
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में आज से नई सरकार अस्तित्व में आ जाएगी। केपी शर्मा ओली तीसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। दो बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके चीन समर्थक 72 वर्षीय ओली सोमवार 11 बजे दिन में शपथ लेंगे। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे। केपी शर्मा ओली को भारत विरोधी बयानों के लिए जाना जाता है। उनके कार्यकाल में भारत और नेपाल के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में भारत को पड़ोसी नेपाल से मधुर संबंध बनाने की बड़ी चुनौती होगी। ओली 11 अक्टूबर, 2015 से तीन अगस्त, 2016 तथा पांच फरवरी, 2018 से 13 जुलाई, 2021 तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं। 13 मई, 2021 से 13 जुलाई, 2021 तक उनका प्रधानमंत्री बना रहना विवादित रहा। तत्कालीन राष्ट्रपति बिद्यादेवी भंडारी द्वारा की गई उनकी नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक माना था। नेपाल में लगातार राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि रिपब्लिकन प्रणाली लागू होने के बाद पिछले 16 वर्षों में देश में 14 सरकारें आई हैं। अब नेपाल की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता के पी शर्मा ओली को रविवार को चौथी बार नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। वह एक नई गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे, जिसके सामने इस हिमालयी राष्ट्र में राजनीतिक स्थिरता प्रदान करने की कठिन चुनौती है। बता दें कि शुक्रवार को पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत खो दिया था। जिसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) के अध्यक्ष ओली को नेपाल का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया। ओली संसद में सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के समर्थन से चौथी बार प्रधानमंत्री बने। शुक्रवार देर रात ओली ने नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया और प्रतिनिधि सभा के 165 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र सौंपा, जिस पर उनकी पार्टी से 77 तथा नेपाली कांग्रेस से 88 सदस्यों के दस्तखत थे। सीपीएन-माओइस्ट सेंटर के अध्यक्ष प्रचंड शुक्रवार को शक्ति परीक्षण के दौरान के विश्वासमत हासिल नहीं कर पाए थे। पिछले हफ्ते की शुरुआत में, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली ने नयी गठबंधन सरकार बनाने के लिए सात सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि प्रधानमंत्री का शेष कार्यकाल बारी-बारी से उनके बीच साझा किया जाएगा। समझौते के मुताबिक, पहले चरण में ओली 18 महीने तक प्रधानमंत्री बनेंगे। प्रधानमंत्री ओली सोमवार को एक छोटी मंत्रिपरिषद का गठन करेंगे। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, जनता समाजवादी पार्टी नेपाल, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी, जनमत पार्टी और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दलों के भी सरकार में शामिल होने की संभावना है।
अपने कार्यकाल में केपी शर्मा ओली ने कई बार सार्वजनिक रूप से भारत विरोधी बयान दिया-
अपने पहले कार्यकाल में ओली ने सार्वजनिक रूप से भारत की आलोचना की थी। 2015 में नेपाल में नया संघीय, लोकतांत्रिक संविधान अपनाए जाने के बाद तराई क्षेत्र में महीनों तक आंदोलन चला। भारतीय मूल के तराई निवासियों ने भेदभाव का आरोप लगाया था। इस मुद्दे को लेकर भारत-नेपाल संबंध में तनाव पैदा हो गया, लेकिन ओली नेपाल-भारत प्रमुख व्यक्ति समूह गठित करने पर सहमत हो गए थे। दूसरी बार सत्ता संभालने से पहले ओली ने देश की आर्थिक समृद्धि के लिए भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने का वादा किया, लेकिन नेपाल का नया राजनीतिक नक्शा जारी होने के बाद भारत के साथ संबंधों में खटास पैदा हो गई। नए नक्शे में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीन भारतीय क्षेत्रों को नेपाल का बताया गया था। जुलाई 2020 में ओली ने यह दावा किया था कि भारत ने राम को हड़प लिया है और असली अयोध्या नेपाल में है। ओली के इस दावे से भारत के असहज होने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था। 1952 में जन्मे ओली 12 साल की उम्र में ही राजनीति में आ गए। मार्क्स और लेनिन से प्रभावित थे तो कम्युनिस्ट राजनीति में सक्रिय हो गए। 14 वर्षों तक जेल में भी रहे। बाद में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) का गठन किया। लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चले ओली 1991 में एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी के नेता बने। 2006 से 2007 तक वे उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रहे। पहली बार 2015 में वह नेपाल के पीएम बने हालांकि 2016 में ही वह सरकार से बाहर हो गए। इसके बाद 2018 में फिर से एक बार वह पीएम बने। लेकिन ये सरकार भी 2021 तक ही चली। अब वह तीसरी बार पीएम बनने जा रहे हैं। नेपाली कांग्रेस के साथ भारत के अच्छे संबंध रहे हैं और नेपाली कांग्रेस ओली के साथ सरकार में शामिल होगी। ऐसे में दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे रहने की संभावना है। हालांकि ओली सरकार के कार्यकाल में ही विवादित नक्शा जारी किया गया था जिसके बाद भारी विवाद हुआ था।
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Author: AK
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