गणेश चतुर्थी 2026 पर जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, 21 दूर्वा और मोदक का भोग, मंत्र जाप और आरती से जुड़ी खास बातें।
Ganesh Chaturthi 2026: Puja Muhurat

गणपति बप्पा के स्वागत का इंतजार कर रहे भक्तों के लिए गणेश चतुर्थी 2026 बेहद खास होने वाली है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणेश जी की आराधना करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और शुभ कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भक्त पूजा-अर्चना करते हैं, गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करते हैं और आरती के बाद प्रसाद बांटते हैं।
Ganesh Chaturthi 2026 को लेकर इस बार भी भक्तों में खास उत्साह है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन गणपति जी की मूर्ति स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष शुभ माना गया है।
गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन घर में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करके विधि-विधान से पूजा की जाएगी।
दिए गए तिथि विवरण के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और 15 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी।
गणेश चतुर्थी की पूजा चतुर्थी तिथि में करना महत्वपूर्ण माना जाता है। खास तौर पर मध्याह्न काल में भगवान गणेश की पूजा और मूर्ति स्थापना की परंपरा है।
गणेश चतुर्थी 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
- गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026, सोमवार
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर, सुबह 7:44 बजे
- मूर्ति स्थापना एवं पूजा का शुभ समय: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
- मुहूर्त की अवधि: लगभग 2 घंटे 29 मिनट
स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा के समय में थोड़ा अंतर संभव हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना भी उचित रहेगा।
गणपति मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त
Ganesh Idol Sthapana के लिए 14 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है।
इस दौरान भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को घर के पूजा स्थान पर स्थापित कर सकते हैं। मूर्ति स्थापना से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए।
गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि परिवार में प्राण प्रतिष्ठा की विशेष परंपरा है तो किसी योग्य पंडित या जानकार व्यक्ति की सहायता ली जा सकती है।
VIDEO | Mumbai: Devotees gather to offer prayers at Siddhivinayak Temple on the occasion of Ganesh Chaturthi.
— Press Trust of India (@PTI_News) September 14, 2026
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/pvVHkkjpYt
गणेश जी की मूर्ति स्थापना कैसे करें?
गणपति स्थापना के लिए सबसे पहले घर में साफ और शांत स्थान चुनें। पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करने के बाद वहां चौकी रखें।
चौकी को कैसे सजाएं?
एक साफ चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाया जा सकता है। इसके ऊपर अक्षत यानी चावल रखें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी करें।
मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय चौकी पर स्थापित करने की परंपरा है। गणेश जी की प्रतिमा का मुख किस दिशा में हो, इसे लेकर परिवार और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं।
कलश स्थापना करें
गणेश जी की प्रतिमा के पास कलश स्थापित किया जा सकता है। इसके लिए तांबे या पीतल के कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।
कलश के ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल स्थापित किया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर विराजमान करें।
भगवान गणेश का आह्वान
मूर्ति स्थापित करने के बाद भगवान गणेश का ध्यान करें। हाथ में अक्षत और फूल लेकर गणपति बप्पा का आह्वान किया जा सकता है।
इस दौरान श्रद्धालु “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके बाद गणेश जी को जल, चंदन, अक्षत, फूल, दूर्वा और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।
गणेश जी को क्या अर्पित करें?
भगवान गणेश की पूजा में कई वस्तुओं को महत्वपूर्ण माना गया है। इनमें दूर्वा, लाल फूल, चंदन, अक्षत और मोदक प्रमुख हैं।
21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा
गणेश जी को दूर्वा विशेष प्रिय मानी जाती है। गणेश चतुर्थी की पूजा में 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा कई स्थानों पर है।
दूर्वा अर्पित करते समय भगवान गणेश का ध्यान करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना करें। पूजा सामग्री की संख्या या विधि में क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।
लाल फूल और शमी पत्र
गणेश जी को लाल फूल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके अलावा शमी पत्र भी पूजा में चढ़ाया जाता है।
पूजा के दौरान धूप और दीप जलाकर भगवान गणेश की आराधना करें। इसके बाद उन्हें नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
गणपति बप्पा को कौन सा भोग लगाएं?
