बुध, अप्रैल 15, 2026

Heavy Rain in Uttarakhand: उत्तराखंड में मूसलधार बारिश का कहर – चमोली में स्कूल बंद, केदारनाथ यात्रा ठप

Heavy Rain in Uttarakhand: Schools Closed, Kedarnath Yatra Halted

उत्तराखंड के चमोली जिले में भारी बारिश से जनजीवन ठप, स्कूल बंद, बिजली गुल, बदरीनाथ और केदारनाथ हाईवे बाधित, 50 सड़कों पर आवाजाही बंद।

Heavy Rain in Uttarakhand: Schools Closed, Kedarnath Yatra Halted


उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: जीवन हुआ अस्त-व्यस्त

उत्तराखंड में इन दिनों प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही मूसलधार बारिश से पर्वतीय जिलों में हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। खासकर चमोली जिले में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि स्कूलों को बंद करना पड़ा, बिजली गुल हो गई और केदारनाथ यात्रा को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

पर्वतीय इलाकों में बारिश के साथ मलबा गिरने और भूस्खलन जैसी घटनाओं ने प्रशासन और आम जनता को सतर्क कर दिया है। राज्य में दो राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कुल 50 सड़कें बंद हो चुकी हैं जिससे यातायात व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। आइए जानते हैं उत्तराखंड में बारिश से जुड़े घटनाक्रम, जनजीवन पर असर और प्रशासन की तैयारी के बारे में विस्तार से।


चमोली में बारिश से तबाही: स्कूलों की छुट्टी और बिजली गुल

विद्यालयों में घोषित हुआ अवकाश

मौसम विभाग द्वारा जारी भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी के बाद चमोली जिले में सोमवार को सरकारी और अर्द्धसरकारी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया। मुख्य शिक्षा अधिकारी के आदेश के बाद यह निर्णय लिया गया ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विद्युत आपूर्ति पर पड़ा प्रभाव

चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में 66 केवी की विद्युत लाइन में फॉल्ट आने से रात से ही पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप पड़ी है। पिटकुल (PITCUL) की टीमें फॉल्ट को खोजने और सुधारने में जुटी हैं। बारिश के बीच तकनीकी कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं जिससे बहाली में देरी हो रही है।


केदारनाथ यात्रा रोकी गई: यात्रियों को सोनप्रयाग में रोका गया

केदारनाथ धाम जाने वाले हज़ारों तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी खबर है। भारी बारिश के कारण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई है। प्रशासन ने यात्रियों को सोनप्रयाग और गौरीकुंड में ही रोक दिया है और आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई।

बदरीनाथ हाईवे भी प्रभावित

बदरीनाथ हाईवे पर उमट्टा क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मलबा गिरने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया था। हालांकि, नंदप्रयाग के पर्थाडीप के पास मार्ग को एक घंटे में साफ कर दिया गया। उमट्टा में अभी भी मलबा हटाने का कार्य जारी है।


50 सड़कें बंद, दो राष्ट्रीय राजमार्ग भी प्रभावित

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के कई जिलों में सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

देहरादून में बाधित मार्ग

  • विकासनगर-कालसी-बड़कोट राष्ट्रीय राजमार्ग लखवाड़ बैंड के पास मलबा आने के कारण बंद है।
  • जिले की तीन ग्रामीण सड़के भी बंद हैं।

उत्तरकाशी में यमुनोत्री मार्ग ठप

  • ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग औजरी में मलबा गिरने से बंद है।
  • उत्तरकाशी जिले में 1 राज्य मार्ग और 11 ग्रामीण सड़कों पर भी यातायात बंद है।

अन्य जिलों में भी परेशानी

  • चमोली जिले में 13 ग्रामीण सड़कें,
  • पिथौरागढ़ में 7,
  • बागेश्वर में 4,
  • पौड़ी में 3,
  • टिहरी में 2 सड़कें बंद हो चुकी हैं।

आपदा से अब तक 143 भवनों को नुकसान

भवनों को हुआ आंशिक और गंभीर नुकसान

1 जून 2025 से अब तक उत्तराखंड में 143 भवनों को नुकसान पहुंचा है। इनमें से:

  • 133 भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त,
  • 8 भवनों को गंभीर नुकसान,
  • 2 भवन पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

जनहानि और लापता लोग

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार:

  • अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है,
  • 11 लोग घायल,
  • 9 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

प्रशासन की तैयारी और राहत कार्य

राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राजस्व, पुलिस, NDRF और SDRF की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात की गई हैं।

हेल्पलाइन और अलर्ट सिस्टम

  • जिलाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
  • सभी जिलों में हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किए गए हैं।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

यात्री और स्थानीयों को निर्देश

  • अनावश्यक यात्रा से बचें।
  • मौसम पूर्वानुमान देखें और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।
  • सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था की जाए।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी: अगले 48 घंटे अहम

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटे अत्यंत संवेदनशील हो सकते हैं।

  • चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और टिहरी में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।
  • इन इलाकों में भूस्खलन और नदी-नालों के उफान पर रहने की चेतावनी दी गई है।

निष्कर्ष: सावधानी ही सुरक्षा है

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में हर साल मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाएं एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती हैं। इस बार भी चमोली समेत कई जिलों में हालात गंभीर हैं। जनता और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वे सतर्कता और सहयोग से हालात को संभालें।

जब तक मौसम सामान्य न हो, तब तक गैर-जरूरी यात्रा से बचना ही समझदारी है। सरकार की ओर से राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही हालात नियंत्रण में आ जाएंगे।


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Author: AK

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