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Sahil-Chikitha Win Asian Games Gold: सिर्फ एक शॉट बाकी था, फिर साहिल ने पलट दिया पूरा मैच

एशियन गेम्स 2026 में साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी ने शूट-ऑफ में दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड जीता। भारत के खाते में अब 54 पदक हैं। Sahil-Chikitha Win Asian Games Gold एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए एक और ऐसा मुकाबला आया, जहां जीत और हार के बीच सिर्फ एक शॉट का फासला था। … Read more

Sahil-Chikitha Win Asian Games Gold

एशियन गेम्स 2026 में साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी ने शूट-ऑफ में दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड जीता। भारत के खाते में अब 54 पदक हैं।

Sahil-Chikitha Win Asian Games Gold

एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए एक और ऐसा मुकाबला आया, जहां जीत और हार के बीच सिर्फ एक शॉट का फासला था। कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल में भारत की साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी की जोड़ी दक्षिण कोरिया के खिलाफ आखिरी शॉट तक दबाव में रही। चार सेट खत्म होने के बाद स्कोर 157-157 से बराबर था और गोल्ड मेडल का फैसला शूट-ऑफ से होना था।

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शूट-ऑफ में भी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। दोनों टीमों ने शानदार निशाने लगाए, लेकिन आखिर में दक्षिण कोरिया के पुरुष तीरंदाज का आखिरी शॉट 9 पर रह गया। भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और गोल्ड अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी ने भारत को Asian Games 2026 में आठवां गोल्ड मेडल दिलाया। ताजा पदक तालिका के अनुसार भारत के खाते में अब 54 पदक हैं।

जब लगा भारत हार जाएगा, तभी बदला पूरा मैच

कंपाउंड मिक्स्ड टीम फाइनल में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच मुकाबला शुरुआत से ही कड़ा रहा। भारतीय जोड़ी ने पहले दो सेट में 80-78 की बढ़त बना ली थी। उस समय लग रहा था कि साहिल और चिकिता गोल्ड की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

लेकिन तीरंदाजी में छोटी सी गलती भी पूरा मुकाबला बदल सकती है।

तीसरे सेट में दक्षिण कोरिया ने वापसी की और भारत की बढ़त घटकर सिर्फ एक अंक रह गई। तीसरे सेट के बाद भारत 118-117 से आगे था। यानी मुकाबला अब बेहद करीबी हो चुका था।

इसके बाद आया चौथा और निर्णायक सेट।

दक्षिण कोरिया ने आखिरी सेट में शानदार निशाने लगाए और 20 का परफेक्ट स्कोर हासिल किया। इससे भारतीय जोड़ी पर दबाव बढ़ गया। चिकिता तानिपार्थी अपने शॉट में 9 अंक ही हासिल कर सकीं।

अब सारी उम्मीद साहिल जाधव के आखिरी शॉट पर टिक गई थी।

अगर साहिल 10 अंक हासिल नहीं करते, तो भारत को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ता। लेकिन साहिल ने दबाव के उस क्षण में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और आखिरी शॉट पर 10 अंक हासिल कर लिए।

भारत ने स्कोर 157-157 कर दिया।

मुकाबला अब शूट-ऑफ में पहुंच चुका था।

साहिल के आखिरी शॉट ने बचाया गोल्ड

शूट-ऑफ किसी भी तीरंदाज के लिए बेहद दबाव वाला चरण होता है। यहां पूरे मुकाबले की मेहनत कुछ ही शॉट में तय हो सकती है।

भारत और दक्षिण कोरिया दोनों को दो-दो शॉट मिले। शुरुआत में दोनों टीमों की ओर से 10 अंक के शॉट आए। इससे मुकाबला और भी रोमांचक हो गया।

साहिल ने भी 10 का शानदार निशाना लगाया। दक्षिण कोरिया की महिला तीरंदाज ने भी 10 अंक हासिल किए, लेकिन उनका तीर केंद्र के ज्यादा करीब था। ऐसे में अगर अगले शॉट के बाद स्कोर बराबर रहता, तो सेंटर से दूरी के आधार पर फैसला हो सकता था।

अब सबकी निगाहें दक्षिण कोरिया के पुरुष तीरंदाज चोई योंगही पर थीं।

उनके पास भारत से गोल्ड छीनने का मौका था। अगर वह 10 अंक हासिल करते, तो दक्षिण कोरिया के पक्ष में मुकाबला जा सकता था। लेकिन निर्णायक क्षण में उनका निशाना 9 अंक पर रह गया।

यहीं भारत की जीत तय हो गई।

साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी ने शूट-ऑफ में बाजी मारते हुए भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत लिया। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि भारतीय जोड़ी मुकाबले के अंतिम चरण में हार की कगार पर पहुंच गई थी, लेकिन साहिल के शानदार आखिरी शॉट ने मुकाबले को बराबरी पर ला दिया और फिर शूट-ऑफ में भारत ने बाजी मार ली।

क्या होता है शूट-ऑफ का नियम?

