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US Gold card visa: अमेरिकी नागरिकता के लिए 44 करोड़ रुपये देने होंगे

Trump’s $5 million ‘Gold Card’ Visa

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा लॉन्च किया, जिसकी कीमत 5 मिलियन डॉलर (44 करोड़ रुपये) होगी। यह ईबी-5 वीजा प्रोग्राम का विकल्प बताया जा रहा है, जिससे अमेरिकी नागरिकता पाना अब बेहद महंगा हो गया है। इस बदलाव से खासकर भारतीय निवेशकों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए अमेरिका में बसने का सपना मुश्किल हो सकता है।

1. अमेरिकी नागरिकता के लिए अब चुकाने होंगे 44 करोड़ रुपये

2. ट्रंप के ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा से आम भारतीयों के लिए बढ़ी मुश्किलें

3. ईबी-5 वीजा प्रोग्राम की जगह अब सिर्फ अमीरों के लिए नया विकल्प

Trump’s $5 million ‘Gold Card’ Visa

अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर और सपनों का देश माना जाता है। भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर के युवा जो बड़ी सोच और बड़े सपने देखते हैं उनके लिए अमेरिका जाना है एक “ड्रीम” जैसा होता है। कोई अप्रवासी भारत आता है तब वह अपने रिश्तेदारों और परिचितों से बड़ी शान से कहता है कि वह अमेरिका में रहता है । अमेरिका की हाईटेक जिंदगी आज से नहीं बल्कि वर्षों से दूसरे देश के लोगों के नागरिकों को आकर्षित करती रही है। यही कारण है भारत में पंजाब, हरियाणा, गुजरात समेत कई राज्यों के लोग जिंदगी का सब कुछ दांव पर लगाकर अमेरिका गए और वहां की नागरिकता पाकर बस गए। ‌‌ लेकिन अब भारत ही नहीं बल्कि किसी भी देश के नागरिकों के लिए अमेरिका जाना और वहां की नागरिकता पाना आसान नहीं है। 20 जनवरी साल 2025 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद डोनाल्ड ट्रंप लगातार अमेरिका में रहने, दूसरे देशों से आने वालों और नागरिकता के मामले में कठोर होते चले गए। दुनिया के सबसे रईस कारोबारी और टेस्ला कंपनी के सीईओ एलन मस्क इस बार डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं । बताया जाता है कि अमेरिका की ट्रंप सरकार चलाने में मस्क का पूरा दिमाग चल रहा है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की फर्स्ट नीति पर कड़े फैसले लेते जा रहे हैं। अब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ताजा फैसले में भारतीय समेत विदेशी नागरिकों को अमेरिका में नागरिकता पाने के लिए भारी भरकम रकम चुकाने के लिए नए नियम बनाए हैं।

यह ऐसे नियम है कि आम भारतीय नागरिक शायद ही या रकम दे पाए। अमेरिका में नागरिकता देने के बहाने राष्ट्रपति ट्रंप बिजनेस भी कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का यह एक ऐसा बिजनेस है जो सीधे ही अमेरिकी इकोनॉमी को ग्रोथ करेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड अमेरिका की नागरिकता देने के बदले 5 गुना ज्यादा पैसा वसूल करने वाले हैं। ट्रंप ने मंगलवार को ‘गोल्ड कार्ड’ नाम से एक नए वीजा प्रोग्राम को शुरू करने का एलान किया। इसे 5 मिलियन डॉलर (44 करोड़ भारतीय रुपए) में खरीदा जा सकता है। ट्रंप ने इसे अमेरिकी नागरिकता का रास्ता बताया है। ट्रंप ने ‘गोल्ड कार्ड’ को ईबी-5 वीजा प्रोग्राम का विकल्प बताया और कहा कि भविष्य में 10 लाख गोल्ड कार्ड बेचे जाएंगे। फिलहाल अमेरिकी नागरिकता के लिए ईबी-5 वीजा प्रोग्राम सबसे आसान रास्ता है। इसके लिए लोगों को 1 मिलियन डॉलर (करीब 8.75 करोड़ रुपए) देने होते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह वीजा कार्ड अमेरिकी नागरिकता के रास्ते खोलेगा। इसे खरीदकर लोग अमेरिका आएंगे और यहां बहुत ज्यादा टैक्स भरेंगे। उन्होंने दावा किया कि यह प्रोग्राम बहुत सफल होगा और इससे राष्ट्रीय कर्ज का भुगतान जल्द हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने वीजा प्रोग्राम से जुड़े एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत करते हुए कहा कि गोल्ड वीजा कार्ड नागरिकों को ग्रीन कार्ड जैसा स्पेशल राइट देगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम के दो हफ्ते में शुरू होने की उम्मीद है। यह गोल्ड कार्ड, ग्रीन कार्ड का प्रीमियम वर्जन होगा। गोल्ड कार्ड प्राप्त करने के बाद न सिर्फ अमुख व्यक्ति को ग्रीन कार्ड से ज्यादा खास अधिकार होंगे, बल्कि अमेरिका में निवेश करने और नागरिकता प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।

