बिहार चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तकरार तेज, तेजस्वी यादव दिल्ली में राहुल गांधी से करेंगे मुलाकात, कांग्रेस-आरजेडी में मतभेद गहराए।
Bihar Polls: Tejashwi Yadav to meet Rahul Gandhi amid seat-sharing deadlock

महागठबंधन में सीट बंटवारे पर बढ़ी तकरार, दिल्ली में राहुल गांधी से मिलेंगे तेजस्वी यादव
Bihar Election 2025: Congress-RJD seat-sharing dispute intensifies as Tejashwi Yadav heads to Delhi to meet Rahul Gandhi
बिहार चुनाव 2025: राजनीतिक गठबंधन में नई खींचतान
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है और सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। लेकिन महागठबंधन (Grand Alliance) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं।
राजद (RJD) और कांग्रेस (Congress) के बीच चल रही तनातनी अब उस मुकाम पर पहुंच गई है, जहां मामला दिल्ली के दरवाजे तक पहुंच गया है। तेजस्वी यादव दिल्ली रवाना हो चुके हैं, जहां उनकी मुलाकात राहुल गांधी से तय मानी जा रही है।
यह मुलाकात बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकती है, क्योंकि अगर समझौता नहीं हुआ, तो महागठबंधन का स्वरूप चुनाव से पहले ही बदल सकता है।
आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर ठनी
महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टियों – राजद और कांग्रेस – के बीच सीट बंटवारे पर असहमति लंबे समय से बनी हुई है।
राजद, जो गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, 130 से 138 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। वहीं कांग्रेस कम से कम 60 सीटों की मांग पर अड़ी हुई है।
राजद ने कांग्रेस को 50 सीटों का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। कांग्रेस का तर्क है कि पिछली बार जिन सीटों पर उसने अच्छा प्रदर्शन किया या जहां उसका जनाधार है, वहां उसे उम्मीदवार उतारने का पूरा अधिकार है।
कांग्रेस का अल्टीमेटम: 24 घंटे में फैसला करो
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने राजद को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है।
कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कहा है कि अगर राजद सीटों पर सहमति नहीं देता, तो पार्टी पहले चरण की सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर देगी।
कांग्रेस का कहना है कि चुनावी रणनीति में देरी होने से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है, इसलिए अब फैसला जल्द होना जरूरी है।
तेजस्वी यादव दिल्ली में राहुल गांधी से करेंगे मुलाकात
लगातार हो रही चर्चाओं के बावजूद पटना में बात नहीं बनी, इसलिए अब तेजस्वी यादव दिल्ली पहुंच गए हैं, जहां वे राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुलाकात सीट बंटवारे के गतिरोध को खत्म करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, अगर दोनों नेताओं के बीच समझौता नहीं हुआ, तो यह गठबंधन चुनाव से पहले ही कमजोर पड़ सकता है।
पशुपति पारस और आरजेडी की बातचीत भी अटकी
महागठबंधन में केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य सहयोगी दलों के साथ भी सीटों पर पेच फंसा हुआ है।
पशुपति कुमार पारस की पार्टी ने आठ सीटों की मांग की है, लेकिन राजद उन्हें इतनी सीटें देने को तैयार नहीं है।
तेजस्वी यादव ने उन्हें अपनी पार्टी का विलय करने का प्रस्ताव दिया, जिससे नाराज होकर पारस ने अपनी पार्टी की आपात बैठक बुला ली है।
लेफ्ट दलों के साथ भी समीकरण बिगड़े
महागठबंधन का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा – वामपंथी दल (Left Parties) – भी सीटों को लेकर असंतोष जता रहे हैं।
- CPI (ML) ने 30 सीटों की मांग की है, जबकि राजद 22 से ज्यादा देने को तैयार नहीं है।
- CPI 24 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन राजद केवल 7 सीटें देने पर अड़ी है।
- CPM 10 सीटों की मांग कर रही है, मगर तेजस्वी यादव ने सिर्फ 5 सीटों का ऑफर दिया है।
