उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 में विपक्षी उम्मीदवार पर सस्पेंस जारी है। एनडीए ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है, जबकि विपक्ष की बैठक में तीन बड़े नामों पर चर्चा हो रही है।
Vice President Election 2025: Opposition Candidate Likely Today
प्रस्तावना
भारत का उपराष्ट्रपति चुनाव केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं बल्कि सियासत की दिशा और विपक्ष की एकजुटता की असली परीक्षा भी होता है। 9 सितंबर 2025 को होने वाले इस चुनाव ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल बढ़ा दी है। जहां एनडीए ने अपने उम्मीदवार का नाम पहले ही घोषित कर दिया है, वहीं विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक अब तक सस्पेंस बनाए हुए है। दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष तीन बड़े नामों पर मंथन कर रहा है और आज की बैठक में किसी एक पर मुहर लग सकती है।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की तारीखें
चुनाव आयोग की घोषणा के मुताबिक, उपराष्ट्रपति पद का चुनाव 9 सितंबर 2025 को होना है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त 2025 तय की गई है।
- एनडीए की तरफ से उम्मीदवार का नाम पहले ही घोषित किया जा चुका है।
- विपक्षी दलों की अहम बैठक आज दोपहर 12:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बुलाई गई है।
एनडीए का दांव: सी.पी. राधाकृष्णन
सत्ताधारी एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु के अनुभवी नेता सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। भाजपा का यह दांव दो मायनों में खास है:
- तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश।
- विपक्षी खेमे को दुविधा में डालना, क्योंकि राधाकृष्णन की छवि साफ-सुथरी और सर्वमान्य मानी जाती है।
भाजपा की रणनीति यह भी है कि दक्षिण भारत की राजनीति में अपनी उपस्थिति को और मजबूत किया जाए।
विपक्ष की चुनौती: उम्मीदवार पर सहमति
इंडिया ब्लॉक यानी विपक्षी गठबंधन अब तक अपने उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर पाया है। वजह साफ है—विभिन्न दलों के बीच आपसी सहमति बनाना आसान नहीं है। हालांकि, तीन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है।
विपक्ष के संभावित उम्मीदवार
1. मैलस्वामी अन्नादुरई (पूर्व इसरो वैज्ञानिक)
- चंद्रयान-1 परियोजना के प्रमुख रहे अन्नादुरई को देश वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए जानता है।
- विपक्ष उन्हें “विज्ञान, प्रगति और आधुनिक भारत” का चेहरा बनाकर पेश करना चाहता है।
- इससे संदेश जाएगा कि विपक्ष विकास और विज्ञान के जरिए राजनीति करना चाहता है।
2. तिरुचि सिवा (डीएमके सांसद)
- राज्यसभा में डीएमके के कद्दावर नेता और तमिलनाडु की राजनीति का बड़ा चेहरा।
- संसद में उनकी सक्रियता और संविधान की समझ उन्हें विपक्ष का मजबूत दावेदार बनाती है।
- विपक्ष अगर दक्षिण भारत से राजनीतिक संतुलन साधना चाहता है, तो तिरुचि सिवा का नाम प्रासंगिक है।
3. तुषार गांधी (महात्मा गांधी के परपौत्र)
- गांधी परिवार से जुड़ाव उन्हें एक अलग पहचान देता है।
- विपक्ष चाहता है कि यह चुनाव “लोकतंत्र और संविधान की रक्षा” की लड़ाई के रूप में लड़ा जाए।
- ऐसे में तुषार गांधी का नाम सांकेतिक और राजनीतिक दोनों रूप से असरदार हो सकता है।
विपक्ष की रणनीति और संदेश
इंडिया ब्लॉक की कोशिश है कि उपराष्ट्रपति चुनाव को केवल सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष की लड़ाई न बनाकर, “लोकतंत्र और संविधान की रक्षा” का मुद्दा बनाया जाए। यही वजह है कि उम्मीदवार चुनते समय वे केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं बल्कि संदेश और प्रतीकात्मकता पर भी ध्यान दे रहे हैं।
क्या विपक्ष में सहमति बन पाएगी?
इतिहास गवाह है कि जब भी विपक्षी दल किसी एक नाम पर सहमत नहीं हो पाए, सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी पड़ा है।
- 2017 में एनडीए उम्मीदवार वेंकैया नायडू आसानी से जीत गए थे।
- 2022 में भी विपक्ष का उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को बड़ी हार झेलनी पड़ी थी।
इस बार भी अगर विपक्ष अपने उम्मीदवार पर एकजुट नहीं हो पाया तो एनडीए की राह आसान हो जाएगी।
उपराष्ट्रपति चुनाव की अहमियत
भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है। इसलिए यह पद केवल औपचारिक नहीं बल्कि संवैधानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
- राज्यसभा में बहस और कानून निर्माण की प्रक्रिया को संचालित करना उपराष्ट्रपति की जिम्मेदारी होती है।
- विपक्ष इस पद को अपनी आवाज को मजबूत करने का अवसर मान रहा है।
एनडीए बनाम विपक्ष: किसका पलड़ा भारी?
संख्याबल के हिसाब से देखें तो फिलहाल एनडीए का पलड़ा भारी है।
- लोकसभा और राज्यसभा के सांसद मिलाकर एनडीए के पास बहुमत है।
- हालांकि, विपक्ष यदि कोई सर्वमान्य उम्मीदवार उतारता है, तो यह चुनाव केवल आंकड़ों का नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश का भी बन सकता है।
निष्कर्ष
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 भारतीय राजनीति का एक और बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। जहां एनडीए ने अपने पत्ते खोल दिए हैं, वहीं विपक्ष की रणनीति अभी भी सस्पेंस में है। मैलस्वामी अन्नादुरई, तिरुचि सिवा और तुषार गांधी जैसे नाम विपक्ष की सोच को दिशा दे सकते हैं, लेकिन सवाल यही है—क्या विपक्ष किसी एक नाम पर सहमत हो पाएगा?
अगर विपक्ष एकजुट नहीं हुआ तो यह चुनाव भी सत्ता पक्ष के लिए आसान हो जाएगा। लेकिन अगर विपक्ष किसी सर्वमान्य और प्रभावी उम्मीदवार को सामने लाता है, तो यह मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
- उपराष्ट्रपति चुनाव 2025
- विपक्ष का उम्मीदवार
- एनडीए उम्मीदवार
- इंडिया ब्लॉक बैठक
- उपराष्ट्रपति पद के दावेदार
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Author: AK
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