
दुनिया में कोई भी देश कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो लेकिन अगर उसका पड़ोस मजबूत नहीं है तो वह भी अपने आप को असुरक्षित महसूस करता है। अगर भारत की बात करें तो आजादी के बाद से ही पड़ोसी पाकिस्तान सिरदर्द बना हुआ है। पाकिस्तान के साथ पड़ोसी नेपाल और चीन भी भारत के लिए समय-समय पर तनाव पैदा करते रहे हैं। पाकिस्तान, नेपाल और चीन के साथ इन दिनों बांग्लादेश भी भारत को अकड़ दिखा रहा है। इस बीच श्रीलंका ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह हमेशा साथ खड़ा रहेगा। करीब दो साल पहले आर्थिक संकट के बाद खस्ताहाल हुआ श्रीलंका की मदद भारत ने की थी। भारत के किए गए सहयोग और आर्थिक मदद को श्रीलंका भूला नहीं है। पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ तनातनी के बीच भारत को श्रीलंका के साथ विश्वास भरी दोस्ती की जरूरत भी है। तीन दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली आए श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। अपने पहले विदेश दौरे पर भारत पहुंचे श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। दिसानायके ने कहा, हमने 2 साल पहले बड़े आर्थिक संकट का सामना किया था। भारत ने हमें उस दलदल से बाहर निकलने में बहुत मदद की थी।
हम अपने देश की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होने देंगे। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-श्रीलंका संबंध गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों, भौगोलिक निकटता और लोगों के आपसी संबंधों पर आधारित हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमने अपनी साझेदारी के लिए एक फ्यूचरिस्टिक विजन अपनाया है। भारत, श्रीलंका के यूनीक आइडेंटिफिकेशन प्रोजेक्ट का समर्थन करने के लिए राजी हुआ है। श्रीलंका में भी भारत के आधार कार्ड की तरह डिजिटल आईडी बनेगी। इसके अलावा भारत, उत्तरी श्रीलंका में एक एयरपोर्ट के लिए आर्थिक मदद देगा। दोनों देशों के बीच सामपुर सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट और श्रीलंका में रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ाने पर चर्चा हुई। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने कहा, श्रीलंका का राष्ट्रपति बनने के बाद यह मेरी विदेश यात्रा है। मुझे बहुत खुशी है कि मैं अपनी पहली राजकीय यात्रा पर दिल्ली आ सका। मुझे दिए गए निमंत्रण के लिए और मेरे सहित पूरे प्रतिनिधिमंडल को प्रदान किए गए गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए मैं भारत को धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू को धन्यवाद देना चाहता हूं।








इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और विकसित करने का मार्ग प्रशस्त किया। दिसानायके ने कहा, भारत के साथ सहयोग निश्चित रूप से फलेगा-फूलेगा। और मैं भारत के लिए हमारे निरंतर समर्थन का आश्वासन देना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साथ ही घोषणा की कि दोनों देशों के बीच संपर्क सुविधा बेहतर करने के लिए रामेश्वरम और तलाईमनार के बीच नौका सेवा शुरू की जाएगी। मोदी ने कहा, हमने संयुक्त रूप से निर्णय लिया है कि नागपत्तनम-कांकेसंथुराई नौका सेवा की सफल शुरुआत के बाद हम रामेश्वरम और तलाईमन्नार के बीच भी नौका सेवा शुरू करेंगे। श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर चीन की बढ़ती गतिविधियों से भारत की चिंता और बढ़ गई है। चीन ने कर्ज के बदले यह बंदरगाह अपने कब्जे में ले लिया है। वह यहां अपने जासूसी जहाज भेजता रहा है। पिछले दो सालों में चीन ने कई बार अपना 25,000 टन का युआन वांग 5 जहाज हम्बनटोटा में तैनात किया है। यह जहाज सैटेलाइट और बैलिस्टिक मिसाइलों पर नजर रखने में सक्षम है। भारत के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि श्रीलंका भारत के बहुत करीब है।इस संबंध में अगस्त 2022 में भारत ने अपनी चिंता श्रीलंका से जाहिर की थी।
श्रीलंका ने पहले चीन से जहाज की तैनाती टालने को कहा था। लेकिन बाद में उसे ‘रसद’ लेने के लिए बंदरगाह पर रुकने की इजाजत दे दी। तब से चीनी जासूसी जहाज नियमित रूप से हिंद महासागर में गश्त लगा रहे हैं और हम्बनटोटा बंदरगाह पर रुक रहे हैं। युआन वांग 5 शिप में मजबूत ट्रैकिंग, सेंसिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम है। यह विदेशी उपग्रहों, हवाई संपत्तियों और मिसाइल सिस्टम का पता लगा सकता है।चीन ने हम्बनटोटा बंदरगाह 99 साल की लीज पर लिया है। श्रीलंका इस बंदरगाह के निर्माण के लिए चीन से लिए गए 1.7 बिलियन डॉलर के कर्ज का सालाना 100 मिलियन डॉलर का भुगतान नहीं कर पा रहा था। बंदरगाह का पहला फेज 2010 में पूरा हुआ था। भारत के साथ हुए इस नए समझौते में श्रीलंका ने आश्वासन दिया है कि उसकी जमीन और पानी का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी तरह से नहीं किया जाएगा। साथ ही, ऐसे किसी भी काम के लिए नहीं किया जाएगा जिससे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो।
Author: AK
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