जहानाबाद। सावन की दूसरी सोमवारी के अवसर पर सोमवार को जहानाबाद के संगम घाट स्थित प्राचीन बाबा भोलेनाथ मंदिर में भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मंदिर के महंत, पुजारी एवं सेवकों की ओर से बाबा भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार पूजन किया गया। इस दौरान आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर बाबा का आशीर्वाद लिया।
मंदिर के पुजारी नरोतम पाठक ने बताया कि संगम घाट स्थित यह शिव मंदिर बेहद प्राचीन है और स्थानीय मान्यता के अनुसार इसे करीब 5 हजार वर्ष पुराना तथा द्वापर युग से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा कराया गया था। उन्होंने बताया कि मंदिर से जुड़ी कई प्राचीन मान्यताएं आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं। पुजारी ने बताया कि उनके पूर्वजों के अनुसार मंदिर के अंदर से एक गुप्त सुरंगनुमा रास्ता हुआ करता था, जो पहाड़ की गुफाओं की ओर निकलता था और एक रास्ता नालंदा की दिशा में जाता था। प्राचीन समय में लोग इस मार्ग का इस्तेमाल पूजा-पाठ के लिए आने-जाने में करते थे।
हालांकि, यह रास्ता कई वर्षों पहले बंद हो चुका है। स्थानीय लोगों का मानना है कि संगम घाट में पानी के बहाव और समय के साथ रास्ते की स्थिति बदलने के कारण अब इसका इस्तेमाल संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां विशेष श्रृंगार पूजन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। संगम घाट पर विशेष अवसरों पर आरती का आयोजन भी किया जाता है।
पुजारी नरेंद्र पाठक ने कहा कि मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। श्रद्धालु सच्चे मन से बाबा भोलेनाथ के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं और उनका विश्वास है कि बाबा उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। दो नदियों के संगम स्थल पर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
Jehanabad News: A large crowd of devotees thronged the Sangam Ghat Shiva temple on the second Monday of the month; ritualistic adornment and worship were performed.



