तीरंदाजी के इस मुकाबले को समझने के लिए शूट-ऑफ के नियम को समझना भी जरूरी है।

जब निर्धारित सेटों के बाद दोनों टीमों का स्कोर बराबर होता है, तो विजेता तय करने के लिए शूट-ऑफ कराया जाता है। इसमें तीरंदाजों को अतिरिक्त शॉट दिए जाते हैं और बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम को जीत मिलती है।

अगर शूट-ऑफ में भी स्कोर बराबर रहता है, तो तीर के लक्ष्य के केंद्र से कितनी दूरी है, यह देखा जा सकता है। जिस खिलाड़ी या टीम का तीर केंद्र के सबसे करीब होता है, उसे निर्णायक बढ़त मिलती है।

यही वजह थी कि दक्षिण कोरिया की महिला तीरंदाज के 10 अंक हासिल करने के बाद भी भारतीय टीम पर दबाव बना रहा। हालांकि अंत में चोई के 9 अंक ने भारत के लिए रास्ता साफ कर दिया।

साहिल और चिकिता की जोड़ी ने रचा इतिहास

साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी की यह जीत सिर्फ एक और पदक नहीं है। इस स्वर्ण पदक के साथ भारत ने कंपाउंड तीरंदाजी में अपनी मजबूत स्थिति को और पुख्ता किया है।

इससे पहले भी भारत ने एशियन गेम्स 2026 में कंपाउंड तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन किया है। महिला कंपाउंड टीम ने भी गोल्ड मेडल जीता और अब मिक्स्ड टीम की जीत ने भारतीय तीरंदाजी अभियान को और मजबूत कर दिया।

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक साहिल और चिकिता की जीत भारत के लिए 2028 Los Angeles Olympics के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इस स्वर्ण पदक के साथ भारत ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम में LA28 के लिए एक क्वोटा स्थान हासिल किया है।

यह उपलब्धि इसलिए अहम है क्योंकि एशियन गेम्स में प्रदर्शन कई खिलाड़ियों के लिए ओलंपिक की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव बन सकता है।

चिकिता के लिए एक और बड़ी उपलब्धि

चिकिता तानिपार्थी के लिए एशियन गेम्स 2026 बेहद खास साबित हो रहा है। वह पहले भी भारतीय कंपाउंड तीरंदाजी टीम का हिस्सा रही हैं और इस प्रतियोगिता में लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं।

महिला कंपाउंड टीम में चिकिता ने ज्योति सुरेखा वेन्नम और पृथिका प्रदीप के साथ मिलकर भारत को गोल्ड दिलाया। इसके बाद मिक्स्ड टीम में साहिल जाधव के साथ उनकी जोड़ी ने दक्षिण कोरिया को हराकर दूसरा गोल्ड हासिल किया।

यानी एक ही दिन चिकिता के खाते में दो एशियन गेम्स गोल्ड आ गए।

महिला कंपाउंड टीम ने फाइनल में चीन को 238-234 से हराया था। उस मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार स्कोर किया और अपने खिताब का बचाव भी किया।

साहिल के लिए भी खास रहा यह गोल्ड

साहिल जाधव ने भी एशियन गेम्स 2026 में कंपाउंड तीरंदाजी में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। पुरुष कंपाउंड टीम में भी वह भारतीय दल का हिस्सा रहे हैं।

क्वालिफिकेशन चरण में साहिल ने 709 अंक हासिल किए थे और भारतीय टीम ने पुरुष कंपाउंड टीम क्वालिफिकेशन में तीसरा स्थान हासिल किया था।

मिक्स्ड टीम फाइनल में उनका सबसे बड़ा योगदान दबाव के क्षण में सामने आया। जब भारत को मुकाबले में बने रहने के लिए 10 अंक की जरूरत थी, तब साहिल ने वही शॉट लगाया।

यही शॉट मुकाबले को शूट-ऑफ तक लेकर गया।

अगर उस समय साहिल 9 अंक हासिल करते, तो मुकाबला वहीं खत्म हो सकता था। लेकिन उनके 10 अंक ने भारतीय टीम को एक और मौका दिया और शूट-ऑफ में जीत की कहानी लिखी गई।

