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UK Report Tags India as a Repressive Country: ब्रिटेन की रिपोर्ट में भारत को बताया गया दमनकारी देश

UK Report Tags India as a Repressive Country

ब्रिटेन की संसदीय रिपोर्ट में भारत को 12 दमनकारी देशों में शामिल किया गया है, जिसमें खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ का हवाला भी शामिल है।

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भूमिका: ब्रिटेन की विवादास्पद रिपोर्ट और भारत पर उठे सवाल

अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन ने भी एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने भारत की विदेश नीति और छवि को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। ब्रिटिश संसद की एक रिपोर्ट में भारत को उन 12 देशों में शामिल किया गया है, जिन्हें “दमनकारी” करार दिया गया है। रिपोर्ट का आरोप है कि ये देश ब्रिटेन में रह रहे अपने आलोचकों और असंतुष्टों को डराने-धमकाने की रणनीति अपनाते हैं।

इस रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) का भी उल्लेख किया गया है, जिसे भारत में प्रतिबंधित घोषित किया गया है। इस रिपोर्ट ने राजनीतिक हलकों से लेकर सामाजिक संगठनों तक चिंता की लहर पैदा कर दी है।


रिपोर्ट का नाम और मकसद क्या है?

‘Transnational Repression in the UK’ रिपोर्ट का सारांश

ब्रिटेन की संसद की जॉइंट कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स (JCHR) द्वारा जारी यह रिपोर्ट ‘Transnational Repression in the UK’ नाम से प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट में उन देशों का उल्लेख किया गया है, जो कथित रूप से ब्रिटेन में रह रहे लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, आंदोलन की आज़ादी और निजी सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।

रिपोर्ट का दावा है कि ये सरकारें अपने आलोचकों या विरोधियों को चुप कराने के लिए निगरानी, धमकी, कानूनी दबाव और सोशल मीडिया अभियानों का सहारा ले रही हैं।


भारत का नाम क्यों शामिल किया गया?

खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ पर फोकस

रिपोर्ट में भारत का उल्लेख मुख्य रूप से खालिस्तानी संगठन ‘Sikhs for Justice (SFJ)’ के संदर्भ में किया गया है। ब्रिटेन में स्थित यह संगठन खालिस्तान की मांग को लेकर सक्रिय है और भारत में इसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित किया गया है।

रिपोर्ट का दावा है कि भारत सरकार ने SFJ से जुड़े कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों पर दबाव बनाने की कोशिश की है। कुछ मामलों में निगरानी और धमकियों का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि, भारत की ओर से इस संगठन को एक उग्रवाद समर्थक और देशविरोधी इकाई बताया गया है, जिसने कई बार भारत विरोधी घटनाओं को हवा दी है।


रिपोर्ट में और किन देशों का उल्लेख?

भारत के अलावा जिन 11 देशों को इस सूची में रखा गया है, वे हैं:

  • चीन
  • रूस
  • पाकिस्तान
  • ईरान
  • तुर्की
  • सऊदी अरब
  • बहरीन
  • मिस्र
  • यूएई
  • रवांडा
  • इरिट्रिया

इन देशों पर आरोप है कि वे अपने नागरिकों को, जो अब ब्रिटेन में रह रहे हैं, डराने और निगरानी करने का प्रयास करते हैं।


ब्रिटेन की समिति की आपत्ति

मानवाधिकार हनन और लोकतंत्र पर असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि “ट्रांसनेशनल रिप्रेशन” यानी सीमा पार दमन, ब्रिटेन जैसे लोकतांत्रिक देश के मूल्यों के खिलाफ है। इस प्रकार की गतिविधियां न केवल व्यक्तियों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों पर भी आघात करती हैं।

समिति ने ब्रिटिश सरकार से कहा है कि:

  • ऐसे मामलों की तत्काल और निष्पक्ष जांच की जाए।
  • ब्रिटेन में रह रहे असंतुष्टों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • विदेशी सरकारों के प्रभाव को सीमित किया जाए।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया क्या रही?

अब तक भारत सरकार ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, अतीत में भारत ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है और इसे राजनीतिक एजेंडा या झूठे प्रचार का हिस्सा बताता रहा है।

भारत का यह भी मानना रहा है कि कई विदेशी संगठनों द्वारा खालिस्तान समर्थक गतिविधियां ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बढ़ रही हैं और वहां की सरकारें इन पर कार्रवाई करने में नाकाम रही हैं।


MI5 का डेटा: कितनी बढ़ी घटनाएं?

ब्रिटेन की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी MI5 के अनुसार, 2022 के बाद से “ट्रांसनेशनल रिप्रेशन” के मामलों में 48% की बढ़ोतरी हुई है। इसका अर्थ है कि विदेशों द्वारा ब्रिटेन में रह रहे व्यक्तियों पर दबाव या निगरानी की घटनाएं पहले की तुलना में तेज़ी से बढ़ी हैं।


भारत और ब्रिटेन के संबंधों पर असर?

भारत और ब्रिटेन के संबंध व्यापार, रक्षा, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के बीच Free Trade Agreement (FTA) को लेकर बातचीत भी चल रही है।

लेकिन इस रिपोर्ट से:

  • द्विपक्षीय संबंधों में तनाव आ सकता है।
  • भारत विरोधी तत्वों को अंतरराष्ट्रीय वैधता मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
  • भारत की वैश्विक छवि को नुकसान हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय

राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट के राजनीतिक उद्देश्य भी हो सकते हैं। ब्रिटेन की राजनीति में भारतीय समुदाय एक अहम वोट बैंक है और खालिस्तानी मुद्दा अक्सर स्थानीय राजनीति में उछाला जाता है।

कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह रिपोर्ट भारत की कूटनीतिक नीति को दबाने या प्रभावित करने की एक कोशिश हो सकती है।


मुख्य बिंदु (संक्षेप में):

  • ब्रिटेन ने भारत को 12 दमनकारी देशों में रखा।
  • रिपोर्ट में खालिस्तानी संगठन SFJ का उल्लेख।
  • रिपोर्ट का आरोप: भारत ने ब्रिटेन में असंतुष्टों को दबाने की कोशिश की।
  • MI5 के अनुसार 2022 से ऐसे मामलों में 48% वृद्धि।
  • भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

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Author: AK

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