
सरकार पर पक्षपात का आरोप
देहरादून | उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय खेलों को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सरकार से उन सभी खिलाड़ियों के मूल निवास की जानकारी देने की मांग की, जिन्होंने राष्ट्रीय खेलों में 100 से अधिक पदक जीते हैं।
आर्य ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों का आयोजन उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है, और ऐसे आयोजनों की सफलता के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। लेकिन, उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजन के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। कुछ कंपनियों, अधिकारियों और नेताओं ने इस आयोजन से अनुचित लाभ उठाया है, और समय आने पर कांग्रेस उन सभी को बेनकाब करेगी।

अर्जुन पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों की अनदेखी
आर्य ने दावा किया कि खेलों में उत्तराखंड के स्थानीय खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और पूर्व विजेताओं को नजरअंदाज किया गया। रोइंग के अर्जुन पुरस्कार विजेता सुरेंद्र सिंह कनवासी ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर आरोप लगाया कि उन्हें और अन्य अनुभवी खिलाड़ियों को आयोजन में कोई भूमिका नहीं दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने आयोजन की जिम्मेदारी एक बड़े राजनेता के परिवार की कंपनी को दी और अधिकारियों से जुड़े कुछ परिवारों ने इसमें जमकर लाभ कमाया।
खेल आयोजन में भेदभाव के आरोप
आर्य ने कहा कि सरकार ने राज्य के कई महत्वपूर्ण स्थानों को राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से दूर रखा। पौड़ी का रांसी स्टेडियम, जो देश के सबसे ऊंचे स्टेडियमों में से एक है, वहां कोई भी खेल आयोजित नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार चाहती, तो इस स्टेडियम को देशभर के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए प्रमुख प्रशिक्षण स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता था।
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि बीजिंग एशियाई खेलों से पहले कयाकिंग सलालम टीम का प्रशिक्षण रुद्रप्रयाग जिले के चंद्रापुरी में हुआ था, जिसे विदेशी कोचों ने देश का सबसे बेहतरीन सलालम कोर्स बताया था। लेकिन राष्ट्रीय खेलों में इस स्थान की अनदेखी की गई।

बाहरी राज्यों के खिलाड़ियों को लाभ देने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को उन खिलाड़ियों के मूल निवास की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, जिन्होंने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर पदक जीते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इन बाहरी खिलाड़ियों को राज्य के खेल कोटे से नौकरियां भी मिल सकती हैं, और पुरस्कार राशि भी दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को जा सकती है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि इन पदकों को जीतने वाले कितने खिलाड़ी वास्तव में उत्तराखंड के निवासी हैं और भविष्य में राज्य के खिलाड़ियों के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी।
Author: AK
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