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राष्ट्रपति शपथ लेने से पहले ही ट्रंप के आक्रामक इरादे, ब्रिक्स देशों को चेतावनी के बाद अब हमास को दी सीधी धमकी

Trump's Aggressive Stance Before Presidential Oath: Issues Warning to BRICS Nations and Direct Threat to Hamas

Trump's Aggressive Stance Before Presidential Oath: Issues Warning to BRICS Nations and Direct Threat to Hamas

अगले महीने 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का कार्यकाल खत्म होने वाला है। उसी दिन नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रेसिडेंट के रूप में शपथ लेंगे। जो बाइडेन का 4 साल कार्यकाल सॉफ्ट के रूप में याद किया जाएगा। लेकिन अमेरिका के होने वाले नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आक्रामक इरादे जाहिर कर दिए हैं। तीन दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर ब्रिक्स देशों को चेतावनी दी थी। इसके बाद अब उन्होंने हमास को सीधे धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि हमास अगर उनके पदभार ग्रहण करने तक गाजा पट्टी में बंधकों को रिहा नहीं गया तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखकर ये धमकी दी है उन्होंने कहा बंधकों को जल्द रिहा करें। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, यदि बंधकों को 20 जनवरी, 2025 से पहले रिहा नहीं किया गया तो जिस दिन मैं गर्व से संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करता हूं, तो मध्य पूर्व में और उन प्रभारियों के लिए बहुत बड़ा दंड होगा, जिन्होंने इन मानव अत्याचारों को अंजाम दिया।

बता दें कि हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर अब तक का सबसे घातक हमला किया। इजरायली आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हमले में 1,208 मौतें हुईं, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे। वहीं हमास की मांग है कि इजरायली सेना गाजा से चला जाए। वो बंधकों के बदले फलस्तीनी कैदियों को रिहाई की मांग कर रहा है। हमास की मांग पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि जब तक हमास पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता युद्ध जारी रहेगा। इससे पहले ट्रंप ने शनिवार को ब्रिक्स देशों को चेतावनी दी है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से कहा कि अगर उन्होंने अमेरिकी डॉलर के बजाय कोई और मुद्रा अपनाई तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। चेतावनी के साथ ही ट्रंप ने नौ सदस्यीय समूह से प्रतिबद्धता मांगी है, जिसमें भारत, रूस, चीन और ब्राजील शामिल हैं। ब्रिक्स का गठन 2009 में किया गया था। यह एकमात्र प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह है, जिसका संयुक्त राज्य अमेरिका हिस्सा नहीं है। इसके अन्य सदस्य दक्षिण अफ्रीका, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात हैं। पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश, विशेष रूप से रूस और चीन, अमेरिकी डॉलर का विकल्प तलाश रहे हैं या यूं कहें कि वह अपनी ब्रिक्स मुद्रा बना रहे हैं।

हालांकि, भारत अब तक रूस और चीन के इस कदम का हिस्सा नहीं रहा है। ट्रंप ने आगे कहा कि इस बात की कोई संभावना नहीं है कि ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की जगह ले लेगा। उन्होंने कहा कि जो भी देश ऐसा करने की कोशिश करेगा तो उसे अमेरिका को अलविदा कह देना चाहिए। बता दें कि भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है, जिसमें अब नौ सदस्य देश हैं। अमेरिकी डॉलर द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के बाद से दुनिया की सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली करेंसी रही है। उससे पहले दुनिया में ब्रिटिश पाउंड की तूती बोलती थी। अधिकांश देश दो प्राथमिक उद्देश्यों के लिए डॉलर का उपयोग करते हैं। पहला विदेशी मुद्रा भंडार में रखने के लिए और व्यापार तथा अन्य वैश्विक लेनदेन के लिए। डॉलर आज भी दुनिया की सबसे पसंदीदा करेंसी है लेकिन इसका रुतबा धीरे-धीरे कम हो रहा है। दुनिया के अधिकांश देशों के रिजर्व में डॉलर की बड़ी हिस्सेदारी है। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पसंदीदा करेंसी बनी हुई है। तेल जैसी प्रमुख वस्तुओं को मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर का उपयोग करके खरीदा और बेचा जाता है। सऊदी अरब सहित कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अब भी अपनी मुद्राओं को डॉलर से जोड़ती हैं।

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Author: AK

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