उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी, 10 और 15 जुलाई को मतदान, 19 जुलाई को मतगणना। आचार संहिता लागू।
Uttarakhand Panchayat Elections Announced, Voting in Two Phases
उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 का शंखनाद, दो चरणों में होंगे मतदान
उत्तराखंड में लंबे समय से प्रतीक्षित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना आखिरकार जारी कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 21 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस चुनावी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। चुनाव दो चरणों में होंगे और आचार संहिता पूरे राज्य में लागू कर दी गई है। यह चुनाव ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के लिए आयोजित किया जाएगा। इस बार का पंचायत चुनाव कई मायनों में अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान होगा और एक बार फिर ग्रामीण लोकतंत्र की नब्ज टटोली जाएगी।
दो चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, ये हैं मुख्य तारीखें
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए निम्नलिखित प्रमुख तिथियों को साझा किया:
- पहले चरण की वोटिंग: 10 जुलाई 2025
- दूसरे चरण की वोटिंग: 15 जुलाई 2025
- मतगणना: 19 जुलाई 2025
- नामांकन की तिथि: 25 से 28 जून 2025
- नाम वापसी की तिथि: 2 जुलाई 2025
- चुनाव चिन्ह आवंटन: 3 जुलाई 2025
इस चुनाव के माध्यम से राज्य में कुल 7,499 ग्राम प्रधान, 95 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 358 जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव किया जाएगा।
हरिद्वार को छोड़कर बाकी 12 जिलों में चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम में हरिद्वार को फिलहाल बाहर रखा गया है। यह निर्णय विशेष परिस्थितियों के तहत लिया गया है। शेष 12 जिलों में यह चुनाव समान रूप से आयोजित किया जाएगा। आयोग ने सभी जिला अधिकारियों और पंचायत अधिकारियों को निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
क्यों हैं पंचायत चुनाव अहम
ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक लोकतंत्र की बुनियाद
पंचायती राज भारत में लोकतंत्र की नींव है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पंचायतें न केवल प्रशासन का विकेंद्रित स्वरूप हैं, बल्कि विकास कार्यों के लिए सबसे प्रभावी इकाइयां भी हैं। ग्रामीण विकास, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पंचायतों के माध्यम से ही जनता तक पहुंचती हैं।
महिलाओं और पिछड़े वर्गों को मिलेगा प्रतिनिधित्व
आरक्षण प्रक्रिया 19 जून को पूरी कर ली गई थी। इस बार पंचायतों में महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण का पालन किया गया है। इससे सामाजिक समावेशिता को भी बढ़ावा मिलेगा।
चुनाव में बैलेट पेपर का प्रयोग
इस बार पंचायत चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय बैलेट पेपर के माध्यम से पारंपरिक तरीके से मतदान होगा। यह ग्रामीण मतदाताओं के लिए अधिक सुविधाजनक माना जा रहा है।
चुनावी आचार संहिता लागू
अधिसूचना जारी होते ही प्रदेश भर में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। अब सरकारी योजनाओं की घोषणाएं, उद्घाटन या किसी भी प्रकार की लोकलुभावन घोषणाएं प्रतिबंधित होंगी। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को आचार संहिता का पालन करना अनिवार्य है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की आचार संहिता उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक हलचलें तेज, गांव-गांव में बढ़ी सक्रियता
चुनाव की घोषणा होते ही गांव से लेकर जिला स्तर तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। संभावित उम्मीदवार जनसंपर्क में जुट गए हैं। पुराने जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ नए चेहरों ने भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर ली है। महिलाएं और युवा वर्ग भी इस बार सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं।
चुनाव आयोग की तैयारियां
राज्य निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। प्रत्येक बूथ पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की सूची भी तैयार की जा रही है। इसके साथ ही मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे।
साक्षरता और मतदान प्रतिशत को लेकर अभियान
उत्तराखंड में कई ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। इसे ध्यान में रखते हुए आयोग ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। “सशक्त पंचायत, सशक्त लोकतंत्र” जैसे नारों के माध्यम से मतदाताओं को प्रेरित किया जा रहा है।
निष्कर्ष: लोकतंत्र का पर्व तैयार
उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 न केवल लोकतंत्र का पर्व है, बल्कि यह राज्य के भविष्य निर्माण की आधारशिला भी है। दो चरणों में होने वाले इस चुनाव से यह तय होगा कि ग्राम से लेकर जिला स्तर तक विकास की बागडोर किसके हाथों में होगी। लोगों को चाहिए कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग ईमानदारी और विवेक से करें ताकि उत्तराखंड की पंचायतें और भी सशक्त बन सकें।
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Author: AK
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