इन असहमतियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महागठबंधन में अंदरूनी तनाव अब खुलकर सतह पर आ चुका है।
मुकेश सहनी भी सीटों की मांग पर अड़े
विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी भी महागठबंधन में अधिक हिस्सेदारी चाहते हैं।
उन्होंने करीब 30 सीटों की मांग की है, जबकि राजद उन्हें केवल 18 सीटों का प्रस्ताव दे रही है।
मुकेश सहनी का कहना है कि उन्होंने पिछली बार गठबंधन की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसलिए उनकी पार्टी को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।
एनडीए में भी सीट बंटवारे पर पेच
दूसरी ओर, एनडीए (NDA) खेमे में भी सब कुछ सुचारू नहीं है।
दिल्ली में भाजपा (BJP) नेताओं की लगातार बैठकों के बावजूद सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है।
- चिराग पासवान 29 सीटों की मांग पर अड़े हैं,
- उपेंद्र कुशवाहा 7 सीटें चाहते हैं,
- जबकि जीतन राम मांझी भी अपने पुराने वोट बैंक वाले क्षेत्रों से समझौता करने को तैयार नहीं हैं।
भाजपा चाहती है कि एनडीए के सभी सहयोगी दल मिलकर चुनाव लड़ें ताकि महागठबंधन के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाया जा सके, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है।
चुनाव की तारीखें तय, लेकिन सीटें अधर में
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए 6 और 11 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 14 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।
हालांकि चुनाव की तारीखें घोषित हो चुकी हैं, परंतु सीट शेयरिंग का समीकरण अभी तक किसी भी गठबंधन में स्पष्ट नहीं है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सीट बंटवारे पर समय रहते सहमति नहीं बनी, तो उम्मीदवार चयन और प्रचार रणनीति पर असर पड़ेगा।
राजद की रणनीति: बड़े जनाधार का दावा
राजद का मानना है कि उसका जनाधार राज्य में सबसे बड़ा है, इसलिए उसे अधिक सीटें मिलनी चाहिए।
तेजस्वी यादव लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि उनकी पार्टी ने 2020 के चुनाव में 75 सीटें जीती थीं, जो महागठबंधन में सबसे ज्यादा थीं।
इसलिए, सीटों का बंटवारा जनाधार के अनुपात में होना चाहिए, न कि पुराने समीकरणों के आधार पर।
कांग्रेस का जवाब: संगठन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
कांग्रेस का रुख साफ है – उसने हमेशा गठबंधन की एकता को बनाए रखा है, लेकिन अब उसे ‘समान सम्मान’ चाहिए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी का संगठन कई जिलों में मजबूत है और पुरानी सीटों पर दावेदारी पूरी तरह जायज है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय कुमार ने कहा, “गठबंधन सम्मान और सहयोग पर टिके रहते हैं, एकतरफा फैसलों से नहीं।”
क्या टूट सकता है महागठबंधन?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगर सीट बंटवारे पर समझौता नहीं हुआ, तो महागठबंधन में टूट की स्थिति बन सकती है।
तेजस्वी यादव की कड़ी रणनीति और कांग्रेस के आत्मविश्वास के बीच कोई मध्य रास्ता निकालना चुनौतीपूर्ण होगा।
अगर दिल्ली बैठक में सहमति बन जाती है, तो महागठबंधन एकजुट होकर एनडीए को कड़ी टक्कर दे सकता है।
अन्यथा, विपक्षी एकता के बिखरने का फायदा सीधे भाजपा और एनडीए गठबंधन को मिल सकता है।
निष्कर्ष: फैसला दिल्ली के दरवाजे पर
बिहार चुनाव 2025 सिर्फ राज्य की राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता की परीक्षा भी है।
अब पूरा देश यह देख रहा है कि क्या तेजस्वी यादव और राहुल गांधी सीट बंटवारे के विवाद को सुलझा पाएंगे या महागठबंधन एक और आंतरिक संकट का शिकार बन जाएगा।
अगले कुछ दिनों में होने वाली यह मुलाकात बिहार की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करेगी।
बिहार चुनाव 2025, महागठबंधन सीट बंटवारा, तेजस्वी यादव राहुल गांधी मुलाकात, कांग्रेस आरजेडी विवाद, बिहार विधानसभा चुनाव
यह भी पढ़े: TRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !


















