
भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में जनता ने इस बार वामपंथी नेता अनुरा कुमार दिसानायके पर भरोसा जताया है। राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे परिवार की बहुत बुरी हार हुई है। साल 2022 के आर्थिक संकट के बाद पटरी पर लौट रहे श्रीलंका में शनिवार को राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले गए। वर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और साजिथ प्रेमदासा पर को श्रीलंका की जनता ने निकाल दिया है। दिसानायके अन्य उम्मीदवारों से आगे चल रहे हैं।


श्रीलंका में किसी उम्मीदवार की जीत के लिए 51% वोट की जरूरत होती है। दूसरे नंबर पर चल रहे विपक्षी नेता सजीथ प्रेमदासा रहे हैं।ऐसे में अनुरा दिसानायके का श्रीलंका का अगला राष्ट्रपति बनना लगभग तय हो गया है। बता दें, श्रीलंका के 10वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 21 सितंबर को मतदान हुआ था। वर्ष 2022 के आर्थिक संकट और देशव्यापी हिंसा के बाद श्रीलंका में यह पहला चुनाव है। इस दौरान, सभी 22 निर्वाचन जिलों में कहीं से भी हिंसा या सुरक्षा उल्लंघन की कोई खबर नहीं आई।
दिसानायके ने नेशनल पीपुल्स पावर गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसमें उनकी मार्क्सवादी-झुकाव वाली जनता विमुक्ति पेरेमुना पार्टी भी शामिल है। बता दें कि 2022 के आर्थिक संकट के बाद श्रीलंका में गोटबाया सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर जन विद्रोह हुआ था। प्रदर्शनकारी कोलंबो में राष्ट्रपति भवन में घुस गए थे, जिसके बाद गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा था। इस मुश्किल घड़ी में रानिल विक्रमसिंघे ने देश की बागडोर संभाली थी। मतगणना के शुरुआती चरण में दिसानायके 53 फीसदी वोट प्राप्त करके राष्ट्रपति पद की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे थे।



हालांकि, पहले दौर की मतगणना पूरी होने के बाद वह 50 फीसदी का आंकड़ा नहीं छू सके। वहीं विदेश मंत्री अली साबरी ने एक्स पर एक पोस्ट में दिसानायके को उनकी जीत के लिए बधाई दी। उन्होंने लिखा, ‘लंबे और थका देने वाले अभियान के बाद, राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे अब स्पष्ट हैं। मैंने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के लिए जोरदार प्रचार किया, लेकिन श्रीलंका के लोगों ने अपना निर्णय बता दिया है और मैं अनुरा कुमारा दिसानायके के लिए उनके जनादेश का पूरा सम्मान करता हूं। एक लोकतंत्र में जनता के निर्णय का सम्मान करना महत्वपूर्ण है और मैं बिना किसी हिचकिचाहट के इसे स्वीकार कर रहा हूं। दिसानायके और उनकी टीम को जीत की हार्दिक बधाई।

दिसानायके तो कई मौकों पर भारत का विरोध कर चुके हैं. साथ ही उनकी मार्क्सवादी, लेनिनवादी झुकाव को ध्यान में रखें तो वे भविष्य में चीन के समर्थक साबित होंगे। लेकिन, दिसानायके से हटकर उनके गठबंधन के नेताओं ने भारत के साथ मित्रवत संबंध पर भी जोर दिया। हालांकि, अब देखना होगा कि चुनाव के नतिजों के बाद श्रीलंका अपनी विदेश नीति कैसा रखता है।
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Author: AK
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