बुध, अप्रैल 15, 2026

Patna AIIMS Strike: पटना एम्स में हड़ताल: विधायक से विवाद के बाद जूनियर डॉक्टरों का विरोध

Patna AIIMS Strike: Junior Doctors Protest Against MLA

पटना एम्स में विधायक से विवाद के बाद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल शुरू, सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी की कमान संभाली। जांच जारी है।

Patna AIIMS Strike: Junior Doctors Protest Against MLA


भूमिका: अस्पताल में हंगामा, स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

अस्पताल ऐसा स्थान होता है जहां मरीजों को राहत और इलाज की उम्मीद होती है। लेकिन जब स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग ही आंदोलन पर उतर आएं, तो व्यवस्था चरमरा जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ बिहार की राजधानी पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में, जहां एक विधायक और जूनियर डॉक्टर के बीच हुए विवाद ने हंगामे का रूप ले लिया।

विधायक चेतन आनंद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए जूनियर डॉक्टरों ने शुक्रवार को हड़ताल का ऐलान कर दिया, जिसके बाद ओपीडी सेवाओं पर सीधा असर पड़ा। हालांकि सीनियर डॉक्टरों ने मोर्चा संभालते हुए मरीजों की देखभाल जारी रखी।

आइए विस्तार से समझते हैं कि यह विवाद कैसे शुरू हुआ, इसके क्या परिणाम हुए और अब क्या स्थिति है।


विवाद की जड़: विधायक चेतन आनंद और डॉक्टरों के बीच टकराव

क्या हुआ था बुधवार रात?

मामला 31 जुलाई की रात का है जब शिवहर विधायक चेतन आनंद, जो कि पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के बेटे हैं, अपने समर्थकों के साथ एम्स पटना पहुंचे। बताया जा रहा है कि वे एक मरीज को देखने आए थे। इसी दौरान अस्पताल के सुरक्षा गार्ड ने उन्हें और उनके साथियों को हथियार लेकर भीतर जाने से रोका

यह रोक-टोक विधायक को नागवार गुजरी और विवाद बढ़ते-बढ़ते हाथापाई तक पहुँच गया। कहा जा रहा है कि गार्ड और कुछ एम्स कर्मियों ने मिलकर विधायक की पिटाई कर दी। विधायक ने इसे लेकर फुलवारी शरीफ थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।


विधायक का पक्ष: “मुझे जबरन रोका गया और पीटा गया”

चेतन आनंद का बयान

विधायक चेतन आनंद ने आरोप लगाया कि:

  • उन्हें गार्ड ने अस्पताल परिसर में जबरन रोका
  • मारपीट की गई और बदसलूकी की गई
  • उनके साथ आए लोगों को भी धमकाया गया
  • अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को ठीक से नहीं संभाला

उन्होंने इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया।


डॉक्टरों का पक्ष: “हमारी सुरक्षा और गरिमा पर हमला”

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) का विरोध

घटना के बाद एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों में गहरी नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि अस्पताल एक संवेदनशील स्थान है, जहां किसी को भी हथियार लेकर आने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

RDA ने कहा कि गार्ड ने अपनी ड्यूटी निभाई, लेकिन बदले में उन्हें और डॉक्टरों को गाली-गलौज और हिंसा का सामना करना पड़ा।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर विधायकों को विशेष अधिकार हैं, तो डॉक्टरों की सुरक्षा और गरिमा का क्या?


हड़ताल की शुरुआत: ओपीडी से बाहर आए जूनियर डॉक्टर

सुबह 9 बजे से विरोध प्रदर्शन शुरू

शुक्रवार की सुबह जैसे ही एम्स खुला, जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं से हटकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे बड़ी संख्या में अस्पताल परिसर के बाहर एकत्र हुए और “हमारे डॉक्टर सुरक्षित रहें”, “सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है” जैसे नारों के साथ विरोध जताया।

  • करीब 1200 से 1500 मरीजों ने सुबह रजिस्ट्रेशन कराया था
  • रजिस्ट्रेशन काउंटर को प्रदर्शनकारियों ने बंद करवा दिया
  • नियमित ऑपरेशन टाल दिए गए, इमरजेंसी ऑपरेशन किसी तरह किए गए

सीनियर डॉक्टरों ने संभाली मोर्चा

स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह नहीं रुकी

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बावजूद, सीनियर फैकल्टी ने मोर्चा संभालते हुए मरीजों का इलाज जारी रखा। ओपीडी और इनडोर सेवाएं पूरी तरह ठप न हों, इसके लिए अनुभवी डॉक्टरों ने जिम्मेदारी ली।

एम्स प्रशासन ने कहा है कि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका हर संभव प्रयास किया जा रहा है।


प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई

दो स्तर पर जांच शुरू

  1. एम्स प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच शुरू की है।
  2. फुलवारी शरीफ थाना में विधायक की शिकायत के आधार पर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

हालांकि, इस मुद्दे ने चिकित्सा सेवाओं की राजनीतिकरण पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनमानस

सोशल मीडिया पर बहस तेज

यह घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। कुछ लोग विधायक के व्यवहार को “शक्ति प्रदर्शन” कह रहे हैं, तो कुछ लोगों का मानना है कि डॉक्टरों को भी संयम से पेश आना चाहिए था।

ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #AIIMSPatna, #DoctorSafety जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।


सवाल जो अब खड़े हो रहे हैं

क्या अस्पतालों में राजनीति की दखल बढ़ रही है?

डॉक्टरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो?

क्या जनप्रतिनिधियों को विशेष छूट मिलनी चाहिए?

मरीजों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?


निष्कर्ष: समाधान क्या?

पटना एम्स में हुआ यह विवाद व्यक्तिगत से अधिक संस्थागत और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। एक ओर जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होती है कि वे संयम और मर्यादा का पालन करें, वहीं डॉक्टरों को भी शांतिपूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।

अस्पताल एक ऐसा स्थान है, जहां राजनीति नहीं, सेवा का भाव होना चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रशासन, पुलिस और अस्पताल मिलकर इस विवाद का निष्पक्ष समाधान निकालेंगे ताकि मरीजों की सेवा फिर से निर्बाध रूप से शुरू हो सके।


मुख्य बिंदु (संक्षेप में):

  • विधायक चेतन आनंद और डॉक्टरों के बीच विवाद के बाद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल
  • एम्स परिसर में तनाव, प्रदर्शन और सेवाओं पर असर
  • सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में डटे रहकर सेवाएं दीं
  • विधायक और डॉक्टर पक्ष में आरोप-प्रत्यारोप
  • जांच जारी, मरीजों की सेवा बहाल रखने के प्रयास

पटना एम्स हड़ताल, विधायक चेतन आनंद विवाद, जूनियर डॉक्टर प्रदर्शन, AIIMS Patna protest, OPD services Bihar

यह भी पढ़ेTRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स

यह भी पढ़ेBAFTA Awards 2025:ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ समेत 4 भारतीय फिल्मों का देखेगा BAFTA 2025 में जलवा , यहां देखें फिल्मों की लिस्ट

AIIMS Patna doctors strike

Chetan Anand MLA controversy

Junior doctors protest AIIMS

Patna AIIMS OPD services

Bihar healthcare strike news

AK
Author: AK

! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

Relates News