चुनाव आयोग ने SIR पूरा होने वाले राज्यों में Form 6 से Annexure-D हटाने का फैसला किया है। नए वोटरों को अब अतिरिक्त घोषणा पत्र नहीं देना होगा।
ECI Form 6 Big Decision: Annexure-D Removed
देश में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चल रही बहस के बीच चुनाव आयोग ने Form 6 को लेकर अहम फैसला लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए मतदाताओं के लिए Form 6 के साथ अलग से Annexure-D घोषणा पत्र देना जरूरी नहीं होगा। इससे नए वोटरों के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हो गई है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से ECI Form 6 और उसके साथ जुड़े अतिरिक्त घोषणा पत्र को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने वाले लोगों के बीच चर्चा तेज थी। Form 6 वह सामान्य कानूनी फॉर्म है जिसके जरिए पात्र नागरिक पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करते हैं।
आयोग के अनुसार, SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र स्थायी तौर पर Form 6 का हिस्सा नहीं है। यह आवश्यकता SIR की विशेष प्रक्रिया के संदर्भ में लागू की गई थी। SIR पूरा होने के बाद सामान्य नियमों के अनुसार Form 6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या है चुनाव आयोग का नया फैसला?
चुनाव आयोग ने कहा है कि जिन राज्यों में SIR 2026 की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ऑनलाइन Form 6 से SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया गया है। इसका मतलब यह है कि ऐसे राज्यों में नया मतदाता बनने के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को सामान्य Form 6 भरना होगा और SIR से संबंधित अलग Annexure-D नहीं देना होगा।
ECI की आधिकारिक व्यवस्था में Form 6 नए मतदाता के नाम को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आयोग के Voter Services Portal पर भी नए मतदाता के पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
हालांकि, जिन राज्यों या क्षेत्रों में SIR अभी चल रही है, वहां SIR से संबंधित अतिरिक्त प्रक्रिया लागू रह सकती है। इसलिए किसी आवेदक के लिए यह देखना जरूरी होगा कि उसके क्षेत्र में SIR की स्थिति क्या है और उस समय ECI के पोर्टल पर कौन-सी आवश्यकताएं दिखाई जा रही हैं।
STORY | EC withdraws SIR declaration from Form 6 in states where exercise is over
— Press Trust of India (@PTI_News) September 30, 2026
The Election Commission has withdrawn the additional SIR-related declaration from the online voter enrolment Form 6 in states where the Special Intensive Revision of electoral rolls has been… pic.twitter.com/FiFk75mX36
SIR पूरा होने के बाद क्या बदलेगा?
सबसे बड़ा बदलाव यही है कि SIR पूरी हो चुकी जगहों पर नए मतदाता को Form 6 के साथ SIR वाला अतिरिक्त declaration देने की जरूरत नहीं होगी।
यानी सामान्य मतदाता पंजीकरण और विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण को अलग-अलग प्रक्रिया के रूप में देखा जाएगा।
आयोग की ओर से पहले भी यह स्पष्ट किया गया था कि अतिरिक्त घोषणा पत्र SIR की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। हालिया फैसले के बाद इसे उन जगहों पर Form 6 की सामान्य प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है, जहां संबंधित SIR पूरा हो चुका है।
Annexure-D क्या था और इसे लेकर विवाद क्यों हुआ?
Annexure-D एक अतिरिक्त घोषणा पत्र था, जिसे SIR प्रक्रिया के दौरान Form 6 या कुछ मामलों में Form 8 के साथ जोड़ा गया था। इसमें आवेदक को अपनी नागरिकता, जन्म और परिवार से जुड़ी कुछ जानकारी घोषित करनी होती थी। ECI के आधिकारिक दस्तावेज में Annexure-D को Form 6/8 के साथ नए मतदाता के नामांकन या राज्य के बाहर से स्थानांतरण से जुड़े SIR संदर्भ में रखा गया है।
इसका एक उद्देश्य नए मतदाता को पहले की मतदाता सूची में मौजूद पारिवारिक रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाना था। अलग-अलग उम्र और जन्म की परिस्थितियों के आधार पर इसमें व्यक्ति, माता-पिता या कुछ मामलों में अन्य पारिवारिक विवरणों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।
यही अतिरिक्त जानकारी राजनीतिक बहस का विषय बन गई।
कुछ राजनीतिक दलों ने सवाल उठाया कि सामान्य रूप से मतदाता बनने की प्रक्रिया में इस तरह की अतिरिक्त घोषणा क्यों जरूरी की जा रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इसे SIR की विशेष प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यकता बताया।
सितंबर 2026 में इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने के बाद आयोग ने अपने रुख को स्पष्ट किया और कहा कि SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को सामान्य Form 6 प्रक्रिया के साथ स्थायी रूप से नहीं जोड़ा गया है। हालिया रिपोर्टों में भी आयोग की ओर से यह स्पष्टीकरण सामने आया कि Form 6 में मूल बदलाव नहीं किया गया था और अतिरिक्त declaration SIR के संदर्भ में था।

नए वोटरों के लिए इसका क्या मतलब है?
