जन्मदिन विशेष:- जब किंग कोहली ने पिता की मौत की खबर सुनने के बाद भी मैच खेल टीम को फ़ॉलोअन का खतरा टाला

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उन्हें था गुमान हमारी उड़ान में कहाँ दम है,
हमे था भरोसा आगे आसमान भी कम है
कुछ ऐसा ही अगर एक 17 साल का लड़का उस वक्त कर जाए जब उस बच्चे को पता चले कि उसकी पिता की मौत हो चुकी है तो यह अपने आप में कई सारे सवालों के जवाब का एक उदाहरण है। एक ऐसे ही लड़के ने पंजाबी परिवार में जन्म लिया जिसने जान लिया था कि शायद अनुशासन और फिटनेस उन्हें बहुत कुछ दिलवा सकती है। लेकिन इसके साथ ही उस बच्चे को इस बात का आभास भी था कि मेहनत ही मूलमंत्र है और फिर शुरू कर दिया अपने पैशन को जीने का सफ़र। हालांकि यह बच्चा जिसे आज पूरी दुनिया किंग कोहली यानी विराट कोहली के नाम से जानती है, रहने वाले मध्यप्रदेश के कटनी के रहने वाले हैं, लेकिन लोग उन्हें दिल्लीवाला लड़का समझते हैं।
विराट कोहली आज अपना 34वां जन्मदिन मना रहे हैं। पूरी दुनिया से कोरोड़ो फैंस उनके लिए गुड विश भेज रहे हैं, लेकिन कोहली आज जिस विराट रूप में हैं उसके पीछे एक बड़ी वजह है उनका त्याग और अग्नि परीक्षा के समय उनका सही चीजों का चयन। दरअसल बात 18 दिसम्बर 2006 की है। दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में दिल्ली और कर्नाटक के बीच मैच चल रहा था। कर्नाटक 446 रन बनाकर काफी मजबूत स्थिति में थी और साथ ही वह मैच को एकतरफा जीतने वाली थी। हालांकि विराट कोहली अभी भी क्रीज पर टिके हुए थे।
विराट कोहली जब 40 रनों की पारी खेल नाबाद दिन का खेल खत्म होने पर पवेलियन लौटे तो उनके घर से कॉल आया कि पिता की मौत हार्ट अटैक की वजह से हो गई है जल्द घर आ जाओ। एक तरफ पिता की मौत की खबर और दूसरी तरफ टीम पर हार का खतरा। विराट कोहली हमेशा इशांत शर्मा को लेकर अपनी कार में जाते थे। उस दिन काफी शांत होने पर इशांत ने जब उनसे शांति का कारण पूछा तो सारी बातें सुनकर इशांत शर्मा भी हैरान हो गए। उन्होंने अपनी टीममेट को भी यह बात बताई और सबने कहा कि घर जाओ, लेकिन विराट कोहली ने उसके बावजूद क्रिकेट को चुना और फिर मैदान पर उतरे।
मध्यप्रदेश के खिलाफ उस मेंटलिटी के साथ 90 रनों की पारी खेली और फ़ॉलोअन बचाते हुए टीम को एक बड़े हार से बचाया। मैच ड्रा कराने के बाद वह शाम को अपने घर पहुँचे और उन्होंने पिता का अंतिम संस्कार किया। इस तरह से विराट कोहली का वह रूप भी सबने देखा। पिता प्रेम कोहली ने 9 साल की उम्र में कोहली को स्कूटर पर बैठाकर अकादमी छोड़ा था, उसी का आज परिणाम पूरी दुनिया के सामने है।
अमन पांडेय
Author: AK
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