एशियन गेम्स 2026 में भारत की महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने शानदार वापसी करते हुए गोल्ड जीता। नीरू ढांडा के स्वर्ण से भारत की पदक संख्या भी बढ़ी।
Asian Games 2026: India Wins 4×400 Gold

एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। बारिश और ठंडे मौसम के बीच भारतीय महिला खिलाड़ियों ने मैदान से लेकर शूटिंग रेंज तक अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। दिन की शुरुआत नीरू ढांडा के ऐतिहासिक गोल्ड से हुई और शाम होते-होते महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतकर पूरे अभियान में नया जोश भर दिया।
किरण पहल, एमआर पूवम्मा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज की चौकड़ी ने 3 मिनट 29.69 सेकंड के समय के साथ महिला 4×400 मीटर रिले का फाइनल जीता। भारत ने बहरीन और चीन को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड अपने नाम किया। बहरीन ने 3:30.21 के समय के साथ सिल्वर और चीन ने 3:31.02 के समय के साथ ब्रॉन्ज जीता।
इस जीत की सबसे खास बात यह रही कि भारतीय टीम ने दौड़ के शुरुआती हिस्से में पीछे रहने के बावजूद आखिरी चरणों में शानदार वापसी की। एंकर लेग पर उतरीं विथ्या रामराज ने दबाव के बीच अपनी गति बनाए रखी और भारत को फिनिश लाइन तक सबसे आगे पहुंचाया।
महिला खिलाड़ियों ने बदली भारत की तस्वीर
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में रहा है। मंगलवार को नीरू ढांडा ने महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने एथलेटिक्स में भारत के लिए पहला गोल्ड हासिल किया।
रिले टीम की जीत के साथ भारत के खाते में कुल छह स्वर्ण पदक हो गए। भारतीय टीम के लिए यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि एथलेटिक्स में लंबे इंतजार के बाद गोल्ड आया। भारतीय महिला टीम ने 3:29.69 का समय निकालकर फाइनल अपने नाम किया।
भारत की पदक तालिका को लेकर अलग-अलग समय के अपडेट में संख्या बदलती रही, क्योंकि दिन के अन्य मुकाबलों के नतीजे भी जुड़ते गए। 29 सितंबर के दिन के समापन तक उपलब्ध रिपोर्टों में भारत के खाते में छह गोल्ड, 21 सिल्वर और 25 ब्रॉन्ज समेत 52 पदक दर्ज किए गए और भारत टॉप-10 में पहुंचा।

कैसे जीती भारत की 4×400 मीटर रिले टीम?
4×400 मीटर रिले में सिर्फ तेज दौड़ना ही काफी नहीं होता। इसमें चारों धावकों के बीच सही तालमेल, बैटन एक्सचेंज और आखिरी कुछ सौ मीटर में दबाव संभालने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण होती है।
भारत ने लेन छह से शुरुआत की और शुरुआती लेग की जिम्मेदारी किरण पहल को मिली। शुरुआत में भारतीय टीम आगे नहीं थी। किरण ने बैटन तीसरे स्थान पर पूवम्मा को सौंपा।
यहीं से भारतीय टीम की वापसी शुरू हुई।
The emotion & joy ❤️
— Nabila Jamal (@nabilajamal_) September 29, 2026
This 1:15 video is a reflection of their dedication and effort
Four women, one golden finish for India. Kiran Pahal, MR Poovamma, Prachi and Vithya Ramraj clock 3:29.69 to win the women’s 4x400m relay at #AsianGames2026, ahead of Bahrain and China
India’s… pic.twitter.com/H6d9CCJOlD
पूवम्मा ने कम किया अंतर
दूसरे लेग में एमआर पूवम्मा ने भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी गति बढ़ाते हुए आगे की टीमों के साथ अंतर कम किया। उनके प्रयास से भारत गोल्ड की दौड़ में मजबूती से वापस आया।
पूवम्मा ने बैटन प्राची चौधरी को सौंपा। प्राची ने अपनी लेग में भारत की स्थिति को बनाए रखा और टीम को ऐसी स्थिति में पहुंचाया, जहां आखिरी धावक विथ्या रामराज के पास पदक जीतने का वास्तविक मौका था।
रिले में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। एक छोटी गलती पूरी टीम को पदक से दूर कर सकती है। लेकिन भारतीय चौकड़ी ने दबाव में अपनी लय नहीं खोई।
आखिरी लेग में विथ्या का कमाल
फिर आया वह क्षण जिसका इंतजार भारतीय प्रशंसक कर रहे थे।
विथ्या रामराज एंकर लेग के लिए उतरीं। उनके सामने चुनौती साफ थी—भारत को आगे रखना और फिनिश लाइन तक बढ़त बनाए रखना।
