पटना में सियासी पोस्टर वॉर तेज हो गया है। एनडीए और महागठबंधन एक-दूसरे पर निजी हमले कर रहे हैं। चारा घोटाला और दामादवाद बना मुद्दा।
Patna Poster War: Tejashwi Targeted, Chirag Called ‘Jija First’
पटना की सड़कों पर सियासत की जंग: पोस्टर वॉर से बढ़ा सियासी तापमान
बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। पटना की सड़कों, चौराहों और दीवारों पर पोस्टरों की बाढ़ आई हुई है। ये पोस्टर न केवल नेताओं पर तीखे कटाक्ष कर रहे हैं बल्कि निजी और पारिवारिक जीवन को भी चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। खासतौर पर एनडीए और महागठबंधन के बीच यह पोस्टर वॉर अब खुलकर सामने आ गया है।
पोस्टर की जंग का आगाज़: शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर
शनिवार सुबह राजधानी की प्रमुख सड़कों पर जैसे ही लोगों ने दीवारों पर लगे नए-नए पोस्टर देखे, हर किसी की नजर ठहर गई। पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे नेताओं की तस्वीरों के साथ तीखे तंज कसे गए थे।

एनडीए पर हमला: ‘नेशनल दामादवादी अलायंस’ बना नया नारा
महागठबंधन समर्थकों द्वारा लगाए गए एक पोस्टर में एनडीए को ‘नेशनल दामादवादी अलायंस’ कहा गया। इस पोस्टर में मोदी, नीतीश, मांझी और चिराग की तस्वीरों के साथ आरोप लगाया गया कि एनडीए में दामादों और रिश्तेदारों को बढ़ावा देने की परंपरा चल रही है।
चिराग पासवान पर तंज: ‘बिहार फर्स्ट नहीं, जीजा जी फर्स्ट’
एक अन्य पोस्टर में चिराग पासवान को ‘जीजा जी फर्स्ट’ बताते हुए कहा गया कि उनके लिए बिहार की बजाय रिश्तेदारी पहले है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर एनडीए में उनकी भूमिका और पारिवारिक कनेक्शन को निशाना बना रही है।

महागठबंधन पर पलटवार: ‘मेरा बाप चारा चोर, मुझे वोट दो’
एनडीए समर्थकों ने भी जवाबी हमला किया। एक पोस्टर में तेजस्वी यादव को उनके पिता लालू यादव के साथ दिखाया गया, जिसमें लालू एक भैंस पर बैठे हैं और मुंह में चारा है। नीचे लिखा है, “मेरा बाप चारा चोर, मुझे वोट दो।”
चारा घोटाले को बना दिया गया सियासी हथियार
इस पोस्टर में चारा घोटाले की याद दिलाकर राजद के वंशवाद पर निशाना साधा गया। पोस्टर यह संकेत देता है कि जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले हैं, उनके बच्चे भी सत्ता की दौड़ में हैं।
पोस्टर वॉर में संजय झा भी बने निशाना
जेडीयू के पूर्व मंत्री संजय झा पर एक पोस्टर में आरोप लगाया गया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पैनल में अपने परिवार के लोगों को जगह दिलवाकर परिवारवाद को बढ़ावा दिया। पोस्टर में सवाल किया गया कि “इनसे बिहार को क्या मिला? सब कुछ दिया अपने परिवार को।”
बिहार की राजनीति में बदल रहा प्रचार का चेहरा
पोस्टर वॉर इस बात का संकेत है कि बिहार की राजनीति अब पारंपरिक रैलियों और प्रेस कांफ्रेंस से आगे बढ़कर विजुअल और मनोवैज्ञानिक युद्ध की ओर बढ़ रही है। अब नेताओं की छवि को सोशल मीडिया और सड़कों पर लगे पोस्टर तय कर रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया भी दिलचस्प
पटना के स्थानीय नागरिकों से जब बात की गई तो कुछ ने कहा कि यह प्रचार का नया तरीका है, वहीं कई लोगों ने इसे राजनीति का निम्न स्तर बताया। 25 वर्षीय छात्र सुमित कुमार का कहना है, “राजनीति अब मुद्दों पर नहीं, रिश्तों और छींटाकशी पर चल रही है।”
क्या है चुनावी रणनीति इन पोस्टरों के पीछे?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्टर वॉर केवल प्रचार का हिस्सा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दांव है। इससे नेताओं की छवि पर असर डालने की कोशिश की जाती है और मतदाताओं के बीच भ्रम या आकर्षण की स्थिति बनाई जाती है।
चुनावी मुद्दों की जगह पारिवारिक रिश्ते बने केंद्र
जहां एक ओर शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी जैसे अहम मुद्दों को कम जगह मिल रही है, वहीं पारिवारिक संबंधों, वंशवाद और व्यक्तिगत हमले केंद्र में आ गए हैं। यह चिंता का विषय है क्योंकि इससे असली समस्याएं चर्चा से गायब हो जाती हैं।
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Author: AK
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