मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टनकपुर स्थित पूर्णागिरी मेले में श्रद्धालुओं के साथ पूजा की और विकास कार्यों की समीक्षा भी की।
CM Dhami Participates in Purnagiri Fair
मुख्यमंत्री धामी ने पूर्णागिरी मेले में की भागीदारी
आस्था और प्रशासन की साझा झलक
उत्तराखंड के टनकपुर में हर वर्ष आयोजित होने वाला पूर्णागिरी मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक सक्रियता का भी एक अहम प्रतीक बन चुका है। इस वर्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं मेला स्थल पहुंचकर श्रद्धालुओं से मुलाकात की, पूजा-अर्चना की और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस भागीदारी से स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार इस धार्मिक आयोजन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पूर्णागिरी मेला: आस्था का महापर्व
मां पूर्णागिरी का महत्व
मां पूर्णागिरी को शक्ति की देवी के रूप में पूजा जाता है और यह स्थान उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक है।
- टनकपुर से लगभग 20 किलोमीटर की पहाड़ी चढ़ाई के बाद श्रद्धालु मां के दर्शन करते हैं।
- यह स्थान नवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालुओं से गुलजार हो जाता है।
- यहां श्रद्धालु ‘जय मां पूर्णागिरि’ के जयघोष के साथ पैदल यात्रा करते हैं।
मेले की परंपरा
पूर्णागिरी मेला हर वर्ष फरवरी-मार्च से जून तक चलता है और नवरात्रि के दौरान इसकी रौनक चरम पर होती है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष रात्रि विश्राम स्थल, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और भोजनालय की व्यवस्था की जाती है।
मुख्यमंत्री का दौरा: विशेष बातें
मां पूर्णागिरी के दर्शन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां पूर्णागिरी मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और राज्य के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।
इस दौरान उन्होंने वहां उपस्थित श्रद्धालुओं से संवाद भी किया।
व्यवस्थाओं का निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने मेला क्षेत्र में बनाए गए स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं की समीक्षा की।
- उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
- साफ-सफाई के विशेष मानकों को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
टनकपुर और आसपास के क्षेत्र का विकास
टनकपुर: उत्तराखंड का प्रवेश द्वार
टनकपुर उत्तराखंड का सीमावर्ती नगर है जो उत्तर प्रदेश से सटा हुआ है। यह क्षेत्र न केवल धार्मिक बल्कि व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
- मुख्यमंत्री धामी ने टनकपुर में चल रहे विभिन्न विकास परियोजनाओं का जायजा लिया।
- सड़कों के सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और परिवहन की बेहतर व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।
सीमावर्ती क्षेत्रों पर ध्यान
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास सरकार की प्राथमिकता में है।
- टनकपुर-बनबसा मार्ग चौड़ीकरण
- सुरक्षा बलों की सुविधाओं में सुधार
- पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाएं
श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम
स्वास्थ्य और सुरक्षा
मेले के दौरान स्वास्थ्य शिविरों की संख्या बढ़ाई गई है ताकि कोई भी श्रद्धालु बीमार होने पर त्वरित उपचार प्राप्त कर सके।
- 24×7 एम्बुलेंस सेवा
- चिकित्सा अधिकारियों की ड्यूटी
- मोबाइल मेडिकल यूनिट्स
ट्रैफिक और परिवहन सुविधा
टनकपुर तक पहुंचने के लिए रोडवेज की विशेष बस सेवाएं चलाई जा रही हैं।
- पार्किंग स्थल चिन्हित
- पैदल यात्रियों के लिए विश्राम स्थल
- कंट्रोल रूम की स्थापना
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
उत्तराखंड की छवि
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां के धार्मिक स्थल राज्य की सांस्कृतिक पहचान हैं।
- केदारनाथ, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, और अब पूर्णागिरी जैसे स्थलों पर सरकार लगातार सुविधाएं बढ़ा रही है।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि “धार्मिक पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का महत्वपूर्ण स्तंभ है।”
रोजगार के अवसर
धार्मिक मेलों से जुड़ा पर्यटन स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लेकर आता है।
- गाइडिंग सेवाएं
- होमस्टे और होटल व्यवसाय
- दुकानदारी और स्थानीय उत्पादों की बिक्री
भविष्य की योजनाएं
स्थायी संरचनाएं
सरकार की योजना है कि पूर्णागिरी मेले के लिए स्थायी सुविधाओं का निर्माण किया जाए ताकि हर वर्ष अस्थायी व्यवस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े।
- मल्टीलेवल पार्किंग
- स्थायी विश्रामशालाएं
- डिजिटल सूचना प्रणाली
डिजिटल निगरानी
मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं और ड्रोन्स के माध्यम से निगरानी की जा रही है। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और कानून-व्यवस्था बनी रहेगी।
निष्कर्ष: आस्था और विकास का संगम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पूर्णागिरी मेले में भागीदारी केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं थी, बल्कि यह राज्य के धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक समर्पण का प्रतीक बन गई है।
जहां एक ओर श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास हो रहा है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक पर्यटन के ज़रिए राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
यदि इस दिशा में निरंतर कार्य किया गया तो पूर्णागिरी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन न होकर उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा।
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Author: AK
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