विथ्या ने शुरुआत में अपनी गति को नियंत्रित रखा। इसके बाद दौड़ के अंतिम हिस्से में उन्होंने तेजी बढ़ाई। बहरीन की टीम ने भी वापसी की कोशिश की, लेकिन विथ्या ने दबाव के बावजूद अपनी रफ्तार और संतुलन बनाए रखा।
आखिरकार भारतीय टीम ने 3:29.69 के समय के साथ गोल्ड अपने नाम कर लिया। बहरीन 3:30.21 और चीन 3:31.02 के समय के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
यानी भारत और बहरीन के बीच अंतर सिर्फ 0.52 सेकंड का रहा। यही वजह है कि आखिरी लेग में विथ्या की दौड़ को इस जीत का निर्णायक हिस्सा माना जा रहा है।
विथ्या रामराज के लिए लगातार तीसरा पदक
विथ्या रामराज के लिए एशियन गेम्स 2026 का यह गोल्ड बेहद खास है। उन्होंने इससे पहले भी इन खेलों में शानदार प्रदर्शन किया था।
400 मीटर हर्डल्स में विथ्या ने ब्रॉन्ज पदक जीता और इस दौरान पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने 54.75 सेकंड का समय निकाला। इसके अलावा वह मिश्रित 4×400 मीटर रिले में सिल्वर जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रही थीं।
महिला 4×400 मीटर रिले का गोल्ड उनके लिए इन खेलों का तीसरा पदक रहा।
इससे उनके एशियन गेम्स अभियान की तस्वीर और भी खास हो जाती है। एक तरफ उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा, वहीं दूसरी तरफ रिले टीम के साथ देश के लिए गोल्ड जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत के लिए एथलेटिक्स में खत्म हुआ गोल्ड का इंतजार
एशियन गेम्स 2026 में एथलेटिक्स से भारत को कई पदक मिल चुके थे, लेकिन गोल्ड का इंतजार बना हुआ था। महिला 4×400 मीटर रिले ने इस इंतजार को खत्म किया।
भारतीय टीम की जीत ने यह भी दिखाया कि ट्रैक एंड फील्ड में टीम स्पर्धाओं का महत्व कितना बड़ा है। रिले में सिर्फ व्यक्तिगत प्रदर्शन नहीं, बल्कि चारों खिलाड़ियों की टाइमिंग और बैटन एक्सचेंज भी परिणाम तय करते हैं।
इस मुकाबले में भारत की चारों धावकों ने अलग-अलग चरण में अपनी भूमिका निभाई। शुरुआती चरण में पीछे रहने के बाद टीम ने धीरे-धीरे अंतर कम किया और आखिरी चरण में जीत सुनिश्चित की।
44 साल पुरानी परंपरा से जुड़ी बड़ी उपलब्धि
महिला 4×400 मीटर रिले में भारत का एशियन गेम्स रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है। इस जीत के साथ भारत ने इस स्पर्धा में लंबे समय से चले आ रहे पदक सिलसिले को आगे बढ़ाया।
भारतीय महिला टीम ने इससे पहले 2018 में भी इस स्पर्धा में गोल्ड जीता था। 2026 की जीत के साथ भारत ने महिला 4×400 मीटर रिले में एशियाई स्तर पर अपनी निरंतरता को फिर साबित किया। Indian Express के अनुसार, भारत ने इस इवेंट में पिछले सात एशियन गेम्स में छह बार गोल्ड जीता है।
यही वजह है कि 4×400 रिले को भारतीय एथलेटिक्स की महत्वपूर्ण स्पर्धाओं में गिना जाता है।
नीरू ढांडा ने भी रचा इतिहास
महिला रिले टीम की जीत से पहले शूटिंग में नीरू ढांडा ने भारत के लिए बड़ा इतिहास रचा। उन्होंने महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता।
यह एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा का ऐतिहासिक स्वर्ण रहा। नीरू की जीत के बाद भारतीय दल को उसी दिन एथलेटिक्स से भी गोल्ड मिला।
इस तरह एक ही दिन भारत ने शूटिंग और एथलेटिक्स में दो स्वर्ण हासिल किए। यही कारण रहा कि मंगलवार का दिन भारतीय अभियान के सबसे खास दिनों में शामिल हो गया।
पदक तालिका में भारत की स्थिति
दिन के अलग-अलग समय पर पदक तालिका में बदलाव होता रहा। महिला 4×400 मीटर रिले और नीरू ढांडा के गोल्ड के बाद भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या छह हो गई।
29 सितंबर के दिन के अंत में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत के पास छह गोल्ड, 21 सिल्वर और 25 ब्रॉन्ज समेत कुल 52 पदक थे। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में 10वें स्थान पर पहुंच गया।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने प्रतियोगिता के दौरान अलग-अलग खेलों में पदक जीते हैं। शूटिंग, एथलेटिक्स, स्क्वॉश, बैडमिंटन, वुशु, क्रिकेट और अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपना योगदान दिया है।
क्यों खास है 4×400 मीटर रिले का गोल्ड?
