प्रभावशाली भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

ट्रंप से निराशा, भारत से उम्मीद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी भाषणों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावा किया था कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध को जल्दी रोक देंगे। लेकिन उनके बयानों के बावजूद कोई ठोस पहल नज़र नहीं आई। यही कारण है कि अब जेलेंस्की भारत की ओर देख रहे हैं।
भारत की खासियत यह है कि उसके रूस और यूक्रेन दोनों से अच्छे रिश्ते हैं। भारत ने कभी भी एकतरफा पक्ष नहीं लिया, बल्कि संतुलित रुख अपनाया। यही कारण है कि दुनिया अब भारत को संभावित मध्यस्थ के रूप में देख रही है।
पुतिन भी आएंगे भारत
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी 2025 के अंत में भारत आने वाले हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपनी मॉस्को यात्रा के दौरान दी। पहले चर्चा थी कि पुतिन अगस्त 2025 में आएंगे, लेकिन अब इसे साल के अंत तक के लिए तय किया गया है।
यह दौरा भारत के लिए बेहद अहम होगा, क्योंकि इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भारत आएंगे। यानी दोनों दुश्मन देशों के नेता एक ही साल भारत की धरती पर होंगे। यह परिस्थिति भारत को कूटनीतिक संतुलन साधने का बड़ा अवसर देती है।
भारत की भूमिका: शांति का संभावित सेतु
रूस के साथ मजबूत रिश्ते
भारत और रूस दशकों से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरे रिश्ते हैं।
यूक्रेन के साथ बढ़ती नजदीकियां
पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूक्रेन ने व्यापार, शिक्षा और तकनीकी सहयोग में प्रगति की है। भारतीय छात्र बड़ी संख्या में यूक्रेन में पढ़ाई करते थे। युद्ध के बाद भी भारत ने मानवीय सहायता जारी रखी।
शांति प्रयासों में मध्यस्थता
भारत का तटस्थ रुख इसे पश्चिम और रूस दोनों के लिए स्वीकार्य बनाता है। यही कारण है कि जेलेंस्की की भारत यात्रा को “शांति मिशन” के रूप में देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। यूरोप में ऊर्जा संकट बढ़ा, खाद्यान्न आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखी गई।
भारत, जो विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इस संकट के समाधान में योगदान दे सकता है। यदि भारत रूस और यूक्रेन के बीच संवाद की राह खोलता है, तो यह न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर होगी।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि भारत के लिए यह अवसर है, लेकिन चुनौतियां भी गंभीर हैं।
- रूस का भरोसा: भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके कदम रूस को नाराज़ न करें।
- पश्चिमी दबाव: अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि भारत खुले तौर पर यूक्रेन का समर्थन करे।
- युद्ध की जटिलता: तीन साल से चल रहा युद्ध गहरी राजनीतिक और रणनीतिक जटिलताओं से भरा है। इसे हल करना आसान नहीं होगा।
निष्कर्ष: क्या दिल्ली बनेगी शांति की राजधानी?
जेलेंस्की की संभावित भारत यात्रा और पुतिन की तय यात्रा दोनों ही इस ओर संकेत कर रही हैं कि भारत अब वैश्विक शांति प्रयासों का अहम केंद्र बन सकता है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कई बार यह कह चुके हैं कि “यह युद्ध किसी का हित नहीं साध रहा, समाधान केवल संवाद और कूटनीति से निकलेगा।”
यदि आने वाले महीनों में भारत दोनों पक्षों को बातचीत की मेज़ पर लाने में सफल होता है, तो यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक होगी। दुनिया की निगाहें अब दिल्ली पर हैं—क्या यहीं से निकलेगा रूस-यूक्रेन युद्ध का शांति मार्ग?
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Author: AK
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