भारत के खाते में अब 54 मेडल

साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी की जीत के साथ भारत ने एशियन गेम्स 2026 में 54 पदकों का आंकड़ा छू लिया है।

उपलब्ध ताजा पदक आंकड़ों के अनुसार भारत के खाते में अब:

  • 8 गोल्ड मेडल
  • 21 सिल्वर मेडल
  • 25 ब्रॉन्ज मेडल
  • कुल 54 मेडल

हो चुके हैं।

इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में नौवें स्थान तक पहुंच गया है। दिन की शुरुआत में भी भारतीय तीरंदाजों ने गोल्ड दिलाया था और अब मिक्स्ड टीम के गोल्ड ने भारत के पदकों की संख्या को और बढ़ा दिया।

यानी एशियन गेम्स 2026 के 12वें दिन भारत के लिए तीरंदाजी सबसे बड़ा पदक स्रोत बनकर सामने आई।

आर्चरी में भारत का दबदबा

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय तीरंदाजों का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। कंपाउंड कैटेगरी में भारत ने महिला टीम और मिक्स्ड टीम दोनों में गोल्ड जीतकर अपनी ताकत दिखाई है।

महिला कंपाउंड टीम में ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप और चिकिता तानिपार्थी ने चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद चिकिता और साहिल की जोड़ी ने मिक्स्ड टीम में दक्षिण कोरिया को मात दी।

इससे भारतीय आर्चरी टीम के लिए यह दिन यादगार बन गया।

खास बात यह है कि दोनों फाइनल में भारतीय खिलाड़ियों को अलग-अलग तरह की चुनौती का सामना करना पड़ा। महिला टीम फाइनल में भारत ने चीन पर शुरुआत से दबाव बनाए रखा, जबकि मिक्स्ड टीम फाइनल में मुकाबला आखिरी शॉट तक चला।

एक दिन में दो गोल्ड, भारत की पदक रफ्तार तेज

एशियन गेम्स में भारत के लिए तीरंदाजी का यह प्रदर्शन ऐसे समय आया है जब पदक तालिका में शीर्ष 10 में बने रहने की कोशिश जारी है।

पहले महिला कंपाउंड टीम ने गोल्ड जीता और फिर साहिल-चिकिता की जोड़ी ने मिक्स्ड टीम का फाइनल अपने नाम किया। इस तरह आर्चरी ने भारत के खाते में एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जोड़ दिए।

भारत की कुल पदक संख्या अब 54 हो चुकी है। इससे पहले नीरू ढांडा और महिला 4×400 मीटर रिले टीम की जीत ने भारत के पदक अभियान को गति दी थी। ताजा आंकड़ों के मुताबिक एथलेटिक्स भारत के कुल पदकों में बड़ा योगदान दे रहा है, जबकि शूटिंग और आर्चरी से भी महत्वपूर्ण गोल्ड मिल रहे हैं।

सबसे यादगार रहा आखिरी शॉट

साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी की जीत को अगर एक पल में याद किया जाए तो वह साहिल का आखिरी शॉट होगा।

भारत 156 के आसपास के स्कोर पर दबाव में था। दक्षिण कोरिया ने निर्णायक चरण में शानदार निशाना लगाया था। चिकिता का 9 अंक का शॉट भारत को मुश्किल स्थिति में ले गया। लेकिन साहिल ने 10 अंक हासिल कर मुकाबले को 157-157 पर ला दिया।

इसके बाद शूट-ऑफ हुआ और भारत ने आखिरकार गोल्ड जीत लिया।

यही इस मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी है—भारत ने सिर्फ एक फाइनल नहीं जीता, बल्कि उस समय जीत हासिल की जब मुकाबला लगभग हाथ से निकलता दिखाई दे रहा था।

साहिल और चिकिता की यह जीत भारतीय आर्चरी के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है। 2026 एशियन गेम्स में भारत का India Archery Gold अभियान अब और मजबूत हो गया है। साथ ही, LA28 कोटा की उपलब्धि ने इस स्वर्ण को और खास बना दिया है।

एशियन गेम्स अभी जारी हैं, इसलिए भारत के पदकों की संख्या आने वाले मुकाबलों में और बढ़ सकती है। लेकिन साहिल जाधव और चिकिता तानिपार्थी का यह गोल्ड लंबे समय तक याद रहेगा—क्योंकि यह जीत सिर्फ अच्छे निशानों से नहीं, बल्कि आखिरी क्षण तक हार न मानने के जज्बे से मिली है।

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AK
Author: AK

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