4×400 मीटर रिले का गोल्ड केवल एक पदक नहीं है। यह चार खिलाड़ियों के सामूहिक प्रदर्शन का परिणाम है।
किरण पहल ने शुरुआती चरण संभाला। पूवम्मा ने टीम को आगे लाने में मदद की। प्राची ने तीसरे लेग में स्थिति मजबूत रखी और विथ्या ने आखिरी लेग में जीत की मुहर लगा दी।
यही रिले का असली रोमांच है। शुरुआत में कोई टीम पीछे हो सकती है, लेकिन एक शानदार बैटन एक्सचेंज, तेज रन और सही रणनीति पूरी दौड़ की तस्वीर बदल सकते हैं।
भारत के लिए इस फाइनल में भी यही हुआ। शुरुआत में तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम ने अंत में गोल्ड अपने नाम किया।
भारत की महिला शक्ति का सुनहरा प्रदर्शन
एशियन गेम्स 2026 के इस दिन की सबसे बड़ी कहानी भारतीय महिलाओं के शानदार प्रदर्शन की रही। सुबह नीरू ढांडा ने शूटिंग में गोल्ड जीता और शाम को किरण पहल, पूवम्मा, प्राची और विथ्या की टीम ने ट्रैक पर तिरंगा ऊंचा किया।
खास बात यह भी है कि विथ्या रामराज पहले ही इन खेलों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड और पदक के कारण सुर्खियों में थीं। अब रिले गोल्ड ने उनके अभियान को एक और बड़ी उपलब्धि दे दी।
भारत की 4×400 मीटर महिला रिले टीम ने सिर्फ एक दौड़ नहीं जीती, बल्कि दबाव में वापसी, टीमवर्क और आखिरी सेकंड तक संघर्ष करने की क्षमता का उदाहरण पेश किया।
अब आगे क्या?
एशियन गेम्स अभी जारी हैं और भारतीय दल के पास आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या बढ़ाने के कई मौके हैं। 52 पदकों के आंकड़े के साथ भारत ने प्रतियोगिता में अपना मजबूत प्रदर्शन कायम रखा है।
महिला 4×400 मीटर रिले का गोल्ड भारतीय एथलेटिक्स के लिए खास उपलब्धि है। 3:29.69 का समय, बहरीन पर सिर्फ 0.52 सेकंड की बढ़त और आखिरी लेग में विथ्या की शानदार दौड़ ने इस फाइनल को यादगार बना दिया।
भारत के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें चार अलग-अलग खिलाड़ियों का योगदान जुड़ा है। किसी एक धावक ने अकेले मुकाबला नहीं जीता। किरण से शुरू हुई दौड़ पूवम्मा, प्राची और फिर विथ्या तक पहुंची और आखिर में भारतीय टीम सबसे आगे रही।
एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए यह दिन एक साफ संदेश लेकर आया—जब टीम आखिरी क्षण तक भरोसा बनाए रखती है, तो शुरुआती पिछड़ना भी जीत की राह में सबसे बड़ी बाधा नहीं बनता। महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने इसी जज्बे के साथ भारत को एथलेटिक्स का गोल्ड दिलाया और पदक तालिका में भी देश की स्थिति मजबूत की।
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Author: AK
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