
आखिरकार सीरिया का भी वही हश्र हुआ जो बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान का हुआ था। विद्रोहियों और कट्टरपंथियों ने सीरिया को कब्जे में ले लिया। सीरिया में सरकार और शासन व्यवस्था खत्म हो गई। दुनिया के एक और लोकतांत्रिक देश सीरिया का विद्रोहियों और लड़ाकों ने दम घोट दिया। इसके साथ ही सीरिया में पांच दशक से जारी असद परिवार के साम्राज्य का अंत हो गया है। असद की सत्ता जाने पर विरोधी खुशी भी मना रहे हैं। डर और दहशत के मारे सीरियाई नागरिक देश छोड़कर भाग रहे हैं।
एयरपोर्ट और बॉर्डरों पर लोगों की लाइनें लगी हुई है। सीरिया दुनिया के लिए तमाशा बन गया है । इसके साथ यह घटना भारत समेत कई लोकतांत्रिक देशों के लिए एक “सबक” भी है। इस पूरी घटना को अमेरिका, रूस समेत तमाम का कद्दावर देश देखते रहे। राजधानी दमिश्क समेत कई शहरों में विद्रोही खुलेआम सड़कों पर हथियार लेकर घूम रहे हैं। सीरिया से ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिसमें लोगों को राष्ट्रपति भवन के भीतर लूटपाट करते और हुड़दंग मचाते देखा गया। इसी तरह की लूटपाट श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन, बांग्लादेश के बंगभवन और काबुल से भी देखने को मिली थी। कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। सीरिया में हुआ तख्तापलट विश्व भर में छाया हुआ है।
पिछले दिनों विद्रोही गुटों ने राजधानी दमिश्क पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर भाग गए। ऐसे मौके पर राष्ट्रपति असद की रूस ने मदद की है। बशर अल-असद मास्को में अपने परिवार के साथ शरण ली। बता दें कि सीरियाई प्रधानमंत्री ने विद्रोहियों को सत्ता सौंपने का प्रस्ताव दिया। 11 दिन से विद्रोही गुटों और सेना के बीच कब्जे की लड़ाई चल रही थी। दमिश्क, दारा, अलेप्पो, हमा और होम्स पर इस्लामी चरमपंथी ग्रुप हयात तहरीर अल-शाम का कब्जा है। इसके साथ स्थानीय विद्रोहियों ने भी कब्जा किया है।





“Rebels Devastate Syria: Nation Plunges into Chaos Amidst Government Overthrow”
असद के सत्ता से हटने के साथ ही सीरिया में करीब 54 साल लंबे असद परिवार के शासन का अंत हो गया। बशर के पिता हाफिज अल-असद 1971 में सीरिया के राष्ट्रपति बने और अगले 29 साल तक पद पर रहे। साल 2000 में हाफिज की मौत के बाद बशर ने सत्ता संभाली थी । राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर रूस भाग गए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने असद और उनके परिवार को राजीतिक शरण दी है।
अमेरिका ने सीरिया में असद सरकार के पतन का स्वागत किया है। वहीं, असद सरकार के सहयोगी ईरान ने सीरिया में हुए तख्तापलट को लेकर हैरानी जताई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रविवार को कहा कि वे इस बात से हैरान हैं कि सीरियाई सेना, विद्रोहियों को रोक नहीं सकी, यह सब बहुत तेजी से हुआ। अरागची ने यह भी कहा कि सीरिया के राष्ट्रपति असद ने ईरान से कोई मदद नहीं मांगी थी। वहीं इस पूरी घटना में भारत सरकार भी नजर बनाए हुए हैं। पिछले दिनों विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को सीरिया छोड़ने की एडवाइजरी जारी की थी।
साल 2011 से सीरिया गृहयुद्ध की चपेट में था, रूसी सेना राष्ट्रपति असद की मदद कर रही थी–
साल साल 2011 के बाद से ही सीरिया गृह युद्ध की चपेट में था और उसके बहुत बड़े भूभाग पर कई सशस्त्र गुटों का कब्जा हो गया था। लेकिन रूसी सेना की सीरिया में मौजूदगी के चलते असद की सत्ता 13 वर्ष कायम रही थी। फरवरी, 2022 से जारी यूक्रेन युद्ध का असर सीरिया में रूसी सेना की मजबूती पर पड़ा और चंद रोज की लड़ाई में विद्रोही भारी पड़ गए। विद्रोह का रूस पर बड़ा असर होगा। पश्चिमी एशिया में सीरिया उसका सबसे भरोसेमंद पार्टनर है। साथ ही 2011 में बशर के खिलाफ विद्रोह के बाद से रूस बशर को हर तरह की सैन्य, आर्थिक व रणनीतिक मदद देता रहा है। भारत व सीरिया के रिश्ते ऐतिहासिक हैं।
विद्रोह नहीं रुका तो कच्चे तेल के दामों में उछाल देखने को मिलेगा। इससे भारत पर असर पड़ेगा। वहीं, हाल में पावर और सोलर प्लांट प्रोजेक्ट पर दोनों मुल्क साथ काम कर रहे हैं। भारत ने 2022 में इसके लिए 28 करोड़ डॉलर की मदद की घोषणा की थी। विद्रोह के बढ़ने पर इन प्रोजेक्ट पर असर होगा। 2008 में बशर भारत का दौरा कर चुके हैं। सीरिया भूराजनीतिक रूप से अहम है। इसकी सीमा इराक, तुर्किये, जॉर्डन, लेबनान व इजराइल जैसे देशों से लगती है।
सीरिया पर नियंत्रण अहम व्यापार मार्गों, ऊर्जा गलियारों तक पहुंच प्रदान करता है, और पूरे क्षेत्र में प्रभाव डालने के लिए एक आधार प्रदान करता है।होम्स और दमिश्क पर विद्रोहियों के कब्जे के बाद दोनों शहरों से लोगों का पलायन शुरू हो गया है। भविष्य की अनिश्चितता के चलते हजारों लोगों ने घर छोड़ दिया है। देश पर कब्जे की लड़ाई छिड़ने की आशंका से अभी तक करीब चार लाख लोग घर छोड़ चुके हैं, आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ने के आसार हैं। इन लोगों को रोकने के लिए जार्डन और लेबनान ने पहले ही अपनी सीमाएं बंद कर दी हैं। फिलहाल सीरिया में हालात बयां कर रहे हैं कि यह देश अब लंबे समय तक विद्रोहियों के कब्जे में रहने वाला है।
Author: AK
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