गणेश चतुर्थी की पूजा मोदक के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक परंपरा में मोदक को भगवान गणेश का प्रिय भोग बताया गया है।
भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगा सकते हैं। दिए गए पूजा विवरण में 21 मोदक या लड्डू अर्पित करने की परंपरा बताई गई है।
इसके अलावा केला, नारियल और दूसरे मौसमी फलों का भोग भी लगाया जा सकता है।
घर के बने पकवान भी कर सकते हैं अर्पित
गणेश जी को घर पर बनाए गए सात्विक पकवानों का भोग लगाने की भी परंपरा है। भोग में साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
भोग लगाने के बाद उसे कुछ समय के लिए भगवान को अर्पित रहने दें। इसके बाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में प्रसाद बांटा जा सकता है।

पूजा के बाद करें मंत्र जाप
गणेश जी की पूजा पूरी करने के बाद मंत्र जाप किया जा सकता है। “ॐ गं गणपतये नमः” भगवान गणेश से जुड़ा प्रमुख मंत्र है।
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं। इसके बाद गणेश चालीसा या भगवान गणेश से संबंधित अन्य स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है।
मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखें और भगवान गणेश का ध्यान करें। धार्मिक पूजा में केवल सामग्री ही नहीं बल्कि श्रद्धा और एकाग्रता को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
गणेश जी की आरती कैसे करें?
पूजा और मंत्र जाप के बाद भगवान गणेश की आरती की जाती है। परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल हो सकते हैं।
गणेश जी की प्रसिद्ध आरती “जय गणेश जय गणेश देवा” से शुरू होती है। इसमें भगवान गणेश को माता पार्वती और भगवान महादेव के पुत्र के रूप में नमन किया जाता है।
आरती के दौरान दीपक भगवान गणेश के सामने घुमाया जाता है। आरती पूरी होने के बाद सभी लोग भगवान गणेश से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
इसके बाद भक्तों को प्रसाद दिया जाता है।
गणेश चतुर्थी पर किन बातों का ध्यान रखें?
गणेश चतुर्थी केवल पूजा का पर्व नहीं बल्कि पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा अवसर भी बन गया है। गणेश जी की प्रतिमा खरीदते समय पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता देना अच्छा विकल्प हो सकता है।
मिट्टी की प्रतिमा क्यों बेहतर विकल्प है?
मिट्टी से बनी प्रतिमा विसर्जन के बाद अपेक्षाकृत आसानी से प्राकृतिक रूप से घुल सकती है। वहीं कुछ अन्य सामग्रियों से बनी मूर्तियों से जल स्रोतों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
इसलिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन व्यवस्था और पर्यावरण संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व
भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभता का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ी है।
गणेश चतुर्थी के दौरान भक्त भगवान गणेश से जीवन के संकट और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। परिवार के लोग एक साथ पूजा करते हैं और प्रसाद बांटते हैं।
यह पर्व परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने का भी अवसर देता है। घरों के अलावा अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक गणेश पंडाल लगाए जाते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
घर पर गणेश पूजा का पूरा क्रम
अगर आप इस साल घर पर गणपति बप्पा की स्थापना करने जा रहे हैं तो पूजा का सामान्य क्रम इस तरह रखा जा सकता है:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल को साफ करें।
- चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- कलश स्थापित करें।
- भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर विराजमान करें।
- गणेश जी का आह्वान करें।
- चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें।
- 21 दूर्वा चढ़ाएं।
- धूप और दीप जलाएं।
- मोदक, लड्डू और फलों का भोग लगाएं।
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
- गणेश चालीसा या संबंधित स्तोत्र का पाठ करें।
- भगवान गणेश की आरती करें।
- परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- प्रसाद का वितरण करें।
यह सामान्य पूजा क्रम है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में गणेश पूजा की विधि और परंपराएं अलग हो सकती हैं।
गणपति बप्पा से करें सुख-समृद्धि की प्रार्थना
गणेश चतुर्थी का दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान गणेश का स्वागत करने का अवसर है। 14 सितंबर 2026 को गणपति बप्पा की स्थापना के लिए दिए गए शुभ मुहूर्त के अनुसार सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक का समय विशेष बताया गया है।
इस दिन भक्त भगवान गणेश को दूर्वा, फूल, मोदक और लड्डू अर्पित करके पूजा कर सकते हैं। मंत्र जाप और आरती के बाद परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
धार्मिक मान्यता चाहे जो हो, गणेश चतुर्थी का मूल संदेश सकारात्मकता, बुद्धि, संयम और शुभ शुरुआत से जुड़ा है। इसलिए इस पर्व को श्रद्धा के साथ मनाने के साथ स्वच्छता, पर्यावरण और स्थानीय नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए।
गणपति बप्पा के आगमन के साथ घर में उत्सव का माहौल बनता है और भक्त पूरे मन से यही प्रार्थना करते हैं कि भगवान गणेश उनके जीवन से सभी बाधाओं को दूर करें और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखें।
Author: AK
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