किसी भी लोकतंत्र में मतदाता सूची में नाम दर्ज होना नागरिक की चुनावी भागीदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया जितनी स्पष्ट होगी, उतना ही उन्हें प्रक्रिया समझने में आसानी होगी।
नए फैसले के बाद जिन क्षेत्रों में SIR पूरा हो चुका है, वहां पात्र आवेदक को सामान्य Form 6 voter registration प्रक्रिया का पालन करना होगा।
इसका सीधा अर्थ है कि उसे SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा की जरूरत नहीं होगी।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बिना किसी जानकारी या सत्यापन के कोई भी व्यक्ति मतदाता बन सकता है। सामान्य कानूनी पात्रता और Form 6 में मांगी जाने वाली जानकारी पहले की तरह महत्वपूर्ण रहेगी।
कौन भरता है Form 6?
Form 6 मुख्य रूप से उस व्यक्ति के लिए है जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना चाहता है और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए पात्र है।
आम तौर पर आवेदन में नाम, जन्म तिथि, पता और अन्य जरूरी विवरण देने होते हैं। आवेदन की जांच संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की प्रक्रिया के तहत होती है।
इसलिए Annexure-D हटने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता पंजीकरण की पूरी जांच प्रक्रिया समाप्त हो गई है। बदलाव केवल SIR से जुड़े अतिरिक्त declaration को लेकर है।
चुनाव आयोग ने यह फैसला कब लिया?
यह निर्णय चुनाव आयोग के भीतर हुई हालिया चर्चा के बाद सामने आया। सितंबर 2026 में आयोग की बैठक के बाद यह बात सामने आई कि Form 6 से जुड़ा अतिरिक्त declaration विशेष रूप से SIR के दौरान लागू था।
चुनाव आयोग की मौजूदा टीम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। ECI की आधिकारिक Officers Directory भी इन तीनों को वर्तमान आयोग के सदस्यों के रूप में सूचीबद्ध करती है।
आयोग ने SIR को लेकर अपने हालिया फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिया है। हालिया रिपोर्टों में आयोग ने निर्णयों को लेकर किसी आंतरिक मतभेद की खबरों का खंडन करते हुए फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।
SIR और सामान्य वोटर रजिस्ट्रेशन में अंतर समझिए
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। SIR और सामान्य voter registration एक ही चीज नहीं हैं।
SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की विशेष और व्यापक समीक्षा करना है। इसमें पुराने रिकॉर्ड, मौजूदा मतदाताओं और पात्रता से जुड़े विवरणों की जांच की जाती है।
दूसरी ओर, Form 6 के जरिए कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची में नया नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करता है।
इसी वजह से चुनाव आयोग का कहना है कि SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाला अतिरिक्त declaration सामान्य समय में Form 6 की स्थायी आवश्यकता नहीं माना जाना चाहिए।
Form 6 और Form 8 में क्या अंतर है?
सरल भाषा में समझें तो Form 6 का इस्तेमाल मुख्य रूप से नए मतदाता के पंजीकरण के लिए किया जाता है, जबकि Form 8 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची में विभिन्न तरह के सुधार या बदलाव से संबंधित आवेदन के लिए किया जाता है।
SIR के दौरान इन फॉर्म के साथ अतिरिक्त घोषणा को लेकर अलग व्यवस्था बनाई गई थी। आयोग के दस्तावेजों में Annexure-D को Form 6/8 के साथ SIR संदर्भ में इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है।
किन राज्यों में SIR की स्थिति अलग हो सकती है?
SIR पूरे देश में एक ही समय पर एक जैसी स्थिति में नहीं चल रहा है। ECI के आधिकारिक कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित की गई हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ राज्यों में अंतिम मतदाता सूची सितंबर 2026 में प्रकाशित होने की तारीख निर्धारित थी, जबकि कुछ अन्य राज्यों के लिए प्रक्रिया अक्टूबर, नवंबर या दिसंबर तक चलने वाली है।
इसलिए किसी नागरिक के लिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि पूरे देश में एक ही दिन से Annexure-D की जरूरत समाप्त हो गई है।
जिस राज्य में आवेदन किया जा रहा है, वहां की SIR स्थिति और ECI के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध Form 6 प्रक्रिया देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस समेत विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल?
