भारतीय क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा ने सभी फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान किया। 13 साल के टेस्ट करियर में भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई।
Cheteshwar Pujara Retires from All Formats of Cricket

युग का अंत
भारतीय क्रिकेटर तेश्वर पुजारा ने क्रिकेट से सभी फॉर्मेट से सन्यास लेने का ऐलान कर दिया है।चेतेश्वर पुजारा ने 24 अगस्त (रविवार) को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस बात की जानकारी दी है। 37 साल के पुजारा ने X पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट करके क्रिकेटिंग को अलविदा कहा है।
चेतेश्वर पुजारा ने भारत की ओर से 20 साल क्रिकेट खेला था। चेतेश्वर पुजारा ने घरेलू क्रिकेट में साल 2005 में अपना पहला मैच खेला था। वो एक फर्स्ट क्लास मैच था, जो कि सौराष्ट्र और विदर्भ के बीच खेला गया
उन्होंने अपना आखिरी मैच भी फर्स्ट क्लास के तौर पर फरवरी 2025 में गुजरात के खिलाफ खेला था। वहीं इंटरनेशनल क्रिकेट में पुजारा ने अपने कदम साल 2010 में रखे थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु में डेब्यू किया था,
पुजारा का 13 साल का रहा इंटरनेशनल करियर
इंटरनेशनल क्रिकेट में पुजारा ने अपने कदम साल 2010 में रखे थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु में डेब्यू किया था, जो कि एक टेस्ट मैच थाm वहीं साल 2013 में जिम्बाब्वे के खिलाफ बुलावायो में उनका वनडे डेब्यू हुआ। पुजारा का वनडे करियर तो ज्यादा नहीं चला मगर टेस्ट क्रिकेट में उनके पांव डेब्यू के बाद अगले 13 साल तक जमे रहे। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही जून 2023 में खेला था।

घरेलू क्रिकेट से शुरुआत
2005 में पहला मैच
चेतेश्वर पुजारा ने साल 2005 में सौराष्ट्र की ओर से विदर्भ के खिलाफ अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच खेला था। तभी से उन्होंने लगातार मेहनत करके घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई।
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन
पुजारा ने रणजी ट्रॉफी में सौराष्ट्र की ओर से कई यादगार पारियां खेलीं। उन्होंने लंबे समय तक सौराष्ट्र को रणजी फाइनल और जीत तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। उनका धैर्य और तकनीकी बल्लेबाजी का अंदाज उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग बनाता रहा।
इंटरनेशनल क्रिकेट का सफर
2010 में टेस्ट डेब्यू
पुजारा ने भारत की ओर से अक्टूबर 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट मैच से इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा। अपने डेब्यू के बाद से ही वे “ड्रविड़ के उत्तराधिकारी” कहे जाने लगे।
2013 में वनडे डेब्यू
साल 2013 में पुजारा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ बुलावायो में वनडे डेब्यू किया। हालांकि उनका वनडे करियर लंबा नहीं चला और वे 5 ही मैच खेल पाए। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका योगदान अमिट रहा।
13 साल का टेस्ट करियर
पुजारा ने अपने 13 साल लंबे टेस्ट करियर में भारत को कई बार मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला। उनकी तकनीकी बल्लेबाजी, लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता और स्पिन-फास्ट दोनों के खिलाफ संतुलित खेल ने उन्हें भारत का “दीवार 2.0” बना दिया।
पुजारा का आखिरी मैच
पुजारा ने फरवरी 2025 में गुजरात के खिलाफ फर्स्ट क्लास मैच खेला था। वहीं उनका आखिरी टेस्ट जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुआ। टेस्ट क्रिकेट में उनकी कमी आने वाले समय में टीम इंडिया जरूर महसूस करेगी।
पुजारा की बल्लेबाजी शैली
“दीवार” की उपाधि
राहुल द्रविड़ के संन्यास के बाद भारत को लंबे समय तक ऐसे बल्लेबाज की तलाश थी जो टीम को संभाल सके। पुजारा ने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
- वे तेजी से रन बनाने के बजाय लंबे समय तक टिकने और विपक्षी गेंदबाजों को थकाने के लिए मशहूर थे।
- ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ उन्होंने अपनी तकनीकी क्षमता से भारतीय टीम को कई बार जीत दिलाई।
विदेशी धरती पर योगदान
ऑस्ट्रेलिया में 2018-19 की टेस्ट सीरीज पुजारा के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय है। इस सीरीज में उन्होंने तीन शतक जड़े और भारत को पहली बार ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टेस्ट सीरीज जिताने में अहम भूमिका निभाई।
Wearing the Indian jersey, singing the anthem, and trying my best each time I stepped on the field – it’s impossible to put into words what it truly meant. But as they say, all good things must come to an end, and with immense gratitude I have decided to retire from all forms of… pic.twitter.com/p8yOd5tFyT
— Cheteshwar Pujara (@cheteshwar1) August 24, 2025
पुजारा का आंकड़ों में करियर
- टेस्ट मैच: 103
- रन: 7193
- औसत: लगभग 44
- शतक: 19
- अर्धशतक: 35
वनडे में उन्होंने 5 मैच खेले और 51 रन बनाए। हालांकि वनडे और टी-20 में उनकी जगह नहीं बनी, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में वे भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में गिने जाते हैं।
टीम इंडिया के लिए योगदान
मुश्किल समय में सहारा
जब भारत शुरुआती विकेट गंवा देता था, तब पुजारा अक्सर टीम की रीढ़ बनकर खड़े रहते थे। उनकी धीमी लेकिन स्थिर बल्लेबाजी ने कई बार भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
कप्तानों का भरोसा
चाहे महेंद्र सिंह धोनी हों या विराट कोहली, दोनों ही कप्तानों ने पुजारा पर भरोसा जताया। कोहली तो उन्हें टेस्ट टीम का “सबसे विश्वसनीय बल्लेबाज” कहते थे।
सोशल मीडिया पर भावुक विदाई
पुजारा ने X (ट्विटर) पर संन्यास की घोषणा करते हुए लिखा कि क्रिकेट उनका जीवन रहा है और भारतीय जर्सी पहनकर खेलने से बड़ा सम्मान उनके लिए कुछ नहीं था।
- उन्होंने अपने परिवार, कोच, साथियों और फैन्स का शुक्रिया अदा किया।
- उनके पोस्ट पर सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और अन्य खिलाड़ियों ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
पुजारा के बाद कौन भरेगा खाली जगह?
पुजारा की जगह लेना आसान नहीं होगा। टेस्ट क्रिकेट में लंबी पारी खेलने की कला धीरे-धीरे कम होती जा रही है। अब देखना होगा कि शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल या कोई और युवा बल्लेबाज उनकी भूमिका को कितनी मजबूती से निभा पाता है।
निष्कर्ष: एक महान टेस्ट बल्लेबाज का अंत
चेतेश्वर पुजारा का करियर इस बात का उदाहरण है कि क्रिकेट सिर्फ चौके-छक्कों का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और तकनीक का भी है। उन्होंने भारत को कई यादगार जीत दिलाई और टेस्ट क्रिकेट में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनका संन्यास भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा खालीपन छोड़ जाएगा।
पुजारा हमेशा याद किए जाएंगे उस खिलाड़ी के रूप में, जिसने बल्ले से नहीं बल्कि अपने धैर्य और जुझारूपन से इतिहास रचा।
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Author: AK
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