संसद के शीतकालीन सत्र का बुधवार को सातवां दिन था। शुरुआती छह दिन लोकसभा और राज्यसभा, दोनों ही सदन 153 मिनट ही चल सके हैं। स्पीकर ओम बिरला ने गतिरोध दूर करने की कोशिश में सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक में संविधान दिवस पर चर्चा से लेकर तमाम मुद्दों पर सहमति भी बनी। आज संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चली।

हालांकि राहुल गांधी को संभल जाने पर पुलिस द्वारा रोके जाने और किसानों के मुद्दे पर विपक्ष ने सदन में हंगामा जरूर किया। लेकिन कार्यवाही के दौरान कई सांसदों ने अपने मुद्दे उठाए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लोकसभा में बताया था कि जून 2020 की गलवान झड़प में 45 साल बाद पहली बार सैनिकों की जान गई और सीमा पर भारी हथियार तैनात हुए। भारत ने इस चुनौती का मजबूती से सामना किया और कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम करने की कोशिश की। 1988 से भारत-चीन ने सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने और शांति बनाए रखने के लिए कई समझौते किए। 1993, 1996, और 2005 में शांति और विश्वास बहाली के उपाय किए गए। लेकिन 2020 की घटना ने इन प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचाया और रिश्तों पर गहरा प्रभाव डाला। 2020 के बाद से भारत और चीन के रिश्ते सामान्य नहीं हैं। उस समय चीन की कार्रवाई से सीमा क्षेत्र में शांति भंग हुई थी। भारत और चीन बातचीत के जरिए सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत का मकसद ऐसा समाधान निकालना है, जो दोनों देशों को मंजूर हो। सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के सांसदों ने भी सदन में अपनी बात रखी।
वहीं बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने डीआरएम-जीएम पर सवाल उठाते हुए कहा कि एमपी का सम्मान रेलवे में कहीं नहीं है। एक ही परिवार के कई सदस्यों के टिकट में कुछ कन्फर्म होने और कुछ का कन्फर्म नहीं हो पाने की समस्या उठाया। उन्होंने महिलाओं का आरक्षण अनिवार्य करने की मांग करते हुए कहा कि विज्ञापन पर खर्च करते हैं लेकिन बुजुर्गों और पत्रकारों का क्या होगा। यात्री भाड़ा और मालभाड़ा बढ़ाने के बाद भी रेलवे घाटे में क्यों है। पप्पू यादव ने कहा कि आप निजीकरण के जरिये नौकरियां खत्म कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमपी विपक्ष के भी होते हैं। आप सम्मान करते हैं लेकिन काम नहीं करते। सम्मान कम कर दीजिए लेकिन काम कीजिए। आपसे हाथ जोड़कर आग्रह कर रहे हैं। इस पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी हंसते नजर आए। बिहार के खगड़िया से एलजेपी (रामविलास) के सांसद राजेश वर्मा ने रेलवे (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान दशहरा-दीवाली और छठ पूजा के समय बिहार के लिए ट्रेन चलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने केंद्र की एनडीए सरकार का हमेशा समर्थन किया है। त्योहार के समय बिहार के लोग सम्मान के साथ अपने घर जा सकें, इसके लिए इंतजाम होना चाहिए। जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कोरोना काल में बंद की गईं ट्रेन का परिचालन फिर से शुरू करने के साथ ही ठहराव पहले की ही तरह सुनिश्चित करने की मांग की। नालंदा से सांसद ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए किराया में छूट का प्रावधान जो कोरोना काल के बाद बंद कर दिया गया था, उसे फिर से शुरू किया जाना चाहिए। वहीं राज्यसभा में किसानों के मुद्दे पर हंगामे के बाद विपक्षी सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया है। विपक्षी सदस्य ‘किसान विरोधी ये सरकार, नहीं चलेगी नहीं चलेगी’ के नारे लगा रहे थे। बिहार के आरा से लेफ्ट के सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि ये भारतीय रेल का अमृतकाल चल रहा है लेकिन किसके लिए, अडानी के लिए। ऐसा नहीं होता तो भारतीय रेल अडानी रेल नहीं होती। गरिमामय यात्रा की सुविधा जब तक नहीं मिलती, अमृतकाल नहीं है. रेलवे में दो लाख से अधिक पद रिक्त हैं। कर्मचारियों पर बहुत अधिक बोझ है। बरौनी स्टेशन पर पिछले दिनों अजय कुमार नाम के एक कर्मचारी की ट्रेन से दबकर मौत हो गई। इन सब व्यवस्थाओं को ठीक करिए। रेलवे के काम के लिए समय सीमा तय की जानी चाहिए। आरा में राजधानी एक्सप्रेस का ठहराव हो। देश के जितने भी स्टेशन या हाल्ट बोगी से बहुत नीचे हो गए हैं, उनको ऊंचा उठवाइए। बोतलबंद पानी बिकवाने के लिए नल का पानी स्टेशनों से गायब होता जा रहा है। पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराइए। आरा स्टेशन पर आरएमएस को पटना ले जाया जा रहा है, उसे हटाया नहीं जाए।राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान सभापति जगदीप धनखड़ और विपक्षी नेताओं के बीच बहस हो गई। दरअसल विपक्ष के नेता किसान मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इस पर धनखड़ ने कहा, पिछले हफ्ते पांच दिन कार्यवाही के दौरान विपक्ष के किसी भी नेता ने किसान मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस नहीं दिया और आज घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। ये सब नहीं चलेगा। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में रेलवे (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया। यह बिल पुराने विधेयक रेलवे अधिनियम, 1989 को संसोधित करेगा। यह बिल रेलवे के डेवलपमेंट, ऑपरेशन और अन्य विभागों में नए नियमों से जुड़ा है। लोकसभा में 3 दिसंबर को बैंकिंग अमेंडमेंट बिल 2024 पास किया गया। इस बैंकिंग संशोधन बिल के तहत कई अहम बदलाव किए जाएंगे। भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934, बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949, भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम 1955 और अन्य कानूनों में संशोधन करेंगे। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने यह बिल लोकसभा में पेश किया था। इस बिल में टोटल 19 अमेंडमेंट्स यानी संशोधन प्रस्तावित हैं। बिल को संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में सरकार ने लोकसभा में पास करा लिया है। नए कानून के लागू होने के बाद अकाउंट होल्डर अब एक बैंक अकाउंट के लिए 4 नॉमिनी ऐड कर सकेंगे। यह बदलाव अनक्लेम्ड अमाउंट को सही उत्तराधिकारी तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। मार्च 2024 तक बैंकों में लगभग 78,000 करोड़ रुपए की ऐसी राशि है, जिस पर कोई दावा नहीं किया गया है।
Author: AK
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