कौन हैं चेतन दत्ता जिनके एक बटन दबाने से सुपरटेक ट्विन टॉवर मलबे में बदल गया

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दिनभर की भागमभाग और उल्टी गिनती गिनने के बाद आखिरकार अब नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर 9 सेकंड के वीडियो में गिरता हुआ कैद कर लिया गया और अब सिर्फ बच गई है उसके अवशेष। अवशेष भी इतना कि जिसपर एक गणित लगाना पड़े। 80 हजार टन के आसपास अनुमान है कि दोनों इमारतों से निकली है। नोएडा अथॉरिटी की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) रितु माहेश्वरी ने बताया कि 50 हजार टन मलबा ब्लास्ट साइट पर ही छोड़ दिया जाएगा। वहीं 30 हजार टन मलबे को सेक्टर 80 के कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन मैनेजमेंट प्लांट ले जाया जाएगा, जहां इसका साइंटिफिक तरीके से निपटान होगा। इसके साथ ही इमारत में प्रयोग किये गए लोहे को भी अलग करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी इमारत को एक बटन में ही धराशायी किसने किया होगा? आखिर वह शख्स कौन होगा जिसने इस बड़े और ऐतिहासिक कारनामे को अंजाम दिया होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय ब्लास्टर चेतन दत्ता ने एक बटन दबाया जिसके बाद महज 9 सेकंड में ट्विन टावर्स गिर गए। चेतन दत्ता को ब्लास्टिंग फील्ड में 20 सालों का अनुभव है। उन्हें 2012 में डायरेक्टोरेट जनरल माइनिंग सेफ्टी से ब्लास्टर का सर्टिफिकेट मिल चुका है। हाल ही में एक निजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में चेतन ने कहा था कि यह एक बेहद ही आसान प्रोसेस होता है। हम डायनमो से करंट उत्पन्न करते हैं और फिर बटन दबाते हैं, जो सभी शॉक ट्यूबों में डेटोनेटर को एक्टिवेट करेगा। 9 सेकंड में सभी डेटोनेटर एक्टिवेट हो जाएंगे और पूरी इमारत गिर जाएगी। इमारत के गिरते समय उनकी खुद की दूरी 50 मीटर की थी और ब्लास्टिंग वाला क्षेत्र लोहे की जाली की 4 परतों और कंबल की 2 परतों से ढका हुआ था। ताकि इमारत का मलबा तो नहीं उड़ेगा लेकिन धूल उड़ सकती है। इसलिए उसका कोई प्रभाव न पड़े।
काफी अरसे की प्रतीक्षा के बाद आखिरकार नोएडा सेक्टर 93(A) में बने ट्विन टावर को धराशायी कर दिया गया। पहले ये टावर्स 21 अगस्त तक गिराए जाने थे, लेकिन अदालत ने नोएडा प्राधिकरण के अनुरोध को स्वीकार कर तारीख 28 अगस्त तक बढ़ा दी थी। टावर्स गिराए जाने के बाद नोएडा CEO रितु महेश्वरी ने कहा कि आसपास की हाउसिंग सोसायटी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
साथ ही आसपास के लोगों को वीडियोग्राफी करने पर पूरी तरह से बैन कर दिया गया है। अपनी सोसायटी खाली करने वाले लोग शाम 7 बजे बाद अपने घरों में वापस आ सकते हैं लेकिन उसके लिए अधिकारी अनुमति लेनी होगी। इमारत को गिराए जाने के बाद आपात स्थिति में पड़ोस के फेलिक्स अस्पताल में करीब 50 बेड रिजर्व किए गए थे। धूल उड़ने से प्रदूषण न बढ़े इसके लिए पानी के 100 टैंकर, 15 एंटी स्मॉग गन, 6 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन, लगभग 200 सफाई कर्मी और 20 ट्रैक्टर ट्रॉली की व्यवस्था की गई। धूल से एमरॉल्ड टावर और एटीएस विलेज को बचाने के लिए जियो फाइबर क्लॉथ का इस्तेमाल किया गया।साथ ही ऑथोरिटी कई दिनों तक एरिया में पानी का छिड़काव करेगा।
Author: AK
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