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ईबी-5 वीजा प्रोग्राम 1990 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा शुरू किया था–

ईबी-5 वीजा प्रोग्राम 1990 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा शुरू किया था, ताकि विदेशी निवेशकों के जरिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि गोल्ड कार्ड के लिए उन्हें कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। दरअसल, अमेरिका में नागिरकता के लिए नियम और कानून अमेरिकी की कांग्रेस बनाती है. यहां कांग्रेस का अर्थ पार्लियामेंट से है। जैसे भारत में संसद होती है वैसे अमेरिका में कांग्रेस होती है। इस प्रोग्राम की मदद से, अगर कोई विदेशी अमेरिकी बिजनेस में इन्वेस्ट करता है, तो उसे ग्रीन कार्ड मिल सकता है। अमेरिका में स्थायी तौर पर रहने के लिए ग्रीन कार्ड की जरूरत होती है। इसके लिए ईबी-1, ईबी-2, ईबी-3, ईबी-4 वीजा प्रोग्राम हैं, लेकिन ईबी-5 वीजा प्रोग्राम सबसे ज्यादा बेहतर है। यह 1990 से लागू है। इसमें शख्स किसी रोजगार देने वाले नियोक्ता से नहीं बंधे होते हैं और अमेरिका में कहीं भी रहकर काम या फिर पढ़ाई कर सकते हैं। इसे हासिल करने में 4 से 6 महीने लगते हैं। ईबी-4 वीजा प्रोग्राम का मकसद विदेशी निवेश हासिल करना है। इसमें लोगों को किसी ऐसे बिजनेस में 1 मिलियन डॉलर का निवेश करना होता है, जो कम से कम 10 नौकरियां पैदा करता हो। यह वीजा प्रोग्राम निवेशक, उसकी पति या पत्नी और 21 साल के कम उम्र के बच्चों को अमेरिकी स्थायी नागरिकता देते हैं। वे भारतीय जो अमेरिकी नागरिकता लेने के लिए ईबी-5 प्रोग्राम पर निर्भर थे, उनके लिए ‘ट्रंप वीजा प्रोग्राम’ काफी महंगा पड़ सकता है। ईबी-5 कार्यक्रम को खत्म करने से लंबे ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसे स्किल्ड भारतीय प्रोफेशनल्स को भी नुकसान हो सकता है। भारतीय आवेदकों को पहले से ही रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड कैटेगरी के तहत दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। गोल्ड कार्ड की शुरुआत के साथ इमिग्रेशन सिस्टम उन लोगों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो भारी कीमत नहीं चुका सकते। बहुत से भारतीय निवेशकों के लिए ईबी-5 वीजा एक सस्ता और किफायती ऑप्शन था, लेकिन अब बड़ी पूंजी के कारण वे इस वीजा के लिए पात्र नहीं हो पाएंगे। मिडल क्लास के निवेशक इस भारी निवेश को देख शायद निराश हो सकते हैं। हो सकता है जो लोग निवेश नहीं कर सकते, वे दूसरे वीजा ऑप्शंस या विदेशों में निवेश के लिए नए रास्ते तलाश सकते हैं। इस योजना का लक्ष्य दुनियाभर से अमीर लोगों को अमेरिका की ओर खींचना है, जो देश में नौकरियों के अवसर बढ़ाएंगे। लेकिन गोल्ड कार्ड वीजा लागू होने के बाद, ये शर्त 5 मिलियन डॉलर तक बढ़ चुकी है। मतलब कि अब केवल बेहद अमीर लोग ही इस वीजा का फायदा उठा सकते हैं।

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Author: AK

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