बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर सहमति बन गई है। भाजपा, जदयू, लोजपा-आर, हम और आरएलएम के बीच आज समझौते की घोषणा संभव है।
Bihar Polls 2025: NDA Reaches Seat-Sharing Agreement, Announcement Soon
बिहार चुनाव 2025: एनडीए में सीट बंटवारे पर सहमति, आज हो सकती है घोषणा
प्रस्तावना
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सियासी माहौल अब गर्म होता जा रहा है। एनडीए गठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर चल रही रस्साकशी आखिरकार समाप्ति की ओर है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल यूनाइटेड (जदयू), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और राष्ट्रीय लोक जनता मंच (आरएलएम) के बीच लगभग सहमति बन चुकी है। सूत्रों के अनुसार, रविवार को इसका औपचारिक ऐलान संभव है।
शनिवार को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर हुई आठ घंटे लंबी मैराथन बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जदयू के शीर्ष नेता, और एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इसी बैठक में सीट बंटवारे का नया फॉर्मूला तय किया गया, जिसे लेकर अब गठबंधन के भीतर सहमति बन चुकी है।
भाजपा और जदयू के बीच बनी सहमति
सीट बंटवारे का नया फॉर्मूला
सूत्रों के मुताबिक, एनडीए के अंदर सीटों का जो बंटवारा तय हुआ है, उसके तहत जदयू 101 सीटों, भाजपा 100 सीटों, लोजपा (रामविलास) 26 सीटों, हम 8 सीटों, और आरएलएम 5 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
इस फॉर्मूले में भाजपा ने जदयू से एक सीट कम लेकर गठबंधन की एकता का संदेश देने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा का यह कदम सहयोगी दलों को साथ रखने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी नहीं चाहती कि 2020 जैसे हालात दोबारा बनें, जब सीटों को लेकर अंदरूनी असंतोष ने कुछ क्षेत्रों में नकारात्मक असर डाला था।
अमित शाह की मौजूदगी में हुई गहन चर्चा
बैठक के दौरान बिहार के सभी प्रमुख एनडीए नेताओं के साथ उम्मीदवार चयन को लेकर भी चर्चा हुई। अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि “एनडीए की मजबूती जनता की एकजुटता में है, न कि सीटों की संख्या में।”
भाजपा ने अपने हिस्से की करीब 100 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर भी मंथन कर लिया है। राज्य इकाई की ओर से भेजे गए नामों पर केंद्रीय नेतृत्व ने गहन विचार किया और अधिकांश सीटों पर दो संभावित उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दिया गया है।
भाजपा में बदलाव की तैयारी
पुराने चेहरों की छुट्टी, नए उम्मीदवारों को मौका
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) से बचने के लिए रणनीति बना रही है। पार्टी ने निर्णय लिया है कि एक-तिहाई वर्तमान विधायकों को टिकट नहीं दिया जाएगा।
इसके बजाय नए, युवा और जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि जनता को “नई ऊर्जा और नई उम्मीद” दिखाने की जरूरत है। इसके लिए कई सीटों पर पुराने चेहरों की जगह नए उम्मीदवार उतारे जाएंगे।
हारी हुई सीटों पर विशेष ध्यान
2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 110 सीटों पर लड़ी थी, जिनमें से उसे 36 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इस बार इन हारी हुई सीटों पर विशेष रणनीति अपनाई जा रही है।
पार्टी ने तय किया है कि लगातार दो बार हारने वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, जिन सीटों पर जीत का अंतर बहुत कम रहा था, वहां नए उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी है।
सहयोगी दलों की स्थिति
चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास)
लोजपा-आर को इस फॉर्मूले में 26 सीटें दी गई हैं। चिराग पासवान पहले 30 से अधिक सीटों की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्होंने समझौते के संकेत दिए हैं। हालांकि, कुछ सीटों को लेकर उनकी नाराजगी बनी हुई है, क्योंकि वे भाजपा और जदयू की कुछ सीटों पर भी दावेदारी जता रहे हैं।
राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि चिराग का रुख धीरे-धीरे नरम पड़ रहा है, क्योंकि भाजपा ने उन्हें “राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग” का आश्वासन दिया है।
जीतन राम मांझी की हम पार्टी
हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) को 8 सीटें मिली हैं। मांझी इस फॉर्मूले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताए जा रहे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि “एनडीए में रहकर संघर्ष बेहतर है, बाहर रहकर अलगाव नहीं।”
उनके राष्ट्रीय महासचिव राजेश पांडे ने कहा कि राजनीति में “कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता”, जो इस बात का संकेत है कि हम गठबंधन से बाहर नहीं जाएगी।
उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम
आरएलएम को 5 सीटें दी गई हैं। कुशवाहा भी शुरुआत में असंतुष्ट थे, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि “एनडीए का हिस्सा बने रहना बिहार के विकास के लिए जरूरी है।”
राजनीतिक समीकरणों पर असर
जदयू-भाजपा की तालमेल परीक्षा
इस बार का चुनाव एनडीए के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि जदयू और भाजपा दोनों को “एकजुटता” का संदेश देना होगा।
पिछले विधानसभा चुनावों में सीटों को लेकर असहमति ने कई क्षेत्रों में नुकसान पहुंचाया था। इस बार भाजपा का एक सीट कम लेना, जदयू के लिए एक भरोसे का संकेत है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एनडीए एकजुट रहकर चुनाव लड़े, तो विपक्षी गठबंधन “महागठबंधन” के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
विपक्ष की निगरानी में एनडीए की चाल
विपक्षी महागठबंधन, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, और लेफ्ट पार्टियाँ शामिल हैं, एनडीए की रणनीति पर नजर बनाए हुए है।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “एनडीए में सीटों की खींचतान इस बात का संकेत है कि अंदरूनी मतभेद गहरे हैं।”
हालांकि, भाजपा और जदयू नेताओं ने इसे “स्वस्थ चर्चा” बताया है और कहा है कि “गठबंधन मजबूत है।”
बिहार में चुनावी रणनीति का नया दौर
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण
बिहार की राजनीति हमेशा जातीय समीकरणों से प्रभावित रही है। एनडीए ने इस बार विशेष रूप से अति पिछड़ा वर्ग (EBC), दलित समुदाय और महिलाओं को ध्यान में रखकर उम्मीदवार चयन की रणनीति बनाई है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, “हर विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक संतुलन बनाकर उम्मीदवार तय किए जा रहे हैं।”
चुनावी प्रचार की तैयारी
एनडीए के सभी दलों ने संयुक्त प्रचार अभियान की रूपरेखा तैयार की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, और नीतीश कुमार की संयुक्त रैलियाँ जल्द शुरू होंगी।
भाजपा ने डिजिटल प्रचार और सोशल मीडिया कैंपेन पर भी विशेष जोर देने की योजना बनाई है।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने सीट बंटवारे के पेच को सुलझाकर एक बड़ी राजनीतिक बाधा पार कर ली है। अब गठबंधन के सभी दल एक साथ मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
भाजपा के लिए यह चुनाव “युवा नेतृत्व और नये चेहरों” को सामने लाने का मौका है, वहीं जदयू के लिए यह अपने जनाधार को पुनः मजबूत करने की चुनौती है।
अगर रविवार को सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा हो जाती है, तो यह बिहार की राजनीति में एनडीए की एकजुटता का संदेश देगा और आगामी चुनावी मुकाबले को और रोचक बना देगा।
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Author: AK
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