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पाकिस्तान से भी बांग्लादेश में भयावह हालत, कट्टरपंथियों ने तीन हिंदू मंदिरों में की तोड़फोड़, भारत ने जताया विरोध

Situation in Bangladesh worse than Pakistan, fundamentalists vandalised three Hindu temples, India protested

इसी साल अगस्त महीने में शेख हसीना सरकार का तख्ता पलट करने के बाद बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं और मंदिरों पर हमले हो रहे हैं। बांग्लादेश की सरकार इसे रोकने में पूरी तरह से नाकामयाब है। तीन महीनों से बांग्लादेश में पाकिस्तान से भी भयावह हालत हैं । हिंदू डर के साए में है। कट्टरपंथी हिंदुओं को निशाना बनाने में लगे हुए हैं। इसके साथ मंदिरों पर भी तोड़फोड़ और हमले किए जा रहे हैं। बांग्लादेश के सरकार इसे रोकने में पूरी तरह से असफल है। अब एक बार फिर बांग्लादेश के चट्टोग्राम में कट्टरपंथियों की भीड़ ने तीन हिंदू मंदिरों में जमकर तोड़फोड़ की। न्यूज पोर्टल ‘बीडीन्यूज24 डॉट कॉम’ ने अपनी खबर में कहा कि यह हमला बंदरगाह शहर के हरीश चंद्र मुनसेफ लेन में दोपहर करीब 2:30 बजे हुआ। इस दौरान शांतानेश्वरी मातृ मंदिर, शनि मंदिर और शांतनेश्वरी कालीबाड़ी मंदिर को निशाना बनाया गया। नारेबाजी कर रहे सैकड़ों लोगों के एक समूह ने मंदिरों पर ईंट-पत्थर फेंके, जिससे शनी मंदिर और अन्य दो मंदिरों के द्वार क्षतिग्रस्त हो गए। कोतवाली पुलिस स्टेशन के प्रमुख अब्दुल करीम ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि हमलावरों ने मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। पुलिस ने कहा कि मंदिरों को बहुत कम नुकसान हुआ है। बांग्लादेश सरकार के हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमले रोकने में नाकाम होने पर भारत सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई है। बता दें, बांग्लादेश में इस्कॉन पुजारी चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किये जाने के बाद से चट्टोग्राम में विरोध प्रदर्शन जारी है।वहीं, बांग्लादेश की सरकार ने इस्कॉन के पूर्व सदस्य चिन्मय कृष्ण दास सहित इस धार्मिक संस्था से संबद्ध 17 लोगों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों से लेन-देन पर 30 दिन के लिए रोक लगाने का आदेश दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश वित्तीय खुफिया इकाई (बीएफआईयू) ने विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ये निर्देश जारी करते हुए इन खातों से सभी तरह के लेन-देन पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी। वहीं बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाओं के प्रदर्शन और हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा की आंच देश के कई हिस्सों में महसूस की जा रही है। देश के साथ एकजुटता दिखाते हुए कोलकाता के मानिकताला स्थित एक अस्पताल ने कहा है कि वह अब बांग्लादेश से आने वाले मरीजों का इलाज नहीं करेगा। जेएनराय अस्पताल के एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश के नागरिकों ने भारतीय तिरंगे के प्रति जो असम्मान दिखाया है, यह फैसला उसी का नतीजा है। अस्पताल के अधिकारी सुभ्रांशु भक्त ने शुक्रवार को कहा कि ‘आज से अनिश्चित समय तक इलाज के लिए हम बांग्लादेशी मरीजों को भर्ती नहीं करेंगे, इस बारे में हमने एक अधिसूचना जारी की है। भारत के प्रति उन्होंने जो असम्मान प्रकट किया है, यह फैसला उसी के लिए है। बांग्लादेश में लगातार हो रहे हिंदू विरोधी घटनाओं के कारण दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच राजनयिक विवाद पैदा हो गया है। भारत ने 29 नवंबर को एक बयान में कहा कि बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदू समुदाय के खिलाफ नफरती बयानबाजी, हिंसा की घटनाओं के साथ-साथ मंदिरों पर हमलों के मामले बढ़े हैं। भारत ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार को सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद को बताया कि भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों सहित सभी नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करना ढाका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, बांग्लादेश ने शुक्रवार को कोलकाता में अपने उप उच्चायोग पर हिंसक विरोध प्रदर्शन पर गहरी चिंता व्यक्त की और नई दिल्ली से भारत में अपने सभी राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

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Author: AK

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