
घोसी उपचुनाव की लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर नजर आ रही है। सपा और भाजपा के बीच यह उपचुनाव अब काटे की लड़ाई में हैं। दोनों ही पार्टियों की प्रतिष्ठा इस सीट से दाव पर लगी हुई है। जहां आज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आज घोसी विधानसभा के उपचुनाव में सपा प्रत्याशी सुधारकर सिंह के समर्थन में वोट मांग रहे है तो वही 2 सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घोसी में दारा सिंह चौहान के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करते नजर आएंगे।
बीजेपी विधायकों मंत्रियों ने घोसी में डाला डेरा:
घोसी उपचुनाव के लिए भाजपा ने अपनी कमर कस चुकी है। चुनाव प्रचार के लिए पार्टियों और उम्मीदवारों के पास सिर्फ 6 दिन का समय शेष है। ऐसे में इन आखिरी 6 दिनों को भुनाने के लिए भाजपा ने अपने दो दर्जन से अधिक मंत्रियों और 60 विधायकों की ड्यूटी घोसी उपचुनाव के लिए लगाई है। ये सभी विधायक और मंत्री घोसी में डेरा डाल कर बैठे है ताकि जनता का समर्थन हासिल कर उपचुनाव को जीता जा सके।
हर बिरादरी पर है नजर: घोसी के जातीय समीकरण को देखते हुए यह साफ लग रहा है कि जिस PDA फॉर्मूले की बात सपा करती रही है वो फार्मूला यहां लागू होता दिख रहा है। घोसी में कुल 4 लाख 20 हजार मतदाता है जिनमें 85 हजार मुस्लिम मतदाता और 70 हजार तक दलित, वही राजभर समाज भी 50 हजार से अधिक है। इसके अलावा लोनिया चौहान बिरादरी का कुल 46 हजार वोट तो यादव समाज के कुल 70 हजार वोट हैं। इस उपचुनाव में सपा के पीडीएफ फॉर्मूले की भी परीक्षा होगी। इसी समीकरण को देखते हुए भाजपा ने हर बिरादरी को साधने की रणनीति बनाई है। उपचुनाव में यूपी के दोनों डिप्टी सीएम, नगर विकास मंत्री ए के शर्मा, भूमिहार समाज को साधने वही मुस्लिम समाज को साधने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आज़ाद, अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष कुँवर बासित अली तो वही जाटव वोटर्स को लुभाने के लिए बेबी रानी मौर्य, असीम अरुण, विजय लक्ष्मी गौतम तो वही निषाद समाज को साधने के लिए राज्यमंत्री अनिल राजभर, रामकेश निषाद, राज्यसभा सदस्य बाबूराम निषाद, को जिम्मेदारी दी गयी है।
Author: AK
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