Form 6 और Annexure-D का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बना। कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी को लेकर चिंता जताई थी।
विपक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि नए वोटरों को सामान्य पंजीकरण के दौरान अतिरिक्त जानकारी देने की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि SIR एक विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया है और उससे संबंधित declaration उसी संदर्भ में लागू किया गया था।
यहां दोनों बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है। राजनीतिक दलों की आपत्तियां और चुनाव आयोग की प्रशासनिक व्याख्या एक-दूसरे से अलग दावे हैं। आयोग का मौजूदा फैसला मुख्य रूप से इस अंतर को स्पष्ट करता है कि SIR के दौरान लागू अतिरिक्त declaration को सामान्य Form 6 प्रक्रिया का स्थायी हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।
अब नए मतदाता क्या करें?
अगर कोई व्यक्ति पहली बार वोटर बनने जा रहा है तो उसे सबसे पहले यह देखना चाहिए कि वह कानूनी रूप से मतदाता पंजीकरण के लिए पात्र है या नहीं।
इसके बाद वह चुनाव आयोग की आधिकारिक Voter Services सुविधा के जरिए आवेदन कर सकता है। ECI के अनुसार, Voter Services Portal पर नया मतदाता पंजीकरण सहित कई सेवाएं उपलब्ध हैं।
आवेदन करते समय नाम, जन्म तिथि, पता और अन्य जरूरी विवरण सही तरीके से भरना जरूरी है।
अगर आवेदन के दौरान पोर्टल पर SIR से जुड़ा कोई अतिरिक्त declaration दिखाई देता है, तो आवेदक को अपने क्षेत्र की मौजूदा SIR स्थिति के अनुसार प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। वहीं जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है और Annexure-D हटा दिया गया है, वहां सामान्य Form 6 प्रक्रिया लागू होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है चुनाव आयोग का यह फैसला?
यह फैसला केवल एक फॉर्म में बदलाव का मामला नहीं है। इसका सीधा संबंध मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया और नागरिकों को मिलने वाली जानकारी से है।
एक तरफ चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन रखना है। दूसरी तरफ नए मतदाताओं के लिए आवेदन प्रक्रिया सरल और स्पष्ट होना भी जरूरी है।
विशेष रूप से 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवा पहली बार चुनावी प्रक्रिया से जुड़ते हैं। अगर फॉर्म और दस्तावेजों की आवश्यकताएं बार-बार बदलती या जटिल दिखाई दें, तो उनके लिए आवेदन प्रक्रिया समझना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए आयोग का यह स्पष्टीकरण कि SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा सामान्य Form 6 प्रक्रिया का स्थायी हिस्सा नहीं है, नए मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी है।
आगे क्या देखना होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि अलग-अलग राज्यों में SIR की प्रक्रिया किस चरण में है और वहां ECI के ऑनलाइन सिस्टम में Form 6 किस तरह दिखाई देता है।
चुनाव आयोग ने SIR के लिए राज्यवार अलग-अलग कार्यक्रम जारी किए हैं। कुछ राज्यों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य राज्यों में ड्राफ्ट रोल, दावे-आपत्तियां और अंतिम मतदाता सूची जारी करने की प्रक्रिया अलग-अलग तारीखों पर होनी है।
इसलिए मतदाताओं को सोशल मीडिया या अनौपचारिक संदेशों के बजाय चुनाव आयोग और संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
निष्कर्ष
ECI Form 6 को लेकर हालिया विवाद के बीच चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां नए मतदाताओं को Form 6 के साथ SIR से संबंधित Annexure-D अतिरिक्त declaration देने की जरूरत नहीं होगी।
इस फैसले से सामान्य voter registration और SIR की विशेष प्रक्रिया के बीच अंतर ज्यादा स्पष्ट हुआ है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि मतदाता पंजीकरण के लिए जरूरी सामान्य पात्रता और कानूनी जानकारी समाप्त हो गई है।
नए वोटरों को Form 6 भरते समय अपनी जानकारी सही देनी होगी और आवेदन की स्थिति को आधिकारिक ECI प्लेटफॉर्म पर जांचना चाहिए। वहीं जिन राज्यों में SIR अभी जारी है, वहां लागू निर्देश अलग हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग का यह फैसला नए मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को समझने में मदद करता है और यह स्पष्ट करता है कि SIR के दौरान लागू अतिरिक्त declaration को सामान्य Form 6 की स्थायी आवश्यकता नहीं माना जाना चाहिए।
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Author: AK
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