जहानाबाद में शिक्षक का 9 वर्षीय पुत्र अक्षय कुमार ढाई महीने से लापता है। परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई और पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
Jehanabad News: 9-year-old student missing for 75 days, family blames police
घटना का परिचय
बिहार के जहानाबाद जिले से एक दर्दनाक और रहस्यमय मामला सामने आया है। नगर थाना क्षेत्र के पूर्वी ऊंटा मोहल्ले में रहने वाले शिक्षक सतेंद्र पासवान का 9 वर्षीय पुत्र अक्षय कुमार पिछले ढाई महीने से लापता है। परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। 75 दिन बीत जाने के बाद भी बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिवार और स्थानीय लोगों में गहरी नाराज़गी है।
बच्चे के लापता होने की घटना
आखिरी बार खेलते हुए देखा गया
जानकारी के अनुसार, 2 जून की शाम अक्षय अपने घर के पास खेल रहा था। इसके बाद से वह अचानक गायब हो गया। घर वालों ने पहले आसपास तलाश की, लेकिन जब कोई पता नहीं चला तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
परिजनों का पड़ोसन पर शक
परिवार का आरोप है कि पड़ोस में किराये पर रह रही एक महिला इस मामले में संदिग्ध है। उसी महिला ने परिजनों को फोन कर बताया था कि बच्चा ट्रेन से गया की ओर जाते हुए देखा गया है। लेकिन, कुछ ही समय बाद वह खुद शादी समारोह का बहाना बनाकर घर लौट आई। इस पूरे घटनाक्रम ने परिजनों के शक को और गहरा कर दिया।
पुलिस पर गंभीर सवाल
75 दिन बाद भी कोई ठोस कदम नहीं
घटना को ढाई महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी है। न तो संदिग्ध महिला से गहन पूछताछ हुई और न ही तकनीकी जांच के आधार पर बच्चे का कोई सुराग मिला।
परिवार का आरोप – “जांच सिर्फ कागज़ों तक सीमित”
लापता छात्र के परिजनों का कहना है कि पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। जांच की फाइलें आगे-पीछे हो रही हैं, लेकिन नतीजा शून्य है। पीड़ित मां की हालत बेहद खराब है और वह लगातार बेटे की सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश
स्थानीय लोग कर रहे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
पूर्वी ऊंटा मोहल्ले और आसपास के ग्रामीणों में पुलिस की निष्क्रियता को लेकर आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटना ने इलाके की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों का आरोप है कि संदिग्ध किरायेदार की पृष्ठभूमि तक की जांच पुलिस ने ठीक से नहीं की। इससे आशंका है कि बच्चा कहीं और ले जाया गया हो और पुलिस समय रहते कदम उठाने में नाकाम रही।
प्रशासन से गुहार
मुख्यमंत्री और डीजीपी से लगाई मदद की अपील
पीड़ित परिवार ने अब मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री और डीजीपी से बेटे की सुरक्षित बरामदगी की अपील की है। उनका कहना है कि यदि पुलिस सही दिशा में काम करती तो अब तक बेटे का पता चल गया होता।
पुलिस का आधिकारिक रुख
इस मामले पर जब पुलिस अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से परहेज किया। हालांकि, एसडीपीओ मनीष चंद्र चौधरी ने ऑफ कैमरा बताया कि जांच जारी है। लेकिन परिवार का आरोप है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है।
अपहरण की आशंका और जांच की चुनौतियाँ
अपहरण की ओर इशारा करती परिस्थितियाँ
- महिला का संदिग्ध व्यवहार
- घटना के दिन का असामान्य फोन कॉल
- बच्चे का अचानक गायब होना
ये सभी परिस्थितियां अपहरण की आशंका को बल देती हैं।
जांच में देरी क्यों?
स्थानीय लोगों का मानना है कि शुरुआती समय में पुलिस ने तत्परता नहीं दिखाई। जिस कारण अब मामले की गुत्थी और उलझती जा रही है। मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और सीसीटीवी फुटेज जैसे आधुनिक साधनों का भी पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया।
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Author: AK
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