व्लादिमीर पुतिन ने रूस की संभाली सत्ता, पांचवीं बार राष्ट्रपति पद की ली शपथ, अमेरिका, ब्रिटिश समेत कई यूरोपीय देशों ने किया बहिष्कार

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सत्ता संभाल ली है। राष्ट्रपति पुतिन ने मंगलवार को क्रेमलिन समारोह में छह साल के नए कार्यकाल के लिए शपथ ली। मॉस्को के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में पुतिन ने 33 शब्दों में शपथ ली। यह वही जगह है, जहां रूस के जार परिवार के 3 राजाओं (एलेक्जेंडर 2, एलेक्जेंडर 3 और निकोलस 2) की ताजपोशी हुई थी। पुतिन ने इससे पहले साल 2000 में पहली बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। लोकल समयानुसार यह शपथ ग्रहण कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू हुआ, जब भारत में दोपहर के ही 2:30 बज रहे थे।
रूस के राष्ट्रपति के तौर पर पुतिन ने पांचवीं बार शपथ लेते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करने की, रूस के नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान और सुरक्षा करने की, रूस के संविधान का पालन करना और उसकी रक्षा करने की, रूस की संप्रभुता, स्वतंत्रता, सुरक्षा और अखंडता की रक्षा करने की और लोगों की ईमानदारी से सेवा करने की शपथ ली। शपथ के बाद पुतिन ने कहा, हम और मजबूत होंगे। हम उन देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करेंगे जो हमें दुश्मन समझते हैं। मैं जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए हरसंभव कोशिश करूंगा। रूस में 15-17 मार्च को हुए चुनाव में पुतिन को 88% वोट मिले थे।
उनके विरोधी निकोले खारितोनोव को सिर्फ 4% वोट मिले थे। रूस में हुए पुतिन के शपथ ग्रहण समारोह का अमेरिका, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों ने बहिष्कार किया है। पुतिन ने साल 2000 में पहली बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। इसके बाद से 2004, 2012 और 2018 में भी वे राष्ट्रपति बन चुके हैं।रूस की सत्ता में लगातार मजूबत होते रहे पुतिन के सामने अपने इस कार्यकाल में कई तरह की चुनौतियां होंगी। खासतौर से यूक्रेन में युद्ध का संकट उनके सामने एक बड़ा चैलेंज है। पुतिन के मुख्य प्रतिद्वंद्वी एलेक्सी नवलनी की आर्कटिक जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत के बाद मार्च में हुए चुनाव को पश्चिम ने एक दिखावा करार दिया है। रूस में पुतिन के ज्यादातर विरोधी या तो जेल में हैं या देश छोड़ चुके हैं। 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद सत्ता पर पुतिन की पकड़ और मजबूत होती रही है लेकिन इसके चलते रूस पश्चिमी प्रतिबंधों का भी सामना कर रहा है, जिससे रूसी अर्थव्यवस्था को काफी झटका लगा है। अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए कदम उठाने की चुनौती पुतिन के सामने होगी। यूक्रेन पर आक्रमण के बाद पश्चिम के बैन को देखते हुए पुतिन ने ऊर्जा निर्यात में वृद्धि के साथ भारत और चीन को लुभाने के लिए पूर्व की ओर रुख किया है।
यह भी पढ़े: इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चुनावी चंदे पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !












