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Bihar SIR News: बिहार में 60 लाख वोटर सूची से बाहर? विदेशी घुसपैठ का खुलासा

Bihar Voter List Controversy: 655 Duplicate Entries in Darbhanga

बिहार में 60 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की तैयारी, तीन देशों के नागरिकों की घुसपैठ का खुलासा, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शेष।

Who Are Bihar’s 60 Lakh Voters Under Scrutiny? Foreign Infiltration Revealed


बिहार में वोटर लिस्ट से 60 लाख नाम हटेंगे? तीन देशों के नागरिकों की घुसपैठ से मचा बवाल

प्रस्तावना: वोटर लिस्ट की सबसे बड़ी सफाई?

बिहार में इन दिनों मतदाता सूची को लेकर गहमागहमी चरम पर है। चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) ने एक ऐसा आंकड़ा पेश किया है, जिसने पूरे राज्य की राजनीति और प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। बताया जा रहा है कि तकरीबन 60.5 लाख वोटर ऐसे हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। यह आंकड़ा तब और चौंकाने वाला हो जाता है जब यह पता चलता है कि इनमें से कई वोटर तीन देशों – बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के हो सकते हैं।

लेकिन सवाल उठता है – ये लोग कौन हैं, कहां से आए और आखिर इतने सालों तक कैसे वोटर लिस्ट में शामिल रहे?


वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का उद्देश्य और प्रक्रिया

क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)?

एसआईआर एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य है वोटर लिस्ट की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना। बिहार में यह अभियान 25 जुलाई तक चला, और इस दौरान 99.8% मतदाताओं की फिजिकल वेरिफिकेशन की गई। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाता की जानकारी जुटाते हैं और दस्तावेजों की जांच करते हैं।

हटाए जाने वाले मतदाताओं की संख्या

चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:

  • 1 लाख लोग पूरी तरह से नहीं मिले
  • 1.2 लाख मतदाताओं ने फॉर्म ही नहीं जमा किया
  • 22 लाख लोग मृत पाए गए
  • 35 लाख स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं
  • 7 लाख मतदाता दो जगह रजिस्टर्ड थे

अगर ये मतदाता समय रहते अपनी पात्रता साबित नहीं करते, तो 30 सितंबर की अंतिम मतदाता सूची में उनके नाम नहीं रहेंगे।


विदेशी नागरिकों की घुसपैठ का शक

BLO की रिपोर्ट ने खोली पोल

BLO की फील्ड रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की सीमावर्ती जिलों – खासकर सीमांचल, जो कि बांग्लादेश और नेपाल की सीमा से सटे हैं – वहां बड़ी संख्या में संदिग्ध मतदाता पाए गए। इनमें से कुछ बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के नागरिक हो सकते हैं।

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि “फर्जी वोटर और विदेशी नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकता”, और इनकी पहचान कर उन्हें हटाना जरूरी है।

कैसे होती है पहचान?

यदि BLO को कोई मतदाता संदिग्ध लगता है तो उसका केस निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को भेजा जाता है। ERO इसके लिए क्षेत्रीय जांच, दस्तावेजी प्रमाण और नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत साक्ष्य जुटाता है।


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और राजनीतिक हंगामा

वैधता पर उठे सवाल

इस पूरे अभियान की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट 28 जुलाई को इस मुद्दे पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए लोगों को बिना वजह मताधिकार से वंचित किया जा रहा है

चुनाव आयोग का कहना है कि वे सिर्फ वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित कर रहे हैं और यह काम कानून के तहत हो रहा है।

विपक्षी दलों का विरोध

तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी जैसे विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया को राजनीतिक चाल करार दिया है। उनका कहना है कि इससे दलित, पिछड़े और गरीब तबके के वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है।


कौन हैं ये 60 लाख वोटर?

सीमांचल क्षेत्र मुख्य संदिग्ध

अधिकांश 60 लाख संदिग्ध वोटर बिहार के कटिहार, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, सहरसा जैसे जिलों से संबंधित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में बांग्लादेश और नेपाल के साथ खुली सीमा है और बीते वर्षों में बड़ी संख्या में माइग्रेशन की भी खबरें रही हैं।

वोटर का अधिकार और अपील की प्रक्रिया

अगर किसी मतदाता का नाम हटाया जाता है, तो उसे 45 दिनों का समय दिया जाएगा अपने पक्ष में अपील करने का। इसके लिए उसे संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे – जैसे:

  • जन्म प्रमाणपत्र
  • निवास प्रमाणपत्र
  • आधार कार्ड या EPIC
  • माता-पिता की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज

दस्तावेज जमा करने की चुनौती

सबसे बड़ी चुनौती दस्तावेजी प्रमाण को लेकर है। चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार, मतदाता को स्वयं और माता-पिता के जन्म प्रमाणपत्र देने होंगे। बिहार जैसे राज्य में जहां दस्तावेजी व्यवस्था पहले से कमजोर रही है, यह एक कठिनाई भरा कदम हो सकता है।

हालांकि आयोग ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया कि जमा किए गए 99.8% फॉर्म्स में से कितने में पर्याप्त दस्तावेज हैं।


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Author: AK

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