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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा की जिम्मेदार मोहम्मद यूनुस सरकार, पूर्व पीएम शेख हसीना ने लगाए आरोप

Sheikh Hasina Blames Mohammad Yunus Government for Violence Against Hindus in Bangladesh
Sheikh Hasina Blames Mohammad Yunus Government for Violence Against Hindus in Bangladesh

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा और मंदिरों पर हमले की घटनाएं बढ़ती जा रही है। ‌यूनुस सरकार के दावों के बावजूद अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। सुमनगंज जिले में कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं के घरों पर हमला बोल दिया। भीड़ ने बीते दिन हिंदुओं के घरों पर हमला बोल दिया। हिंदू युवक पर फेसबुक पोस्ट में ईश निंदा का आरोप लगाकर हिंसा को अंजाम दिया गया।
उपद्रवी भीड़ ने 100 से ज्यादा हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ की। घर में बने पूजा स्थलों को भी छोड़ा नहीं गया। टाइम ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में 200 से अधिक हिंदू परिवार पलायन कर चुके हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में तनाव आ गया। वहीं पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय हमलों का ग्राफ बढ़ रहा है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोहम्मद यूनिस सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। ‌शेख हसीना ने देश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर ‘नरसंहार’ करने और हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है।

बांग्लादेश में अगस्त में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण इस्तीफा देने के बाद भारत में शरण लेने के बाद उनका यह पहला सार्वजनिक संबोधन था, हालांकि उन्होंने बांग्लादेश की समग्र स्थिति पर टिप्पणी की थी। शेख हसीना ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर कड़ा प्रहार किया। शेख हसीना ने यूनुस पर आरोप लगाया कि उन्होंने अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने में बांग्लादेश की सरकार नाकाम रही है। इतना ही नहीं, हसीना ने यह भी आरोप लगाया कि यूनुस ने हिंदुओं के नरसंहार में सक्रिय रूप से भाग लिया और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान और बहन शेख रेहाना की हत्या की साजिश रची गई थी। शेख हसीना ने अपने वर्चुअल संबोधन में 5 अगस्त को ढाका में हुई हिंसा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हथियारबंद प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास गणभवन में घुसने की कोशिश की थी। हसीना ने कहा कि अगर उनके सुरक्षा गार्डों ने गोलीबारी की होती, तो बड़ी संख्या में लोग मारे जा सकते थे। हालांकि, उन्होंने गार्डों को गोली न चलाने का निर्देश दिया था। इस घटना के बाद उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

हसीना ने कहा कि ढाका में मौजूदा सत्तारूढ़ सरकार अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल रही है। हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का परोक्ष संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, हिंदू, बौद्ध, ईसाई किसी को भी नहीं बख्शा गया है। 11 गिरजाघरों को ध्वस्त कर दिया गया है, मंदिरों और बौद्ध उपासनास्थलों को तोड़ दिया गया है। जब हिंदुओं ने विरोध किया, तो इस्कॉन नेता को गिरफ्तार कर लिया गया। दूसरी ओर, मोहम्मद यूनुस ने भी शेख हसीना पर तीखा हमला किया। उन्होंने हसीना सरकार पर लोकतंत्र खत्म करने और फर्जी चुनावों के जरिए सत्ता हथियाने का आरोप लगाया। यूनुस ने हसीना के शासन को फासीवादी बताते हुए कहा कि यह सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ काम कर रही है। भारत ने पिछले सप्ताह कहा था कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, क्योंकि उसने चरमपंथी बयानबाजी और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। नई दिल्ली ने यह भी उम्मीद जताई कि देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार चिन्मय कृष्ण दास से संबंधित मामले को न्यायसंगत, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निपटाया जाएगा।

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Author: AK

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