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प्रदूषण को लेकर लगातार राजनीति गर्म है। नमो वरीयर्स योद्धा ने आम आदमी पार्टी कार्यालय के सामने कल प्रदूषण को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि नाम नमो वरीयर्स का था लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसका नेतृत्व में हुआ जो कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करता है जिसके बाद खूब बवाल हुआ है। इसके साथ ही आज एक आरटीआई से बड़े खुलासे का दावा केंद्रीय राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने अपने प्रेसवार्ता के दौरान किया है।
मीनाक्षी का कहना है कि 1286.93 करोड़ रुपये पर्यावरण सेस के रुप में दिल्ली की जनता ने केजरीवाल सरकार को दिया लेकिन उन पैसों का रिजल्ट है कि आज छोटे बच्चे खांस रहे हैं, बुजुर्गों को फेफड़ों की बीमारियां हो रही है और दिल्ली के अस्पताल हैं जहां केजरीवाल के चमकते चेहरों के होर्डिंग्स तो मिल जायेंगे, लेकिन बेसिक जांच की सुविधाओं के अभाव में मरीज इधर-उधर भटकते रहते हैं। इतना ही नहीं मीनाक्षी लेखी का कहना है कि दिल्ली के अंदर 10 स्मोग टॉवर लगाने का दावा केजरीवाल करते हैं और उसके नाम पर 80 लाख रुपये प्रति माह मरम्मत के नाम पर खर्च में दिखाए जाते हैं, लेकिन बावजूद उसके स्मोग टावर काम नहीं कर रहे है।
वैसे तो हमेशा से ही केजरीवाल के ऊपर विज्ञापन और होर्डिंग्स पर पैसे पानी की तरह बहाने के आरोप भाजपा लगाती रही है और साथ ही उनके ऊपर मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ दूसरे राज्यों में राजनीति पर्यटन में व्यस्त होने की बात का आरोप भी लगा रही है। मीनाक्षी लेखी का कहना है कि 1286.93 करोड़ रुपये में से 2015-16 में सिर्फ 272.51 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं उसमें से 265 करोड़ रुपये दिल्ली मेरठ रैपीड रेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर खर्च हुआ है।
मीनाक्षी लेखी यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल बार-बार दिल्ली के उपराज्यपाल को ब्लेम करते हैं कि वाहन ऑन-ऑफ सिस्टम को रोक दिया नहीं तो दिल्ली का पर्यावरण बेहतर हो जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि प्रदूषण विरोधी प्रमाणिक रिकॉर्ड दिल्ली प्रदूषण विभाग के पास नहीं है। अब ये बातें क्यों हुई इसका भी प्रमुख कारण है सिसोदिया का लैंडफील साइट पर जाना।
दरअसल, केजरीवाल सरकार और आम आदमी पार्टी बार-बार भाजपा शासित निगम पर कूड़े की ढेर लगाने का आरोप लगा रही है और हर बार कूड़े की ढेर पर सवाल खड़े कर रही है जबकि भाजपा की ओर से कूड़े पर जवाब ना देकर प्रदूषण और सुकेश चंद्रशेखर के लेटर बम को लेकर केजरीवाल को घेरने की बात शुरु कर दी गई है। ना ही केजरीवाल सरकार प्रदूषण पर कोई बात करना चाहती है लेकिन भाजपा उसे बार-बार प्रदूषण और पर्यायवरण को लेकर बात कर रही है ताकि मुद्दे को डायवर्ट नहीं किया जा सके।



















