गुरु, अप्रैल 16, 2026

Jaipur SMS Hospital Fire: जयपुर SMS अस्पताल ट्रॉमा सेंटर में आग, 8 की मौत

Jaipur SMS Hospital Fire: 8 Dead in ICU Blaze

जयपुर के SMS अस्पताल ट्रॉमा सेंटर में देर रात आईसीयू में लगी भीषण आग से अफरा-तफरी मच गई। हादसे में 8 मरीजों की मौत हुई।

Jaipur SMS Hospital Fire: 8 Dead in ICU Blaze


जयपुर के SMS अस्पताल ट्रॉमा सेंटर में लगी आग: बड़ा हादसा

राजस्थान की राजधानी जयपुर से रविवार देर रात एक भयावह खबर सामने आई। सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अस्पताल के आईसीयू (ICU) में लगी इस भीषण आग ने कुछ ही देर में जानलेवा रूप ले लिया और 8 गंभीर मरीजों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा न सिर्फ अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है बल्कि राज्यभर में स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोलता है।


हादसा कैसे हुआ?

शॉर्ट सर्किट बताई जा रही प्राथमिक वजह

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। घटना रविवार देर रात लगभग 11:20 बजे दूसरी मंजिल पर स्थित ट्रॉमा सेंटर के ICU में हुई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते धुआं पूरे वार्ड में भर गया और मरीज दम घुटने से चीखने लगे।

स्टाफ की लापरवाही का आरोप

घटना के समय वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आग लगने की सूचना समय रहते ICU स्टाफ और वार्ड बॉय को दी गई थी, लेकिन उन्होंने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया। कुछ परिजनों का कहना है कि स्टाफ मौके से भाग खड़ा हुआ, जिसके कारण आग पर नियंत्रण करने में काफी देर हुई।


मौत और अफरा-तफरी का मंजर

चीख-पुकार से गूंजा अस्पताल

आग लगने के बाद ICU में भर्ती गंभीर मरीजों की हालत बिगड़ गई। धुएं और जलन से कई मरीजों ने दम तोड़ दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पूरा वार्ड चीख-पुकार और अफरा-तफरी से गूंज उठा था। आग बुझाने में जुटी दमकल टीम ने रात करीब 1 बजे आग पर काबू पाया।

8 मरीजों की मौत की पुष्टि

SMS मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि हादसे में 8 लोगों की मौत हो चुकी है। मौत का कारण जलने और धुएं से दम घुटने को बताया जा रहा है।


बचाव कार्य और प्रशासन की कार्रवाई

दमकल ने बचाई कई जानें

आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल की आधा दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक ICU में मौजूद कई मरीजों की जान जा चुकी थी।

सड़क पर इलाज का दृश्य

अस्पताल के बाहर सड़क पर ही मरीजों के बिस्तर और स्ट्रेचर लगा दिए गए। डॉक्टरों और नर्सों ने खुले में ही मरीजों का इलाज शुरू किया। कई मरीजों की आंखों में बीमारी से ज्यादा डर साफ झलक रहा था।


सबसे बड़ा ट्रॉमा सेंटर और सबसे बड़ा हादसा

सवाई मानसिंह अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर राजस्थान का सबसे बड़ा ट्रॉमा सेंटर माना जाता है। यहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में ICU जैसे संवेदनशील विभाग में आग लगना न सिर्फ दुखद है, बल्कि यह गंभीर लापरवाही का भी उदाहरण है।


मरीजों और परिजनों का गुस्सा

इलाज न मिलने की शिकायत

बौंली (सवाई माधोपुर) से आए दिगंबर वर्मा के परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद मरीज को समय पर इलाज नहीं मिला और उसने अस्पताल पहुंचने से पहले ही सड़क पर दम तोड़ दिया।

दस्तावेज जलने का नुकसान

परिजनों ने यह भी बताया कि आग और पानी की वजह से मरीजों से जुड़े दस्तावेज जल गए या खराब हो गए। इससे मरीजों की पहचान और इलाज से संबंधित जानकारी का बड़ा नुकसान हुआ है।


स्वास्थ्य सुरक्षा पर सवाल

आग सुरक्षा मानकों की अनदेखी

यह हादसा एक बार फिर अस्पतालों में फायर सेफ्टी (Fire Safety) व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर नियमित रूप से फायर ऑडिट और मॉक ड्रिल होनी चाहिए। लेकिन SMS अस्पताल जैसी बड़ी संस्था में ऐसी चूक होना गहरी चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञ मानते हैं कि ICU जैसे विभाग में इलेक्ट्रिकल उपकरणों का इस्तेमाल ज्यादा होता है। यहां हर समय ऑक्सीजन सप्लाई और मशीनें चलती रहती हैं। ऐसे में शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। यदि नियमित जांच और सुरक्षा उपकरण दुरुस्त रखे जाते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।


भविष्य के लिए सबक

सख्त नियमों की जरूरत

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को तुरंत इस घटना की जांच करानी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही सभी बड़े अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।

जागरूकता और प्रशिक्षण

अस्पताल स्टाफ को समय-समय पर आग से बचाव का प्रशिक्षण (Training) दिया जाना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके। साथ ही मरीजों और परिजनों को भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की जानकारी दी जानी चाहिए।


निष्कर्ष

जयपुर के SMS अस्पताल ट्रॉमा सेंटर में लगी आग ने 8 निर्दोष मरीजों की जान ले ली। यह घटना न केवल एक त्रासदी है बल्कि अस्पतालों की लापरवाही और फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी का परिणाम भी है। अब यह समय है कि स्वास्थ्य संस्थान सुरक्षा को प्राथमिकता दें और सरकार सख्त नियम लागू करे। तभी भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सकेगा।


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Author: AK

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