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Aadhaar Deactivation 2025: आधार डिएक्टिवेशन 2025, 1.4 करोड़ आधार नंबर बंद, जानें UIDAI का बड़ा कदम

Aadhaar Deactivation 2025: Why 1.4 Crore Numbers Were Deactivated by UIDAI

UIDAI ने मृत व्यक्तियों के 1.4 करोड़ आधार नंबर डिएक्टिवेट किए। दिसंबर 2025 तक 2 करोड़ नंबर निष्क्रिय करने का लक्ष्य। जानें पूरा कारण और असर।


Aadhaar Deactivation 2025: Why 1.4 Crore Numbers Were Deactivated by UIDAI


प्रस्तावना: आधार से जुड़ी बड़ी खबर

देश में करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ आधार कार्ड (Aadhaar Card) के जरिए उठाते हैं। लेकिन क्या हो, अगर यह पहचान पत्र गलत हाथों में चला जाए? यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए 1.4 करोड़ से अधिक आधार नंबर निष्क्रिय (Deactivate) कर दिए हैं। खास बात यह है कि ये सभी नंबर मृत व्यक्तियों के थे। UIDAI का मानना है कि इस कदम से सरकारी योजनाओं का लाभ केवल योग्य और जीवित लाभार्थियों तक ही पहुंचेगा।


क्यों हुआ आधार नंबरों का डिएक्टिवेशन?

UIDAI ने स्पष्ट किया है कि यह कदम क्लीन-अप ड्राइव (Clean-up Drive) का हिस्सा है।

  • कई मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर भी सरकारी योजनाओं का लाभ जारी हो जाता था।
  • गलत डेटा और अधूरे रिकॉर्ड के कारण फर्जीवाड़े की संभावना बनी रहती थी।
  • सार्वजनिक धन (Public Funds) का दुरुपयोग रोकने और योजनाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक हो गया था।

UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा है कि मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय करना कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) की पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करता है।


UIDAI का लक्ष्य: दिसंबर 2025 तक 2 करोड़ नंबर बंद

फिलहाल UIDAI ने 1.4 करोड़ आधार नंबर डिएक्टिवेट किए हैं। लक्ष्य है कि दिसंबर 2025 तक 2 करोड़ मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए जाएं।

  • आधार वर्तमान में 3,300 से अधिक सरकारी योजनाओं से जुड़ा है।
  • अगर मृत व्यक्तियों के नाम पर योजनाओं का लाभ मिलता रहा तो करोड़ों का नुकसान हो सकता है।
  • UIDAI इस अभियान के जरिए गलत लाभ वितरण पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है।

मृत्यु पंजीकरण और आधार नंबर की चुनौती

UIDAI के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि भारत में मृत्यु पंजीकरण (Death Registration) में आधार नंबर दर्ज करना अनिवार्य नहीं है।

  • कई बार मृत्यु प्रमाण पत्र में आधार नंबर का उल्लेख नहीं होता।
  • कई जगह गलत या अधूरा नंबर दर्ज हो जाता है।
  • डेटा अलग-अलग संस्थानों (जैसे बैंक, बीमा कंपनी, पेंशन विभाग) में बिखरा रहता है।
  • सत्यापन और डेटा मिलान करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

इन खामियों की वजह से UIDAI को मृत व्यक्तियों के आधार की पहचान करने में समय और संसाधन अधिक खर्च करने पड़ते हैं।


मृत व्यक्तियों के नाम पर बंटा सरकारी लाभ

भारत में पहले कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां मृत व्यक्तियों के नाम पर भी पेंशन, सब्सिडी और अन्य सरकारी लाभ जारी कर दिए गए।

  • इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान होता है, बल्कि असली हकदारों तक मदद भी नहीं पहुंच पाती।
  • UIDAI का यह कदम इस समस्या को जड़ से खत्म करने की कोशिश है।

UIDAI की अपील नागरिकों से

UIDAI ने नागरिकों से अपील की है कि वे मृत्यु की सूचना माईआधार पोर्टल (myAadhaar portal) पर दर्ज कराएं।
सीईओ कुमार ने कहा कि सही और अद्यतन डेटा बनाए रखना भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली के लिए बेहद जरूरी है। इससे:

  • योजनाओं की पारदर्शिता बनी रहती है।
  • पहचान की धोखाधड़ी रोकी जा सकती है।
  • करोड़ों लाभार्थियों का हित सुरक्षित रहता है।

आधार और सरकारी योजनाओं पर असर

आधार को आज लगभग हर क्षेत्र में जरूरी बना दिया गया है।

  • बैंक खाता खोलना
  • सब्सिडी प्राप्त करना
  • पेंशन लेना
  • सरकारी परीक्षाओं में आवेदन
  • राशन वितरण

अगर मृत व्यक्तियों के आधार सक्रिय रहते तो इन सेवाओं में फर्जीवाड़े की संभावना बनी रहती। UIDAI का यह कदम इन सभी प्रक्रियाओं को और सुरक्षित बनाएगा।


डिजिटल इंडिया और आधार की भूमिका

भारत सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन में आधार की केंद्रीय भूमिका है।

  • यह दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है।
  • आधार से जुड़े डेटाबेस की शुद्धता ही इस मिशन की सफलता तय करेगी।
  • मृत व्यक्तियों के आधार डिएक्टिवेशन से यह प्रणाली और मजबूत होगी।

आगे की राह: UIDAI की रणनीति

UIDAI आने वाले समय में मृत्यु पंजीकरण और आधार डेटा को आपस में जोड़ने पर काम कर रहा है।

  • अगर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होते समय आधार नंबर दर्ज करना अनिवार्य किया जाए तो डेटा अधिक सटीक होगा।
  • वित्तीय संस्थानों और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय से गलत लाभ वितरण रोका जा सकेगा।

निष्कर्ष

UIDAI का 1.4 करोड़ आधार नंबर निष्क्रिय करने का निर्णय केवल तकनीकी कदम नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की पहल है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचेगा और फर्जीवाड़ा रुकेगा। दिसंबर 2025 तक 2 करोड़ आधार डिएक्टिवेट करने का लक्ष्य इस बात का संकेत है कि भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली (Digital Identity System) को और सशक्त बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।


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Author: AK

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