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सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरितमानस पर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर भाजपा, कांग्रेस ने जताया कड़ा ऐतराज, साधु-संतों में भी आक्रोश

(मचा सियासी बवाल) समाजवादी पार्टी के नेता और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य के गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस पर सवाल उठाने पर भाजपा, कांग्रेस समेत तमाम साधु-सतों ने कड़ी आपत्ति जताई है। रविवार शाम को समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी की थी। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा थातुलसीदास द्वारा … Read more

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(मचा सियासी बवाल)





समाजवादी पार्टी के नेता और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य के गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस पर सवाल उठाने पर भाजपा, कांग्रेस समेत तमाम साधु-सतों ने कड़ी आपत्ति जताई है। रविवार शाम को समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी की थी। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था
तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के कुछ हिस्सों पर यह कहते हुए पाबंदी लगाने की मांग की है कि उनसे समाज के एक बड़े तबके का जाति, वर्ण और वर्ग के आधार पर अपमान होता है। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में सब बकवास है। क्या यही धर्म है, ऐसे धर्म का सत्यानाश हो। रामचरितमानस के कुछ हिस्सों पर मुझे आपत्ति है। तुलसीदास ने शुद्र को अधम जाति का कहा है। सपा नेता मौर्य के इस विवादित बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस ने हमला बोला है। बीजेपी के ओर से प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा, इस मामले पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, डिंपल यादव और रामगोपाल यादव को जवाब देना चाहिए। अब स्वामी प्रसाद मौर्य सपा में एक बड़ा नेता बनने के लिए छटपटा रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुन नहीं रहा है। सपा ने हमारी धार्मिक गतिविधियों को बाधित करने की कोशिश की थी। सपा को यह तय करना होगा कि स्वामी प्रसाद मौर्य का बयान पार्टी का आधिकारिक बयान है या नहीं। मौर्य ने यह बयान दिया है और उन्हें इसके लिए क्षमा मांगनी चाहिए। कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सपा एमएलसी के बयान को घटिया बताया है। कांग्रेस नेता ने कहा, प्रतिबंध इस तरह की घटिया और बेहूदी बयानबाजी करने वाले मूर्धन्य नेताओं पर लगना चाहिए। जो रोज हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का अपमान करने को ही अपनी बहादुरी समझते हैं। मौर्य के बयान पर अयोध्या के संतों ने नाराजगी जताई है। श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास ने कहा है कि स्वामी प्रसाद का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। वे पिछड़े लोगों का खिसक चुका जनाधार वापस पाने के लिए बेतुका बयान दे रहे हैं। वहीं, उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली के महंत भरत दास ने कहा कि विरोधी राजनीति के लोग किसी भी स्तर पर चले जा रहे हैं। यह ठीक नहीं है। रामचरित मानस देव ग्रंथ है, जो हर मनुष्य के कल्याण के लिए है। इस पर अनुचित टिप्पणी करना मानवता के साथ अपराध है। बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य से पहले इसी महीने 11 जनवरी को बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने भी रामचरितमानस पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। चंद्रशेखर ने तुलसीदास की रामचरितमानस को समाज में नफरत फैलाने वाला बताया था। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस और मनुस्मृति समाज को विभाजित करने वाली पुस्तकें हैं। बयान के बाद चंद्रशेखर के खिलाफ मुजफ्फरपुर और किशनगंज जिले में हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में दो मामले दर्ज किए गए थे।

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Author: AK

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