74 साल पहले 1948 में आज ही के दिन हैदराबाद का भारत में हुआ था विलय

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74 साल पहले आज के दिन भारत में हैदराबाद का विलय हुआ था। आजादी के 1 साल बाद 17 सितंबर साल 1948 को हैदराबाद का भारत में विलय हुआ था। आजादी के बाद भी कुछ स्वतंत्र रियासतें ऐसी थीं, जो भारत का हिस्सा बनने को तैयार नहीं थी। हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली भी भारत में विलय को तैयार नहीं थे। रियासतों को भारत में मिलाने का जिम्मा सरदार पटेल को मिला था। जब लंबी बातचीत के बाद भी हैदराबाद विलय के लिए तैयार नहीं हुआ तो ‘ऑपरेशन पोलो’ शुरू किया गया। पटेल ने 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना को हैदराबाद पर चढ़ाई करने का आदेश दे दिया। 3 दिनों के भीतर ही सेना ने हैदराबाद पर कब्जा कर लिया। 17 सितंबर की शाम तक हैदराबाद के निजाम ने बात मान ली और विलय के लिए राजी हो गए। बता दें कि 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी तो मिली लेकिन छत-विछत रूप में। अंग्रेजों ने देश का बंटवारा तो कर ही दिया था साथ में 565 देशी रियासतों को हवा में लटकता छोड़ दिया। जिन्हें अंग्रेजों की कूटनीति के चलते भारतीय संघ में शामिल होने या न होने का अधिकार दे दिया गया था। हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर और जूनागढ़ रियासतों ने अंग्रेजों के इसी चाल का फायदा उठाते हुए भारत में विलय नहीं कर स्वतंत्र रहने की बात कही। ऐसी प्रतिकूल स्थिति में राष्ट्र की एकता और अखंडता को हर तरह से खतरा था। इस खतरे को देखते हुए ही आजाद भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने तमाम मुश्किलों और चुनौतियों का सामना करते हुए न सिर्फ इन रियासतों का भारत संघ में विलय कर भारत को सुदृढ़ किया बल्कि उसे स्थायित्व भी प्रदान किया। आजाद भारत के एकीकरण की इस प्रक्रिया में सबसे आखिर में हैदराबाद रियासत का विलय हुआ। जो आजादी के एक साल बाद काफी संघर्ष के बाद संभव हुआ और तब कहीं जा कर भारत का एकीकरण पूर्ण हो पाया।



















